यूपी

इनसे सीखें : हार कर भी जीत गए बरेली के ‘बाजीगर’ हैं डा. अनीस बेग, जानिये इन दिनों क्यों चर्चा में हैं डा. बेग

नीरज सिसौदिया, बरेली

किसी को हो न सका उसके कद का अंदाजा 

वो आसमां है मगर सर झुका के चलता है

कुछ ऐसी ही शख्सियत है सपा नेता और जाने-माने चिकित्सक डा. अनीस बेग की।
चुनावी जुनून के चलते जहां प्रदेशभर में समाजवादी पार्टी में बगावत के सुर बुलंद हो रहे हैं वहीं, बरेली में टिकट का एक दावेदार ऐसा भी है जो बगावती सियासतदानों के बीच एक नई मिसाल कायम कर रहा है। खुशमिजाज और हर दिल अजीज डा. अनीस बेग इन दिनों अपने इसी समर्पण के लिए चर्चा में हैं। समाजवादी चिकित्‍सा प्रकोष्‍ठ के अध्‍यक्ष डा. अनीस बेग ने वैसे तो बरेली शहर और कैंट दोनों विधानसभा सीटों से टिकट के लिए दावेदारी की थी। पैनल में उनका नाम टॉप पर भी पहुंच गया था लेकिन अप्रत्‍याशित बदलाव ने उन्‍हें टिकट से वंचित कर दिया। पार्टी ने उनके भाई सुल्‍तान बेग को मीरगंज से टिकट दे दिया और राजेश अग्रवाल को शहर विधानसभा सीट से उम्‍मीदवार बनाया। शहर विधानसभा सीट से टिकट होने के बाद जब सपा प्रत्‍याशी राजेश अग्रवाल डा. अनीस बेग से मिलने पहुंचे तो अनीस बेग ने उन्‍हें बड़े भाई का दर्जा देते हुए अपनी पूरी टीम भी उनके हवाले कर दी। अनीस बेग चाहते तो कुछ अन्य दावेदारों की तरह अंदरखाने राजेश अग्रवाल का विरोध कर पार्टी को अपनी ताकत का अहसास करा सकते थे लेकिन अपनी पूरी टीम के साथ राजेश अग्रवाल का मंच साझा करके अनीस बेग ने एक सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया है।

बता दें कि डा. अनीस बेग वर्ष 2012 में विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। तब से लेकर अब तक वह लगातार शहर विधानसभा क्षेत्र के साथ ही कैंट क्षेत्र में भी पूरी तरह सक्रिय हैं। अपने सादगीपूर्ण व्‍यवहार के चलते लोग उन्‍हें बेहद पसंद भी करते हैं। पिछले दस वर्षों में अनीस बेग ने जनता के बीच इतनी मेहनत की है कि हर वर्ग के लोगों की वह पहली पसंद बन चुके हैं। बच्‍चों के डाक्‍टर के रूप में तो वह अपनी अलग पहचान रखते ही हैं, सियासत के क्षेत्र में भी उनका नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। उनकी दस वर्षों की मेहनत का नमूना पिछले दिनों शहर में उस वक्‍त देखने को मिला था जब विधानसभा के टिकट के दावेदार अपनी-अपनी ताकत दिखाने में जुटे थे। उस वक्‍त बड़ी तादाद में हिन्‍दू और सिख समाज अनीस बेग के समर्थन में सड़कों पर उतर आया था। अनीस बेग ने पार्टी की नीतियों को घर-घर तक पहुंचाने में दिन-रात एक कर दिया था। जब उन्‍हें टिकट नहीं मिला तो उनके समर्थकों में मायूसी छा गई थी लेकिन अनीस बेग का मुस्‍कुराता हुआ चेहरा यह बताने के लिए काफी था कि उनकी मेहनत सिर्फ निजी स्‍वार्थ या टिकट पाने तक ही सीमित नहीं थी। उनका समर्पण भाव पार्टी की जीत के लिए आज भी उतना ही है जितना कि पहले था। अनीस बेग पर इस वक्‍त दोहरी जिम्‍मेदारी है। पहली अपने भाई सुल्‍तान बेग को मीरगंज विधानसभा सीट जिताने की तो दूसरी शहर के प्रत्‍याशियों को पार्टी की मजबूत स्‍थिति का एहसास कराने की। दोनों ही जिम्‍मेदारियां वह बाखूबी निभा रहे हैं। मीरगंज में भी वह चुनाव प्रचार को पूरी तत्‍परता से अंजाम दे रहे हैं तो शहर विधानसभा सीट पर पार्टी प्रत्‍याशी राजेश अग्रवाल के लिए जनसंपर्क अभियान का हिस्‍सा बनकर उन्‍हें मजबूती भी प्रदान कर रहे हैं।
इतना ही नहीं डा. अनीस बेग कहते हैं कि मेरे साथ जितना सिख, वाल्‍मीकि, ईसाई और पिछड़ों के साथ ही एलीट क्‍लास जुड़ा हुआ है वह सभी समाजवादी पार्टी के प्रत्‍याशी को जिताने के लिए काम कर रहे हैं। उनकी पूरी टीम राजेश अग्रवाल के साथ न सिर्फ कंधे से कंधा मिलाकर चलेगी बल्कि जीत की मंजिल तक भी पहुंचाएगी।
अपने इसी व्‍यक्तित्‍व की बदौलत डा. अनीस बेग हर दिल अजीज बने हुए हैं। टिकट की लड़ाई में भले ही वह हार गए हों लेकिन व्‍यक्तित्‍व की जंग उन्‍होंने जीत ली है। अनीस बेग ने अपनी ताकत का एहसास करा दिया है और उनकी ताकत अब पार्टी की ताकत बन चुकी है।

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