इस एंगल पर खबर को सिर्फ चुनाव परिणाम की रिपोर्ट न रखकर बरेली से जामिया तक पहुंची उपलब्धि, परिवार की सामाजिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि और रहबर खान की नई जिम्मेदारी को केंद्र में रखकर लिखा जा सकता है।
नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली के लिए एक और गौरव का क्षण सामने आया है। समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी के बेटे और जामिया मिलिया इस्लामिया के विधि संकाय के अंतिम वर्ष के छात्र मोहम्मद रहबर खान ने जामिया लॉ फैकल्टी के सब्जेक्ट एसोसिएशन चुनाव 2026-27 में महासचिव पद पर जीत दर्ज कर नया इतिहास रच दिया। जामिया के प्रतिष्ठित विधि संकाय में महासचिव चुने जाने वाले रहबर खान को बरेली से इस पद तक पहुंचने वाला पहला छात्र बताया जा रहा है।
रहबर खान की इस कामयाबी ने न सिर्फ उनके परिवार बल्कि बरेली के लोगों का भी ध्यान दिल्ली की ओर खींचा है। जामिया मिलिया इस्लामिया जैसे प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय के विधि संकाय में छात्र नेतृत्व की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी हासिल करना उनकी शैक्षणिक यात्रा के साथ-साथ संगठनात्मक और नेतृत्व क्षमता को भी सामने लाता है। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद उनके समर्थकों और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है।
मोहम्मद रहबर खान वर्तमान में बीए एलएलबी (ऑनर्स) के अंतिम वर्ष में अध्ययनरत हैं। विधि संकाय में आयोजित सब्जेक्ट एसोसिएशन चुनाव में उन्होंने महासचिव पद के लिए चुनाव लड़ा और छात्रों का विश्वास हासिल करते हुए जीत दर्ज की। परिणाम सामने आने के बाद संकाय के छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों ने उन्हें बधाई दी और सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं।
जीत के बाद छात्रों को संबोधित करते हुए रहबर खान ने अपनी प्राथमिकताएं भी स्पष्ट कीं। उन्होंने कहा कि यह जीत केवल उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि विधि संकाय के प्रत्येक छात्र के विश्वास और समर्थन की जीत है। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता संकाय के अकादमिक माहौल को और बेहतर बनाना, छात्रों के अधिकारों और कल्याण की रक्षा करना तथा छात्रों और प्रशासन के बीच मजबूत सेतु के रूप में काम करना होगी।
रहबर खान ने चुनाव में सहयोग करने वाले छात्रों, अपने सहपाठियों और संकाय के अध्यापकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अपने कार्यकाल के दौरान वह छात्रों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देंगे और संकाय की बेहतरी के लिए पूरी निष्ठा के साथ काम करेंगे।

रहबर खान की सफलता की चर्चा इसलिए भी खास है क्योंकि उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि बरेली की सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ी रही है। उनके पिता शमीम खां सुल्तानी समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष हैं। ऐसे में बेटे का देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के विधि संकाय में छात्र नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालना परिवार के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
बरेली से दिल्ली जाकर कानून की पढ़ाई कर रहे रहबर खान ने अब जामिया के विधि संकाय में छात्रों के बीच अपनी पहचान कायम की है। महासचिव के रूप में उनके सामने अब छात्रों से जुड़े अकादमिक, प्रशासनिक और कल्याणकारी मुद्दों को उठाने की जिम्मेदारी होगी। उनकी जीत ने यह भी दिखाया है कि बरेली के छात्र राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में न केवल शिक्षा हासिल कर रहे हैं, बल्कि वहां नेतृत्व की भूमिकाएं भी हासिल कर रहे हैं।

जामिया मिलिया इस्लामिया का विधि संकाय देश के प्रमुख विधि शिक्षण संस्थानों में शामिल है। ऐसे संस्थान में छात्र संगठन के महत्वपूर्ण पद पर निर्वाचित होना किसी भी विद्यार्थी के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। रहबर खान के सामने अब चुनावी जीत को छात्रहित के काम में बदलने की चुनौती होगी। उन्होंने जिस तरह अकादमिक माहौल सुधारने, छात्र अधिकारों और प्रशासन-छात्र संवाद को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है, उससे उनके कार्यकाल की दिशा भी स्पष्ट होती दिखाई दे रही है।
रहबर खान की जीत के बाद बरेली में भी उन्हें बधाई देने वालों का सिलसिला शुरू हो गया है। समर्थकों का कहना है कि जामिया के विधि संकाय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में महासचिव पद हासिल करना बरेली के लिए गर्व की बात है। खासकर उस समय जब कानून की पढ़ाई कर रहा बरेली का एक युवा देश की राजधानी में छात्रों के बीच नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाल रहा है।

अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि महासचिव के रूप में मोहम्मद रहबर खान अपने कार्यकाल में छात्रों से जुड़े मुद्दों को किस तरह उठाते हैं और अपने चुनाव के दौरान व्यक्त किए गए संकल्पों को किस रूप में जमीन पर उतारते हैं। फिलहाल उनकी जीत ने बरेली से जामिया तक एक नई पहचान जरूर कायम कर दी है।




