यूपी

सीलिंग के विरोध में सतीश कातिब मम्मा ने खोला मोर्चा, मनमानी पर नगर आयुक्त को घेरा, पूछा-नगर निगम अधिनियम की कौन सी धारा देती है सीलिंग का अधिकार

नीरज सिसौदिया, बरेली
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और वार्ड नंबर 23 के सभासद सतीश चंद्र सक्सेना उर्फ मम्मा कातिब ने नगर निगम के अधिकारियों द्वारा गलत तरीके से की जा रही सीलिंग की कार्रवाई के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है| इस संबंध में मम्मा ने नगर आयुक्त को एक पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 98 के तहत सवाल पूछा है कि जलकर, हाउस टैक्स और सीवर कर का बकाया वसूलने हेतु नगर निगम अधिनियम की किस धारा में नगर निगम को सीलिंग की कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है| उन्होंने कहा है कि आगामी नगर निगम बोर्ड की बैठक में यह अवगत कराने की कृपा करें कि नगर निगम अधिनियम की कौन सी धारा के तहत नगर निगम के अधिकारी सीलिंग की कार्रवाई करते हैं| साथ ही उन्होंने नगर आयुक्त से यह भी बताने को कहा है कि वर्ष 2020 और वर्ष 2021 में कितनी दुकानों को सील किया गया और और कितनी धनराशि किस-किस से लेकर उनकी सील खोली गई| बता दें कि नगर निगम अक्सर सीलिंग की कार्रवाई कर देता है जबकि नगर निगम अधिनियम में कहीं भी निगम को किसी भी प्रकार की संपत्ति को सील करने का अधिकार नहीं दिया गया है| पिछले दिनों तो धर्मदत्त सिटी अस्पताल को सील करके नगर निगम के अधिकारियों ने सारी हदें पार कर दी| इतना ही नहीं निगम के अधिकारी तो जेसीबी लेकर अस्पताल को गिराने तक पहुंच गए थे लेकिन स्थानीय विधायक और महापौर व अस्पताल संचालक के विरोध के चलते वह अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सके और अराजकता फैलाने के आरोप में अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह समेत 20 निगम कर्मियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कर दिया गया|
कर विभाग की अधिकारी निशा को नहीं पता कानून, नगर आयुक्त के नियम विरुद्ध आदेश पर भी आंख मूंद कर करती है अमल
नगर निगम के अधिकारी मनमाने तरीके से सीलिंग तो कर ही रहे हैं साथ ही कर विभाग के कुछ अधिकारियों पर नगर आयुक्त अपने कानून थोप रहे हैं. ये अधिकारी नगर आयुक्त द्वारा बनाए गए कानूनों को जनता पर थोप रहे हैं. ताजा मामला डीडीपुरम का है. यहां हाल ही में तीन लाख रुपये बकाया होने पर कर विभाग की अधिकारी निशा ने हरमिलाप बैंक्वेट हॉल सील कर दिया. जब मम्मा ने उनसे पूछा कि नगर निगम अधिनियम की कौन सी धारा के तहत उन्होंने सीलिंग की कार्रवाई की है तो वह कोई जवाब नहीं दे सकीं और कहने लगीं कि नगर आयुक्त का आदेश था इसलिए सील कर दिया. जब मम्मा ने पूछा कि नगर आयुक्त अगर नियम विरुद्ध आदेश देंगे तो आप उस पर अमल कैसे कर देंगी तो वह कुछ भी जवाब नहीं दे सकीं. स्पष्ट है कि निगम अधिकारी खुद भी जानते हैं कि किसी भी भवन को सील करने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है फिर भी जान-बूझ कर वह सीलिंग की कार्रवाई कर कानून को खुलेआम चुनौती दे रहे हैं.ऐसे में अपना कानून बनाकर जंगल राज फैलाने वाले नगर आयुक्त को सलाखों के पीछे क्यों नहीं भेजा जा रहा?क्या किसी भी अधिकारी को कानून से खेलने की खुली छूट है? अगर यूं ही मनमाने कानून बनते रहे तो वह दिन दूर नहीं जब जनता खुद ही बीच चौराहे पर ऐसे अधिकारियों की जूतम पैजार कर इंसाफ करने लगेगी. योगी सरकार को नगर आयुक्त जैसे अधिकारियों पर लगाम लगाने की आवश्यकता है वरना जनता बेलगाम हो गई तो इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.

भाजपा महानगर अध्यक्ष को लिखा पत्र 

मम्मा ने भाजपा महानगर अध्यक्ष डा केएम अरोड़ा को एक पत्र लिखकर सरकार और संगठन को नगर आयुक्त अभिषेक आनंद जैसे भ्रष्ट अधिकारियों के बारे में अवगत कराने की मांग की है. मम्मा ने कहा है कि ऐसे अधिकारियों की वजह से प्रदेश में खासतौर पर बरेली में पार्टी की छवि खराब हो रही है. ये अधिकारी विपक्षी दलों से मिलकर एक साजिश के तहत पार्टी की छवि खराब करने में जुटे हैं. इनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए.

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