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सांसदों को भी साफ पानी नहीं दे रही सरकार!

नई दिल्ली। आम जनता को स्वच्छ पानी मुहैया कराने का सरकार का दावा फेल साबित हो रहा है। आम जनता तो दूर सरकार सांसदों तक को शुद्ध पानी मुहैया नहीं करा पा रही है। यही वजह है कि नर्मदा अपार्टमेंट स्थित सांसदों के फ्लैट्स मैं करीब 90 फ़ीसदी सांसद RO सिस्टम द्वारा फिल्टर पानी ही पीने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। सरकार की नाकामी से न सिर्फ आम आदमी को की जा रही जलापूर्ति का अंदाजा लगाया जा सकता है बल्कि बिजली का भी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
 दिलचस्प बात यह है कि जनता की आवाज संसद में बुलंद करने वाले सांसद खुद दूषित जल आपूर्ति के वाटर फिल्टर लगाने को मजबूर हैं। अब सवाल यह उठता है कि क्या वाकई में हमारे सांसद इतने लाचार है कि वह अपने घरों में हो रही जलापूर्ति भी नहीं सुधार पा रहे? अगर वास्तव में ऐसा है तो यह सांसद आम आदमी को स्वच्छ पानी कैसे मुहैया करवाचलते  पाएंगे।
 दरअसल,  पानी की शुद्धता से बिजली की बचत का गहरा रिश्ता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि एक आरओ सिस्टम अगर दिनभर चलता है तो कम से कम 1 यूनिट बिजली प्रतिदिन खर्च होती है। ऐसे में अगर देश के करीब 400 से भी अधिक सांसदों के फ्लैट में RO सिस्टम चलता है तो कम से कम 400 यूनिट बिजली प्रतिदिन सिर्फ पानी को शुद्ध करने पर ही खर्च। यह इतनी बिजली है कि एक मध्यम वर्गीय परिवार पूरे माह में भी इतनी बिजली खर्च नहीं कर पाता। दिल्ली सरकार जल आपूर्ति में सुधार कर ले तो अकेले सांसदों के फ्लैट से ही इतनी बिजली बचाई जा सकती है जो गर्मी में बिजली का संकट तक दूर कर सकती है।
 उधर नाम ना छापने की शर्त पर दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि नर्मदा अपार्टमेंट जैसी वीवीआईपी इलाकों में जल आपूर्ति की विशेष व्यवस्था की गई है। कभी किसी सांसद ने दूषित जल आपूर्ति की कोई शिकायत भी नहीं की है। रही बात आरओ सिस्टम लगाने की तो यह आजकल फैशन बन गया है। इसी फैशन के चलते सांसदों ने अपने फ्लैट में आर ओ सिस्टम लगाए हैं। उनका कहना है कि  सांसदों के नर्मदा अपार्टमेंट स्थित फ्लैट का सारा खर्च केंद्र सरकार करती है। सांसदों को बिजली का बिल नहीं देना पड़ता। ऐसे  मैं बिजली की फिजूलखर्ची के लिए सांसद खुद जिम्मेदार हैं न कि दिल्ली सरकार। जो पानी सांसदों को सप्लाई किया जाता है वह पूरी तरह से स्वच्छ, शुद्ध और पीने लायक है। उन्हें RO लगाने की कोई जरूरत नहीं है।
 बहरहाल अगर दिल्ली सरकार की इस अधिकारी की बात सही है तो सांसदों को इस फिजूलखर्ची पर जरूर रोक लगानी चाहिए। अगर सरकार शुद्ध पानी मुहैया नहीं करा पा रही है तो इन सांसदों को उस आम आदमी के बारे में भी सोचना होगा जो आरओ लगा पाने में समर्थ ना होने के चलते दूषित पानी पीने को मजबूर है।
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