यूपी

फरीदपुर में किसानों के लिए सड़क पर उतरे एसएपी प्रमुख जयप्रकाश भास्कर, पैदल मार्च में उमड़ा किसानों का हुजूम देख विरोधियों के होश उड़े, सैकड़ों किसानों और प्रधानों-पूर्व प्रधानों की मौजूदगी के बीच एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, फसल मुआवजे से धान खरीद तक कई मुद्दों पर सरकार-प्रशासन को घेरा

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नीरज सिसौदिया, बरेली

फरीदपुर की सियासत में किसान अब सिर्फ वोट बैंक नहीं, बल्कि राजनीतिक दावेदारी मजबूत करने का आधार भी बनते दिखाई दे रहे हैं। इसी समीकरण को साधने की कोशिश में सर्वजन आम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयप्रकाश भास्कर मंगलवार को किसानों के मुद्दों के साथ सड़क पर उतरे। लकी मार्केट स्थित पार्टी कार्यालय से एसडीएम कार्यालय तक निकले पैदल मार्च में सैकड़ों किसानों, प्रधानों, पूर्व प्रधानों, बीडीसी सदस्यों और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी रही। भास्कर ने ज्ञापन सौंपकर बारिश से बर्बाद फसलों का मुआवजा, समय पर बीज-खाद, आवारा पशुओं से राहत और धान क्रय केंद्र जल्द चालू कराने की मांग उठाई। भास्कर के पैदल मार्च में उमड़ी किसानों की भीड़ ने विरोधियों के होश उड़ाकर रख दिए। इस भीड़ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सर्वजन आम पार्टी फरीदपुर में न सिर्फ तीसरे विकल्प के तौर पर उभर चुकी है बल्कि हर वर्ग में उसकी स्वीकार्यता भी बढ़ रही है।

यह कार्यक्रम महज ज्ञापन सौंपने तक सीमित नहीं रहा। फरीदपुर में किसान समस्याओं को लेकर भास्कर की सार्वजनिक सक्रियता और उनके साथ जुटे स्थानीय लोगों की मौजूदगी ने उन्हें राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले यह उनके लिए अपनी पहचान किसान हितों के पैरोकार के रूप में स्थापित करने का अवसर है।


भास्कर ने कहा कि अत्यधिक बारिश ने किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया है और उनकी आर्थिक मुश्किलें बढ़ाई हैं। उन्होंने दीपावली से पहले नुकसान का सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग की। उनका कहना था कि खेती के समय बीज और खाद की उपलब्धता सुनिश्चित होनी चाहिए, ताकि किसान जरूरी कृषि सामग्री के लिए परेशान न हों।
आवारा पशुओं की समस्या पर उन्होंने प्रत्येक न्याय पंचायत में गौशाला बनाने की मांग रखी। किसानों को दिन-रात खेतों की रखवाली करनी पड़ती है और इसके बावजूद फसलें नष्ट हो जाती हैं। इसके अलावा, जिन स्थानों पर धान क्रय केंद्र चालू नहीं हुए हैं, उन्हें जल्द शुरू करने की मांग की गई, ताकि किसान अपनी उपज मजबूरी में कम कीमत पर न बेचें।
भास्कर ने चेतावनी दी कि मांगों पर समय से कार्रवाई नहीं हुई तो सर्वजन आम पार्टी किसानों के हित में बड़े पैमाने पर आंदोलन करेगी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बड़े उद्योगपतियों को राहत और कर्ज में छूट दी जा सकती है, तो फसल बर्बाद होने पर किसानों को मुआवजा देने में देरी क्यों होनी चाहिए।

प्रधानों और स्थानीय प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने बढ़ाई चर्चा
मार्च में दिनेश दिवाकर, महेंद्र सिंह, रघुवीर सिंह और अशोक सिंह सहित कई प्रधान व पूर्व प्रधान शामिल हुए। मुन्नालाल, वीरपाल दिवाकर, रितेश कुमार और ओमप्रकाश दिवाकर सहित बीडीसी सदस्यों के अलावा जिला सहकारी बैंक से जुड़े लक्ष्मण प्रसाद, अमरपाल चौधरी और कई स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
स्थानीय स्तर पर सक्रिय इन चेहरों की भागीदारी ने कार्यक्रम को राजनीतिक महत्व दिया। भास्कर के लिए यह संदेश देने का अवसर बना कि वह किसानों के मुद्दों को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए लोगों को एक मंच पर ला सकते हैं। ऐसे आयोजनों से संगठन की मौजूदगी और स्थानीय संपर्कों को सार्वजनिक पहचान मिलती है।

2027 से पहले किसानों के मुद्दों पर दांव

फरीदपुर में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले किसानों की समस्याएं राजनीतिक बहस का मुद्दा बन सकती हैं। फसल नुकसान का मुआवजा, धान की खरीद और आवारा पशुओं से राहत जैसे सवाल सीधे ग्रामीण परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं। इन मुद्दों पर लगातार सक्रिय रहकर भास्कर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर सकते हैं।
इस प्रदर्शन से उनके विरोधियों को भी किसान मुद्दों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की चुनौती मिल सकती है। लेकिन इस सक्रियता का चुनावी लाभ कितना होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि ज्ञापन की मांगों पर क्या कार्रवाई होती है और भास्कर आगे भी किसानों के बीच अपनी मौजूदगी बनाए रखते हैं या नहीं। फिलहाल, मंगलवार का पैदल मार्च उन्हें फरीदपुर की किसान राजनीति में अपनी दावेदारी और पहचान सामने रखने का एक महत्वपूर्ण मंच दे गया है।

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