दिल्ली देश

उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा मोदी सरकार का अंतिम बजट

 नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी सरकार का आखिरी बजट आम आदमी की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। हालांकि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस बजट को लोक लुभावन बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन लेकिन वह अपनी कोशिशों में पूरी तरह से कामयाब नहीं हो सके। सबसे बड़ी निराशा सैलरीड पर्सन को हुई। इस बार के बजट में जहां टैक्स स्लैब में  कुछ राहत की उम्मीद आम आदमी को थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ।  सरकार ने टैक्स स्लैब में कोई भी बदलाव नहीं किया। महिलाओं और बुजुर्गों को भी आयकर छूट सीमा में कोई अतिरिक्त राहत नहीं दी गई।
वहीं बात अगर नई ट्रेनों की करें तो इस बार एक भी नई ट्रेन जनता के खाते में नहीं आई। हालांकि क्रांतिकारी बदलाव का फैसला लेते हुए अरुण जेटली ने देशभर की रेलवे लाइनों को ब्रॉडगेज में तब्दील करने की बात जरूर कही। लेकिन बढ़ती आबादी को देखते हुए ट्रेनों को भी बढ़ाए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। खासकर बिहार और बंगाल को जाने वाली ट्रेनों में बेतहाशा भीड़ रहती है। इन प्रदेशों के सांसदों ने रेल मंत्री से नई ट्रेनें चलाने और कुछ ट्रेनों के रूट बदले जाने की मांग भी की थी। इसके बावजूद इन सभी की मांगों को अनदेखा कर दिया गया और कोई भी ट्रेन नहीं चलाई गई। बात अगर पहाड़ी राज्यों की करें तो पहाड़ को पिछले बजट में भी कोई नई ट्रेन हासिल नहीं हो सकी थी खासकर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की अनदेखी की गई थी।
 किसानों को राहत देने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य लागत लागत का डेढ़ गुना किए जाने का ऐलान तो किया गया लेकिन यह सिर्फ उन्हीं फसलों पर लागू होगा जिन फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया गया है। अन्य फसलों का भी किसानों को सही दाम मिल सके इसकी कोई भी व्यवस्था सरकार की ओर से इस बजट में नहीं की गई है।
वहीं महंगाई से आम जनता को राहत दिलाने के लिए कोई भी कारगर उपाय इस बजट में नजर नहीं आया। ऐसे में यह तय है कि अगले 1 साल के दौरान जनता को महंगाई से कोई भी राहत नहीं मिलने वाली है।
 सांसदों को मिलने वाले भत्ते हर 5 साल में बढ़ाए जाने और राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति एवं राज्यपाल  का वेतन बढ़ाने को भी इस बजट में मंजूरी दी गई है।
 इस बजट में दूर के ख्वाब दिखाए गए हैं। 35000 किलोमीटर रेल लाइन को ब्रॉडगेज करने की बात तो कही गई है लेकिन यह कार्य कब तक पूरा होगा इसकी कोई समय सीमा तय नहीं की गई।
 वहीं उज्ज्वला योजना के तहत 80000000 गरीब महिलाओं को गैस कनेक्शन  देने का ऐलान कर सरकार ने गरीब वोट बैंक पर कब्जा जमाने का प्रयास जरूर किया है। साथ ही  सौभाग्य योजना के तहत 4 करोड़ गरीबों को मुफ्त बिजली कनेक्शन देने का फैसला भी राहत भरा है।
 छात्रों के लिए भी कोई विशेष तोहफा इस बजट में नहीं दिया गया है हालांकि शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए इंटीग्रेटेड B.Ed प्रोग्राम लागू करने को सरकार मैं अपनी उपलब्धियों में जरूर गिनाया है।
 ऐसे में सवाल यह उठता है कि अगर मात्र B.Ed से शिक्षक की योग्यता नहीं पर की जा सकती तो फिर इंटीग्रेटेड B.Ed प्रोग्राम का क्या औचित्य है। शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि एक टीचर की नौकरी के लिए सरकार कोर्स पर कोर्स का बोझ डाल रही है। स्टूडेंट एक के बाद एक कितने कोर्स करेगा। वही कृषि उत्पाद कंपनियों को टैक्स में छूट देकर सरकार ने इन कंपनियों को बड़ी राहत प्रदान की है। लेकिन सवाल यह उठता है कि कम इन कंपनियों को टैक्स में छूट का फायदा किसानों तक पहुंचेगा भी या नहीं। इन्हें छूट देने पर किसानों को कृषि उत्पाद सस्ते दामों में मिलेंगे या नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं है। हालांकि किसानों की कर्ज माफी के लिए सरकार ने अच्छा खासा बजट रखा है। बहरहाल युवाओं को यह बजट निराश करने वाला है रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में कोई भी उम्मीद की किरण नजर नहीं आती।
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