पंजाब

परगट ‌सिंह के पिछले कार्यकाल में हुए गलत कामों को हरी झंडी बिल्कुल नहीं मिलेगी, हारने के बावजूद सेवा में जुटे हैं आप उम्मीदवार, पढ़ें आप नेता सुरेंदर सोढी का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू…

नीरज सिसौदिया, जालंधर

पूर्व ओलिंपियन और कैंट विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार रहे सरदार सुरेंदर सिंह सोढी विधानसभा चुनाव भले ही हार गए हैं लेकिन विधानसभा क्षेत्र में वह आज भी पूरी तरह सक्रिय हैं। उनके कार्यालय पर फरियादियों की भीड़ हर वक्त देखी जा सकती है। सोढी एक साफ-सुथरी छवि वाले सियासतदान हैं। प्रदेश में आम आदमी पार्टी की लहर होने के बावजूद क्या वजह रही कि सोढी चुनाव नहीं जीत सके? पूछने पर वह कहते हैं “अगर फेयर इलेक्शन होती तो यह हार नहीं होती, हमारी जीत निश्चित थी। आज हम जब इलाके में जाते हैं तो हर तरफ लोग यही कहते हैं कि परगट सिंह जीत कैसे गया, दूसरी जगह जाओ तो भी लोग यही कहते हैं कि परगट सिंह जीत कैसे गया? यह जो ‘जीत कैसे गया’ है इसकी वजह आप निकालिए। अगर आपने हुक एंड क्रुक की नीति से इलेक्शन लड़ना है तो कुछ भी हो सकता है। परगट सिंह के खिलाफ सभी थे तो वह जीत कैसे गया? अगर पैसे देकर जीतना है, शराब देकर जीतना है तो यह इलेक्शन नहीं है। कैंट विधानसभा सीट में ऐसा माहौल पहले कभी नहीं था। पैसे बांटकर जीतने वाला जो माहौल मालवा में था, मैं हैरान हूं कि सियासत में यहां भी अब ऐसे लोग आ गए हैं जो 5 साल काम तो करते नहीं हैं लोगों के पास जाते नहीं है उनका मानना है कि 5 साल काम करने की कोई जरूरत ही नहीं है। बाद में हुक एंड क्रुक की नीति से इलेक्शन जीत लिया जाएगा। दूसरा अपना नाम यूज न करके उन्होंने चन्नी का नाम यूज किया। अगर आपने अपने विधानसभा क्षेत्र में काम किए हैं तो आप अपने नाम पर वोट मांगते। अपने नाम पर वोट न मांगना, दूसरे का नाम यूज करना, इसे चुनाव नहीं बोलते हैं। ऐसी जीत हमें चाहिए ही नहीं। मुझे 35000 से भी अधिक वोट मेरे नाम पर मिले हैं।’
फगवाड़ा में चुनाव लड़ने वाले आप प्रत्याशी जोगिंदर मान जब जनता के काम लेकर सरकारी दफ्तर गए तो उसे मुद्दा बना लिया गया। आम आदमी पार्टी के नेताओं ने ही प्रेस कांफ्रेंस करके यह बयान दे दिया कि मान सिर्फ हारे हुए उम्मीदवार हैं न कि हलका इंचार्ज। इस बारे में सरदार सोढी अलग नजरिया रखते हैं। वह कहते हैं, ‘जब मैं पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा हूं तो हलके के लोगों का काम भी मुझे ही कराना है। जो कैंडिडेट चुनाव लड़ा है लोगों के बीच गया है तो जनता की भी उससे अपेक्षाएं हैं। यह जरूरी नहीं है कि हलका इंचार्ज ही काम कराएं। हलका इंचार्ज हो या न हो, जो चुनाव लड़ा है तो जनता के काम उसे ही देखने हैं। अगर हम जनता के काम नहीं देखेंगे तो कौन करेगा। यह लोगों में भ्रम पैदा करने वाली बातें हैं कि हलका इंचार्ज नहीं है।’
शहर में इन दिनों अवैध इमारतों और अवैध कॉलोनियों का मुद्दा गर्माया हुआ है। कैंट विधानसभा क्षेत्र में भी कांग्रेस के राज में बेतहाशा अवैध कॉलोनियों काटी गईं और अवैध बिल्डिंगें बनवाई गई। परगट सिंह पर इन गलत कार्यों को संरक्षण देने के आरोप भी लगे। इनमें कुछ कॉलोनियां पुडा के अधिकारियों की मिलीभगत से काटी गईं तो कुछ निगम अधिकारियों की मिलीभगत से। अवैध कॉलोनियों का जिक्र छेड़ने पर सरदार सोढी कहते हैं, “कैंट विधानसभा सीट पर अवैध कॉलोनियां कटवाने का जिम्मेदार तो परगट ‌सिंह हैं हम नहीं। परगट सिंह जब पहले एमएलए थे तब उनकी सरकार थी तो उन्होंने अवैध कॉलोनियां भी कटवा दीं, अवैध लिंटर भी डलवा दिए, अब डलवा कर दिखाएं। परगट सिंह के पिछले कार्यकाल में विधानसभा क्षेत्र में जो भी गलत काम हुए हैं उन्हें हरी झंडी बिल्कुल नहीं दी जाएगी और कोई भी नहीं देगा। अगर आप पावर में हैं और पावर का मिसयूज करते हैं तो एकदम गलत है। मेरे नोटिस में ऐसे मामले आएंगे तो हम सरकार के संज्ञान में लाएंगे। फिर सरकार उन पर कार्रवाई करेगी।’
सुरेंदर सोढी चुनाव हार गए हैं फिर भी इलाके में पूरी तरह सक्रिय हैं। इसकी वजह बताते हुए वह कहते हैं कि मैं चाहे चुनाव हार गया हूं पर जनता के काम तो करने ही हैंं। लावारिस थोड़े ही छोड़ देंगे जनता को। कैंट विधानसभा क्षेत्र की जो भी जरूरत होगी उनके लिए सरकार से सिफारिश करेंगे। जनता के काम तो कराने ही हैं।


हाल ही में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार से दो वर्षों के लिए पंजाब को एक लाख करोड़ रुपये की मदद देने का निवेदन किया है। भाजपा सहित अन्य राजनीतिक दल इसका मजाक बना रहे हैं। उनका कहना है कि आप सरकार ने घोषणाएं तो कर दी मुफ्त देने की और अब केंद्र से पैसे मांगने आ गए। जब पैसे नहीं थे तो मुफ्त का लालच देने की क्या जरूरत थी? इस संबंध में सुरेंदर सोढी का नजरिया एकदम अलग है। वह केंद्र सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करते हुए कहते हैं कि केंद्र की बीजेपी की सरकार क्या उसकी अपनी सरकार है? क्या केंद्र सरकार हमारी सरकार नहीं है? क्या हमने वोट नहीं दिया? क्या हम टैक्स नहीं देते हैं केंद्र सरकार को? अगर यूपी, बिहार और बंगाल को वह पैकेज दे सकते हैं तो पंजाब को क्यों नहीं दे सकते? प्रधानमंत्री किसी एक पार्टी का नहीं होता वह पूरे देश का होता है और जहां जिस राज्य को जरूरत हो उस राज्य को मदद करना उनकी जिम्मेदारी है लेकिन हमारी बदकिस्मती है कि दूसरी पार्टी की सरकार केंद्र में है। जहां-जहां बीजेपी की सरकार है वहां फंड दे रहे हैं। अगर पंजाब में भाजपा की सरकार नहीं बन सकी तो क्या पंजाब को पैकेज नहीं देंगे? अगर पीएम सही सोच रखते हैं तो उन्हें पैसे देने चाहिए ताकि पंजाब सरकार जनहित के कार्य जल्द से जल्द करवा सके।
विधानसभा चुनाव अब खत्म हो चुके हैं। ऐसे में हारे हुए आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों की भूमिका को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सुरेंदर सोढी अब किस भूमिका में नजर आएंगे? पूछने पर वह बड़ी ही सहजता से कहते हैं, “असली भूमिका लोगों का काम करना है। सरकार की मर्जी है कि अगर वह कोई और बड़ी जिम्मेदारी देती है तो उसे भी निभाएंगे। हारे हुए एमएलए प्रत्याशी ने भी जनता के काम करवाने हैं अगर वह काम नहीं करेगा तो 5 साल बाद चुनाव कैसे लड़ेगा? जनता के काम हम जरूर करवाएंगे भले ही उतने न करा पाएं जितने एमएलए बनने के बाद करवा पाते लेकिन छोटे-छोटे काम तो करवाएंगे ही।”

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