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अपनी शक्तियों से दुखियों की तकदीर संवार रहा यह नाथ, सिर्फ जन कल्याण के लिए ही करता है शक्तियों का इस्तेमाल

नीरज सिसौदिया, नई दिल्ली 

दौलत का कमाने की अंधी दौड़ में एक तरफ जहां दुनिया भर में एस्ट्रोलॉजर और ज्योतिषाचार्य अंधविश्वास को बढ़ावा देने और लोगों से पैसे ऐंठने के कारोबार में जुटे हुए हैं, तंत्र मंत्र के नाम पर जहां लोग अपनी विद्या का गलत इस्तेमाल तक करने से पीछे नहीं हटते, वहीं एक शख्स ऐसा भी है जो अपनी अलौकिक शक्तियों का इस्तेमाल सिर्फ जनकल्याण के लिए करता है| वह चंडीगढ़ और पंजाब के विभिन्न शहरों में अपने कार्यक्रमों का आयोजन जरूर करता है लेकिन उसके कार्यक्रम में शामिल होने के लिए किसी भी तरह के शुल्क को अदा करने की आवश्यकता नहीं पड़ती| चंडीगढ़ और बठिंडा के बाद यह शख्स गिद्दड़बाहा में भी अपना प्रोग्राम कर रहा है लेकिन यहां भी लोगों की एंट्री निशुल्क हुई है| सबसे बड़ी बात यह है कि नाथ गद्दी से प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करने वाले इस शख्स ने कभी किसी का अहित करने के लिए अपनी अलौकिक शक्तियों का इस्तेमाल नहीं किया|

धन-दौलत के मोह से कोसों दूर यह शख्स सिर्फ जनकल्याण के लिए ही अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करता है और इस कार्य में उसे प्रसिद्धि भी मिल रही है| इतना ही नहीं अपनी शक्तियों के बल पर यह न सिर्फ कई दुखी लोगों की तकदीर संवार चुका है बल्कि कई ऐसे लोगों की जिंदगी भी बचा चुका है जो हताश होकर आत्महत्या जैसा गंभीर कदम उठाने का फैसला कर चुके थे| जी हां हम बात कर रहे हैं जालंधर के ज्योतिष रत्न नरेश नाथ की|

नरेश नाथ ने अपने तप के बल पर आध्यात्मिक शक्तियां हासिल की हैं| जिनका उपयोग वह सिर्फ जनकल्याण के लिए करते हैं| उनकी कई भविष्यवाणियां सच साबित हुई हैं जिनमें उन्होंने केंद्र सरकार को पहले ही देश के हित के प्रति आगाह कर दिया था| इस संबंध में नरेश नाथ कहते हैं कि आजकल मैं अपने फेसबुक के दूसरे पेज परमार्थ की ओर में नाथ शक्तियों, अध्यात्म योग की शक्तियों के माध्यम से जनकल्याण कैसे हुआ इस विषय पर कथा बता रहा हूं. मेरा मकसद डर और अंधविश्वास को बढ़ाना नहीं है लेकिन मानवता जिन मूल्यों पर खड़ी है उनको बताना जरूरी है. कारण वह शक्तियां दुनियावी आंखों और दुनियावी कैमरों से विदित नहीं हो सकती हैं वे केवल अध्यात्म योग के बल और नाथ गुरु की कृपा से देखी और अनुभव की जा सकती हैं इस तरह की घटनाएं मेरे जीवन में करीब 30 से 40,000 परिवार के आने पर मुझे विदित हो गईं.
इस संदर्भ में मैं यही कहूंगा कि आप अपने कुल की मर्यादा के अनुकूल कर्म करें, धर्म पर चलें, सत्य का साथ कभी मत छोड़ें, यही धर्म का आधार है. जहां धर्म होता है वहां लक्ष्मी होती है और सभी सुख होते हैं. जब-जब भी मैं इन क्रियाओं को याद करूंगा, लिखता रहूंगा पढ़ते रहिएगा परमार्थ की ओर में दिव्य कथाएं
जय गुरु गोरखनाथ.

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