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“बदतमीज समाजवादी”, घर में घमासान, सीनियर नेता परेशान, कार्रवाई कब करेगा हाईकमान?

नीरज सिसौदिया, बरेली
विधानसभा चुनाव से पहले जनहित के मुद्दों और भाजपा सरकार के अत्याचार क् विरोध में पहली बार सड़कों पर उतरी समाजवादी पार्टी का आंदोलन पहले ही दिन आपसी फूट की भेंट चढ़ गया. पार्टी के महानगर महासचिव गौरव सक्सेना और उपाध्यक्ष शमीम अहमद का रवैया एक बार फिर पार्टी की थू-थू करा गया. हालांकि, महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी की सूझबूझ से मामले को मौके पर ही निपटा दिया गया लेकिन अनुशासनहीनता की चिंगारी वरिष्ठ समाजवादी नेताओं के दिलों में शोला बनती जा रही है. सबके निशाने पर गौरव सक्सेना हैं. ऐसा होना लाजिमी भी है. विवादों से गौरव सक्सेना का गहरा नाता रहा है. ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि गौरव सक्सेना किसी पार्टी नेता से भिड़े हों. सीनियर और साथी नेताओं से बदतमीजी का उनका इतिहास काफी पुराना रहा है. हालांकि, कई मामलों में गौरव सक्सेना द्वारा की गई बदतमीजी के वाजिब कारण भी रहे हैं लेकिन मामले को व्यवस्थित तरीके से पार्टी मंच पर उठाने की बजाय गौरव सक्सेना ने हर बार ऑन द स्पॉट ही फैसला किया है. छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने के लिए गौरव सक्सेना पूरे पार्टी कार्यालय में जाने जाते हैं. उनके इस रवैये की वजह से कई पार्टी नेता तो उनसे दूरी ही बनाकर रखते हैं. वहीं पूर्व समाजवादी नेता और वर्तमान भाजपा विधायक डा. अरुण कुमार से नजदीकियों के चलते भी गौरव सक्सेना पार्टी नेताओं के निशाने पर रहते हैं.
अब नजर डालते हैं गौरव सक्सेना और अन्य पार्टी नेताओं के बीच हुए विवादों पर. पूर्व मंत्री भगवत सरन गंगवार के करीबियों में शुमार गौरव सक्सेना के विवादों की शुरूआत पार्टी के पूर्व जिला उपाध्यक्ष रईस अहमद अब्बासी से साथ हुई. बताया जाता है कि अब्बासी एक मीटिंग के दौरान पार्टी कार्यालय पहुंचे थे. वहां जब उन्होंने गौरव सक्सेना से मीटिंग के बारे में जानकारी न देने की वजह पूछी तो गौरव सक्सेना उनसे बदतमीजी पर आमादा हो गए. किसी तरह मामला शांत कराया गया था. गौरव सक्सेना का कहना है कि उन्होंने कोई बदतमीजी नहीं की थी. अब्बासी से बस इतना कहा था कि वह जिले के पदाधिकारी हैं और बैठक की जानकारी उन्हें जिले वाले ही देंगे हम नहीं. जब उन्होंने बदतमीजी की तो मैंने भी मुंहतोड़ जवाब दिया. गौरव सक्सेना यह भूल गए कि पार्टी का एक डेकोरम होता है जिसे बरकरार रखना हर पार्टी कार्यकर्ता की जिम्मेदारी होती है. अगर पार्टी मंच पर बात नहीं सुनी जाती है तो उस डेकोरम से इतर जाकर कार्रवाई की जाती है न कि सीनियर नेता को भरी सभा में बेइज्जत करके. हालांकि, पार्टी के कुछ आला नेताओं के करीबी होने के कारण गौरव सक्सेना की उस गलती को वहीं माफ कर दिया गया था. इस मामले ने गौरव सक्सेना के हौसले और बढ़ा दिए. अब गौरव सक्सेना खुद को सर्वे सर्वा समझने लगे और पार्टी पदाधिकारियों की परेशानी इतनी बढ़ गई कि गौरव सक्सेना के खिलाफ उन्हें पुलिस से इंसाफ की गुहार तक लगानी पड़ी. यह गौरव सक्सेना की बदतमीजी का दूसरा मामला कहा जा सकता है. पार्टी के कोषाध्यक्ष संदीप बग्गा ने गौरव सक्सेना पर दिसंबर 2020 में न सिर्फ बदतमीजी, मारपीट करने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए बल्कि एडीजी अविनाश चंद्र को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग भी की थी. संदीप बग्गा ने गौरव पर उनकी मां के साथ अभद्रता का आरोप भी लगाया था. सपा नेताओं का कहना है कि चूंकि गौरव सक्सेना भाजपा विधायक डा. अरुण कुमार के भी चहेते हैं और गौरव सक्सेना अक्सर अपने समाज के कार्यक्रमों में डा. अरुण कुमार को अतिथि के तौर पर आमंत्रित कर सम्मानित भी करते रहते हैं इसलिए संदीप बग्गा की शिकायतों पर पुलिस ने भी कोई कार्रवाई नहीं की.

भाजपा विधायक डा. अरुण कुमार का आशीर्वाद लेते गौरव सक्सेना.

अब तीसरा मामला 15 जुलाई को कलेक्ट्रेट पर धरने के दौरान सामने आया. जब पार्षद शमीम अहमद से गौरव सक्सेना भिड़ गए. शमीम अहमद का कहना है कि उन्होंने गौरव से सिर्फ थोड़ा साइड होने को कहा था लेकिन गौरव उनके साथ बदतमीजी पर उतारू हो गए और गाली गलौज करने लगे. वहीं गौरव सक्सेना ने कहा कि शमीम अहमद ने उनसे बदतमीजी की जिसका जवाब उन्होंने उन्हीं के शब्दों में दिया.
कुछ सपा नेताओं का कहना है कि जब डा. अरुण कुमार समाजवादी पार्टी में थे तो एक ही बिरादरी के होने के कारण गौरव सक्सेना डा. अरुण कुमार के करीबी बन गए थे. जब अरुण कुमार भाजपा में शामिल हो गए और विधायक बन गए तो गौरव सक्सेना का अरुण प्रेम और बढ़ गया. यह प्रेम इतना बढ़ा कि चुनाव में गौरव सक्सेना अंदरखाने उनकी मदद भी करते रहे. बताया जाता है कि एक बार गौरव सक्सेना की गर्दन एक गंभीर अपराध में फंस चुकी थी लेकिन डा. अरुण कुमार ने उन्हें पुलिस के चंगुल से बचा लिया था जिस कारण गौरव सक्सेना पूरी तरह अरुण कुमार के प्रति समर्पित हो गए. ये बात सीनियरों को नागवार गुजरी और जिसने भी गौरव सक्सेना का विरोध किया उसे किसी न किसी बहाने जलालत झेलनी पड़ी. वहीं गौरव सक्सेना ने कहा कि डा. अरुण कुमार उनकी बिरादरी के हैं. यह बात सही है कि उनके डा. अरुण कुमार के साथ बेहतर रिश्ते हैं और चित्रांश महासभा के कार्यक्रम में उन्होंने डा. अरुण कुमार को आमंत्रित भी किया था लेकिन अरुण कुमार उनके लिए पार्टी से बढ़कर नहीं हैं.
जब इस संबंध में महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह कोई बड़ा मामला नहीं है. हल्की नोकझोंक थी. दोनों पदाधिकारियों को समझा दिया गया है. मेरे लिए तो दोनों ही सम्मानित पार्षद बराबर हैं. मेरे पास किसी ने भी लिखित शिकायत नहीं दी है. अगर शिकायत मिलती है तो दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
बहरहाल, गौरव सक्सेना के खिलाफ पार्टी के सीनियर नेताओं में आक्रोश बढ़ता जा रहा. पार्टी नेताओं ने उन्हें बदतमीज समाजवादी तक कहना शुरू कर दिया है. गौरव सक्सेना की कुछ शिकायतें हाईकमान तक भी पहुंच चुकी हैं लेकिन भगवत सरन जैसे कुछ आला नेताओं का करीबी होने के कारण पार्टी हाईकमान भी कोई कार्रवाई नहीं कर रहा. हाईकमान की यह चुप्पी पार्टी में गुटबाजी को बढ़ावा दे रही है और पार्टी नेता अब गौरव सक्सेना के खिलाफ लामबंद होने लगे हैं. अगर यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब समाजवादी पार्टी के नेता बीच सड़क पर एक-दूसरे पर ही लात जूते चलाते नजर आएंगे.

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