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कैंट विधानसभा सीट : क्या ब्राह्मणों पर दांव खेलेंगी सपा और भाजपा, जानिये कौन हैं ब्राह्मणों में सबसे दमदार दावेदार?

नीरज सिसौदिया, बरेली
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल ब्राह्मण समाज को भी अहम मुद्दा बनाने में जुटे हैं. विपक्षी दल जहां भाजपा सरकार में ब्राह्मणों पर अत्याचार होने का आरोप लगा रहे हैं वहीं सत्ता पक्ष खुद को ब्राह्मण हितैषी बता रहा है. प्रदेश की 110 विधानसभा सीटों पर ब्राह्मण समाज का प्रभाव है और लगभग 52 सीटें ऐसी हैं जहां 25 प्रतिशत मतदाता ब्राह्मण समाज के ही हैं. प्रदेश की बात करें तो ब्राह्मण मतदाता लगभग 14 फीसदी हैं. ऐसे में अगर ब्राह्मण एकजुट हो जाए और किसी एक अन्य जाति या धर्म का साथ मिल जाए तो कोई भी दल बहुमत हासिल कर सकता है. कुछ ऐसी ही स्थिति 125 बरेली कैंट विधानसभा सीट पर भी है. यहां दो मुख्य दलों में दमदार ब्राह्मण चेहरे हैं. भाजपा इस मामले में पहले नंबर पर है. भाजपा में जहां मेयर डा. उमेश गौतम कैंट विधानसभा सीट से प्रबल दावेदार हैं तो वहीं समाजवादी पार्टी में मुलायम सिंह यादव की बेहद करीबी और पूर्व मंत्री साधना मिश्रा भी टिकट की दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रही हैं. दोनों ही चेहरे ऐसे हैं जो किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं.
डा. उमेश गौतम मेयर होने के नाते पूरे शहर में गहरी पैठ बना चुके हैं. हाल ही में बदायूं में आयोजित एक विशाल ब्राह्मण सम्मेलन के आयोजन में भी उनकी अहम भूमिका रही थी. इस सम्मेलन के नाते उन्होंने यह साबित कर दिया था कि ब्राह्मण समाज पूरी तरह उनके साथ है. कोरोना काल में जिस तरह से जनसेवा के कार्यों में मेयर ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई उसने डा. उमेश गौतम की लोकप्रियता में चार चांद लगा दिए. नगर निगम के माध्यम से मेयर ने शहर में बेतहाशा विकास कराया है जो अब नजर आने लगा है. उन्होंने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में भी विकास की नई इबारत लिखी जो पूर्व वर्ती मेयर नहीं लिख सके. यही वजह है कि अब विपक्षी मेयर के खिलाफ मुद्दों की तलाश में जुटे हैं क्योंकि विकास का पहिया पुराने शहर में भी पटरी पर आने लगा है. बरेली शहर में ब्राह्मणों के एकमात्र सफल नेता होने के कारण उमेश गौतम पहले से ही ब्राह्मणों के लोकप्रिय नेता हैं . क्षत्रिय भी उनके साथ है और दलित एवं पिछड़ी जातियां उनके जनसेवा के कार्यों की वजह से पहले ही उनकी मुरीद हो चुकी हैं. चूंकि वैश्य समाज भाजपा का पेट वोट है, ऐसे में अगर वर्तमान विधायक राजेश अग्रवाल का टिकट कटता है और मेयर डा. उमेश गौतम को पार्टी कैंट विधानसभा सीट से मैदान में उतारती है तो भाजपा के लिए जीत बेहद आसान होगी.

डा. उमेश गौतम

इसकी एक वजह यह भी है कि कैंट सीट पर ब्राह्मण मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं. चूंकि मुस्लिम मतदाता भाजपा को वोट नहीं देने वाला लेकिन अगर भाजपा ब्राह्मणों को एकजुट करने में सफल हो जाती है तो वैश्य और ब्राह्मण मिलकर कैंट की सीट फतह कर सकते हैं. अगर भाजपा उमेश गौतम को इस सीट से मौका देती है तो जिले की अन्य सीटों पर भी पार्टी को इसका लाभ मिलेगा. खास तौर पर बिथरी, आंवला जैसी सीटों पर क्योंकि उमेश गौतम अन्य सीटों पर भी ब्राह्मण समाज के बीच अच्छा प्रभाव रखते हैं. जिले में एक बड़े ब्राह्मण चेहरे के रूप में पार्टी मेयर उमेश गौतम का लाभ उठा सकती है.
उमेश गौतम के अलावा डा. राघवेंद्र शर्मा भी भाजपा के पास ब्राह्मण चेहरे के रूप में मौजूद हैं. हालांकि उमेश गौतम की तुलना में उनकी लोकप्रियता कम है लेकिन संघ में गहरी पैठ रखने वाले साफ सुथरी छवि के डा. राघवेंद्र शर्मा भी नए चेहरे के तौर पर बेहतर विकल्प हो सकते हैं.

संघ के पदाधिकारियों और भाजपा नेताओं के साथ डा. राघवेंद्र शर्मा.

वहीं, बात अगर समाजवादी पार्टी की करें तो यहां कैंट विधानसभा सीट से टिकट के दावेदारों में ब्राह्मणों की लिस्ट काफी लंबी है लेकिन सबसे दमदार दावेदार के रूप में एकमात्र चेहरा पूर्व मंत्री साधना मिश्रा का ही नजर आ रहा है. साधना मिश्रा एक पढ़ी-लिखी फैमिली से ताल्लुक़ रखती हैं. एक अधिकारी की बेटी और प्रोफेसर की पत्नी होने के साथ ही साधना खुद भी प्रोफेसर की नौकरी छोड़कर राजनीति में आई थीं. मुलायम सिंह की बेहद करीबी साधना मिश्रा ने अपनी जिंदगी के लगभग तीस साल पार्टी की सेवा में समर्पित कर दिए. सपा के पूर्व जिला अध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव जैसे दिग्गजों से लोहा लेने का काम अगर कोई महिला कर सकी तो वह साधना मिश्रा ही थीं. हाल ही में उन्होंने एक विशाल ब्राह्मण सम्मेलन का आयोजन भी कराया था जिसमें समस्त ब्राह्मणों को एकजुट होने का संदेश दिया था. साधना मिश्रा कैंट विधानसभा सीट से टिकट की दावेदारी भी कर चुकी हैं. पूर्व मंत्री होने के चलते अन्य ब्राह्मण दावेदारों की तुलना में साधना मिश्रा का कद काफी ऊंचा है.

साधना मिश्रा, पूर्व मंत्री

सबसे बड़ी बात यह है कि साधना मिश्रा सक्रिय नेत्री भी हैं. कोर्ट कचहरी से लेकर थाने तक वह अत्याचार के खिलाफ खुलकर आवाज उठाती रही हैं फिर चाहे सरकार किसी की भी हो. उनकी छवि भी साफ सुथरी और चरित्रवान महिला की है. अगर पार्टी उन्हें मौका देती है तो वह भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती हैं. साधना मिश्रा के अलावा कुछ और ब्राह्मण चेहरे भी सपा में टिकट की दौड़ में शामिल हैं. इनमें नूतन शर्मा, समर्थ मिश्रा, विष्णु शर्मा और नीरज तिवारी आदि शामिल हैं. नूतन शर्मा को छोड़कर कोई ऐसा बड़ा चेहरा फिलहाल इनमें नजर नहीं आता जो ब्राह्मण समाज को एकजुट करने का दम रखता हो.
बहरहाल, भाजपा अपनी ब्राह्मण विरोधी छवि को मिटाने के लिए और समाजवादी पार्टी भाजपा की ब्राह्मण विरोधी छवि को भुनाने के लिए ब्राह्मण चेहरा उतारने पर विचार कर रही है. ऐसे में प्रबल संभावना है कि बरेली कैंट विधानसभा सीट पर डा. उमेश गौतम भाजपा से और साधना मिश्रा सपा से उम्मीदवार हो सकती हैं.

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