विचार

आँख के आँसू जैसे हों कोई अनकही दास्तान।।

आँसू तो मानो जैसे अनकहा
बयान हैं।
खुशी गम का मानो तो जमीं
आसमान हैं।।
आँसू मोती हैं लफ्ज़ हैं और
हैं दर्द भी।
बोलते मानो पीछे लिये जैसे
दास्तान हैं।।

आँसू शब्द हैं जिन्हें कागज़
कलम न मिल सका।
यह वो सैलाब जो दिल के
जख्म सिल न सका।।
दर्द और खुशी का पैमाना
जैसे छलका हुआ।
गम का कोई फूल है आँसू
जो खिल न सका।।

मुकाम मिलने न मिलने दोनों
का सबब आँसू हैं।
हर बूंद में छिपी कहानी
ऐसा गज़ब आँसू है।।
नहीं कह कर भी बहुत कुछ
कहते हैं आँसू।
खुशी और गम दोंनों में बहे
ऐसा अजब आँसू है।।

जब दिल और दिमाग दबाब
कुछ सह नहीं पाता है।
जब जिन्दगी से मिला ख्वाब
कुछ कह नहीं लाता है।।
फूट पड़ते हैं आँसू इक सैलाब
से बन कर।
जब मिलने को कोई जवाब
रह नहीं जाता है।।
*रचयिता।।एस के कपूर श्री हंस
बरेली।।

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