यूपी

सिर्फ दावेदारी नहीं तैयारी भी दमदारी से कर रहे पूर्व उपसभापति अतुल कपूर, गली-मोहल्ले से लेकर संगठन के दिग्गजों तक दे रहे दस्तक

नीरज सिसौदिया, बरेली
विधानसभा की लड़ाई अब तेज हो चुकी है. इस बार उम्मीदवारों का सफर बेहद कठिन है. पहले टिकट के लिए अपनों से संग्राम होना तो उसके बाद चुनावी महासंग्राम में उतरना है. कमोवेश यही स्थिति हर दल की है. ऐसे में जीत वही हासिल कर सकता है जो अपनों से संग्राम के साथ ही महासंग्राम की तैयारी भी करता रहे. शहर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट के प्रबल दावेदार पूर्व उपसभापति अतुल कपूर यह बात बाखूबी जानते हैं. यही वजह है कि वह टिकट की तैयारी के साथ ही सियासी महासंग्राम की तैयारी में भी जोर-शोर से जुट गए हैं. यही वजह है कि वह गली-मोहल्ले से लेकर प्रदेश स्तर तक हर छोटे बड़े कार्यक्रम में अपनी मौजूदगी दर्ज कराते नजर आ रहे हैं. फिर चाहे वह भाजपा के प्रदेश संगठन मंत्री सुनील बंसल के आगमन का कार्यक्रम हो, सह संगठन मंत्री कर्मवीर सिंह के आगमन का कार्यक्रम हो, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का कार्यक्रम हो, पंजाबी महासभा का कार्यक्रम हो या गली-मोहल्ले का राशन वितरण कार्यक्रम अथवा कोरोना वैक्सीनेशन कार्यक्रम हो, अतुल कपूर ने हर जगह उतनी ही दमदारी से अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है जितनी दमदारी से वह टिकट के लिए दावेदारी कर रहे हैं. संगठन के पदाधिकारियों के समक्ष अतुल कपूर की मौजूदगी उनके टिकट की दावेदारी को मजबूत बनाने की कोशिश को दर्शाती है तो वहीं पंजाबी महासभा और कोरोना वैक्सीनेशन कैंप जैसे कार्यक्रमों में अतुल कपूर की मौजूदगी उनकी सामाजिक लोकप्रियता को बढ़ाने और भाजपा का वोट बैंक बढ़ाने के प्रयास के तौर पर देखी जा सकती है. दोनों ही मामलों में अतुल कपूर का आधार मजबूत होने के साथ ही पार्टी को भी मजबूती मिल रही है.

भाजपा के प्रदेश संगठन मंत्री सुनील बंसल के साथ पूर्व उप सभापति अतुल कपूर


बता दें कि कोई भी संगठन विधानसभा का टिकट तीन आधारों पर तय करता है. पहला आधार है जनता के बीच दावेदार की लोकप्रियता. अगर इस कसौटी पर अतुल कपूर को रखा जाए तो शहर विधानसभा सीट के अन्य दावेदारों की तुलना में कोरोना काल में घर-घर भोजन के माध्यम से और युवा होने के नाते अतुल कपूर हर घर तक पहुंच चुके हैं. उनकी फैन फॉलोइंग में सबसे ज्यादा तादाद युवाओं की ही है. शहर विधानसभा क्षेत्र के चप्पे -चप्पे पर उनके होर्डिंग्स और हर छोटे बड़े कार्यक्रमों में अतिथि के तौर पर उनकी उपस्थिति उनकी लोकप्रियता की गवाही खुद ब खुद दे रहे हैं. अत: लोकप्रियता की इस कसौटी पर अतुल कपूर पूरी तरह से फिट बैठते हैं.


टिकट का दूसरा आधार पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच दावेदार की स्वीकार्यता होता है. इस कसौटी पर भी अतुल कपूर किसी से कमतर नहीं हैं. विनम्र स्वभाव के अतुल कपूर हर कार्यकर्ता के लिए हर वक्त उपलब्ध रहते हैं.

किला मामले में जब तत्कालीन सीओ साद मियां पार्टी कार्यकर्ताओं पर हावी होते नजर आ रहे थे तो वह अतुल कपूर ही थे जो कार्यकर्ताओं के सम्मान के लिए पुलिस बल की मौजूदगी में सीओ से भी भिड़ गए थे. इतना ही नहीं कार्यकर्ताओं का कोई भी काम हो अगर वह अतुल कपूर की दहलीज तक पहुंच जाता है तो उनके दरबार से कोई खाली हाथ कभी नहीं जाता. यही वजह है कि कार्यकर्ताओं के बीच उनकी स्वीकार्यता सहज है. वहीं, विधानसभा का टिकट पाने का तीसरा और अंतिम आधार संगठन के प्रति दावेदार का समर्पण होता है. इस कार्य में अतुल कपूर कभी पीछे नहीं हटे. संगठन के हर छोटे-बड़े कार्यक्रम में अतुल कपूर की मौजूदगी खुद ब खुद इसकी गवाही दे रही है. फिर चाहे वह श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए समर्पण निधि एकत्र करने का कार्यक्रम हो, आरएसएस के  द्वारा दिये गये कार्य हों अथवा किसी मंत्री या संगठन के पदाधिकारी का कार्यक्रम हो, अतुल कपूर ने हर जगह पूरी दमदारी के साथ अपनी भागीदारी निभाई है. इतना ही नहीं संगठन के विस्तार की दिशा में भी अतुल कपूर उल्लेखनीय भूमिका निभाते रहे हैं.

कोरोना वैक्सीनेशन कैंप में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए अतुल कपूर

अब अगर पार्टी वर्तमान विधायक का टिकट काटकर इन तीन आधारों पर उम्मीदवार का चयन करती है तो अतुल कपूर को दरकिनार करना आसान नहीं होगा. बहरहाल, विधानसभा का टिकट किसे मिलेगा और किसे नहीं यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा मगर जिस पुरजोर तरीके से अतुल कपूर अपनी दावेदारी प्रस्तुत कर रहे हैं उससे उनकी टिकट की संभावनाएं भी बढ़ती नजर आ रही हैं.

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