यूपी

ढाई दशक तक बरेली की सियासत में चमकते रहे राम सिंह खन्ना, उसके बाद उपेक्षित रहा खत्री पंजाबी समाज, किसी को नहीं मिला विधानसभा का टिकट

नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली की सियासत में कभी खत्री पंजाबी समाज की तूती बोला करती थी. यह वह दौर था जब स्व. राम सिंह खन्ना राजनीति के फलक पर सितारों की मानिंद चमक रहे थे. इंदिरा गांधी और संजय गांधी जैसे नेता भी उनके मुरीद हुआ करते थे लेकिन राम सिंह खन्ना के बाद खत्री पंजाबी समाज को राजनीतिक दलों ने दरकिनार कर दिया और आज तक इस समाज के किसी भी नेता को विधानसभा का टिकट नहीं दिया.
स्व. राम सिंह खन्ना के भाई संतोष खन्ना बताते हैं, ‘हम चार भाईयों में राम सिंह सबसे बड़े थे. हमारे पिता स्व. बीएस खन्ना उस वक्त रेलवे में छोटी सी नौकरी करते थे. राम सिंह मुझसे उम्र में लगभग 25 साल बड़े थे. उस वक्त खन्नू मोहल्ले में एक कमरे में हम चार भाई और माता-पिता रहते थे. आर्थिक हालात अच्छे नहीं थे. किसी तरह गुजर-बसर चलता था. भैया ने गरीबी झेली थी इसलिए गरीबों का दर्द भी वह बाखूबी समझते थे.’
राम सिंह खन्ना ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत छात्र जीवन से ही कर दी थी. संतोष खन्ना बताते हैं, ‘स्कूल टाइम से ही वह राजनीति में उतर गए थे. कॉलेज में छात्र राजनीति का हिस्सा रहे. वर्ष 1953 में वह पहली बार बरेली नगर पालिका के चेयरमैन बने. फिर वर्ष 1957 में दोबारा उन्हें नगर पालिका का चेयरमैन बनाया गया. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.’


वर्ष 1969 में राम सिंह खन्ना भारतीय क्रांति दल से विधायक चुने गए. 1971 में राज नारायण राज्यसभा का चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन इंदिरा गांधी ऐसा नहीं चाहती थीं. इसलिए इंदिरा गांधी के पीए यशपाल कपूर ने राम सिंह खन्ना से मुलाकात की. राम सिंह खन्ना ने राज नारायण को रोकने के लिए 17 विधायक इकट्ठा कर लिए. इस पर इंदिरा गांधी ने उन्हें कांग्रेस ज्वाइन करने का ऑफर दिया लेकिन राम सिंह खन्ना ने मना कर दिया. खन्ना के इस जवाब से इंदिरा गांधी बेहद प्रभावित हुईं. बाद में खन्ना इंकार नहीं कर सके और कांग्रेस में शामिल हो गए. इसके बाद वह इंदिरा गांधी की किचन कैबिनेट का हिस्सा बन गए.
संतोष खन्ना बताते हैं कि इमरजेंसी में जब संजय गांधी को जेल ले जाया जाना था तो उस वक्त संजय गांधी बरेली में राम सिंह खन्ना के घर में ही रुके थे. उसके बाद यहीं से उन्हें सेंट्रल जेल ले जाया गया था.’


इंदिरा गांधी से उनके संबंध बहुत अच्छे रहे. यही वजह रही कि पहली बार कांग्रेस से चुनाव जीते तो पहली बार में ही उन्हें मंत्री बना दिया गया. साथ ही उन्हें 17 विभाग दिये गए. नगर विकास मंत्री रहते हुए उन्होंने बरेली में विकास के नए आयाम गढ़े. बरेली नगर पालिका को महापालिका का दर्जा दिलाने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है.’
राम सिंह खन्ना उस वक्त राजनीति से जुड़ने वाले युवाओं के आदर्श हुआ करते थे. वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधानसभा प्रत्याशी प्रेम प्रकाश अग्रवाल बताते हैं कि राम सिंह खन्ना जमीनी स्तर के नेता थे. वह रिक्शे पर बैठकर राजनीति करने वाले नेता थे. गरीबों के मसीहा थे और जरूरतमंदों के मददगार भी थे. हर जाति, धर्म के लोग उन्हें प्यारे थे और लोग भी उन्हें बेहद पसंद करते थे.

स्व. राम सिंह खन्ना के बारे में बताते वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रेम प्रकाश अग्रवाल.

वह कहते हैं, ’70 के दशक में उनका सितारा बुलंदियों पर था. उस वक्त मेरी उम्र बहुत कम थी लेकिन कई सभाओं में उनके साथ काम करने का मौका मिला.वह कभी-कभी तो रिक्शे वालों से भी चुनाव के लिए शगुन के तौर पर 25 पैसे चंदा मांग लेते थे. उन्हें इसमें कोई झिझक महसूस नहीं होती थी. यही बड़प्पन था उनका जिससे हर वर्ग उन्हें बेहद पसंद करता था.’
वरिष्ठ समाजसेवी अश्विनी ओबरॉय बताते हैं, ‘राम सिंह खन्ना जमीनी नेता थे. बरेली के विकास में उनका अहम योगदान रहा है. साथ ही व्यक्तित्व के भी धनी थे.’

पूर्व कांग्रेस नेता एवं समाजसेवी अश्विनी ओबरॉय.

राम सिंह खन्ना मंत्री तो कांग्रेस सरकार में बने थे मगर विरोधी भी उनके कायल थे.
समाजवादी पार्टी के पूर्व जिला महासचिव एवं जिला सहकारी संघ के पूर्व चेयरमैन महेश पांडेय बताते हैं, ‘राम सिंह खन्ना जब मंत्री थे तो उस वक्त मैं कांग्रेस में ही था. कार्यकर्ताओं के प्रति उनका स्नेह ऐसा था कि हर कोई उनका मुरीद था. मुझे भी उनके साथ काम करने का अवसर मिला. अमीर-गरीब में वह कोई भेद नहीं करते थे. उस दौर में उनकी तूती बोलती थी.’

सपा के पूर्व जिला महासचिव महेश पांडेय.

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष और पूर्व डिप्टी मेयर डा. मोहम्मद खालिद कहते हैं, ‘जब राम सिंह खन्ना मंत्री थे तो मैं केंद्रीय विद्यालय में 12वीं कक्षा में पढ़ता था. मुझे आज भी याद है कि उस दौरान होली मेले में स्कूलों की स्टॉल लगा करती थी. हमने भी स्टाल लगाई थी. खन्ना जी मेले में आए थे तो हमने उन्हें कॉफी पिलाई थी. हमारा हौसला बढ़ाने के लिए उन्होंने हमें सौ रुपये का नोट दिया था. उन्हें हिन्दू-मुस्लिम से कोई फर्क नहीं पड़ता था. ऐसा राजनेता आज के दौर में मिलना मुश्किल है.’

स्व. राम सिंह खन्ना के बारे में बताते डा. मो. खालिद.

राम सिंह खन्ना के भाई संतोष खन्ना दो बार पार्षद रहे लेकिन खन्ना की मौत के बाद उनके परिवार के किसी भी व्यक्ति की विधानसभा का टिकट नहीं दिया गया. राम सिंह खन्ना के भतीजे मोहित खन्ना पूजा सेवा संस्थान, रोटरी क्लब सहित कई संस्थाओं से जुड़े हैं. समाजसेवा के क्षेत्र में अहम भूमिका निभा रहे हैं लेकिन राजनीति से दूर हैं. राम सिंह खन्ना की अपनी सिर्फ एक बेटी थी जो मानसिक रूप से कमजोर थी जिनकी अब मौत हो चुकी है. कुछ साल पहले उनकी पत्नी का भी निधन हो गया. राम सिंह खन्ना की सियासत की विरासत संभालने वाला कोई नहीं हैउनके भतीजे मोहित खन्ना फिलहाल राजनीति से दूर हैं लेकिन अवसर मिला तो विधानसभा चुनाव लड़ेंगे यह भी तय नहीं है बातचीत राम सिंह खन्ना के परिवार की ही नहीं है राम सिंह खन्ना के निधन के बाद खत्री समाज के भी किसी भी नेता को किसी भी पार्टी ने विधानसभा का टिकट देना मुनासिब नहीं समझा ऐसे में छतरी पंजाबी समाज उपेक्षित होता चला गया. अब एक बार फिर खत्री पंजाबी समाज के नेता को विधानसभा चुनाव में टिकट देने की मांग जोर शोर से उठने लगी है संजय आनंद अतुल कपूर अश्विनी ओबरॉय भाजपा जिला महानगर अध्यक्ष डॉक्टर अरोड़ाजैसे कई नेता विधानसभा टिकट के प्रबल दावेदार हैंअब देखना यह होगा इस बार पार्टी इनमें से किसी नेता को विधानसभा का टिकट देने के काबिल समझती की है अथवा नहीं.

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