यूपी

मेयर की जंग : मुस्लिमों में डॉ. अनीस बेग और हिन्दुओं में विजयपाल सिंह पर दांव खेल सकती है सपा, जानिये क्या है वजह?

नीरज सिसौदिया, बरेली
विधानसभा चुनाव में बरेली शहर की दोनों सीटें गंवाने वाली समाजवादी पार्टी नगर निगम चुनावों में कोई गलती नहीं करना चाहती है। यही वजह है कि मेयर और पार्षद प्रत्याशियों को लेकर अभी से मंथन शुरू कर दिया गया है। पार्टी इस बार किस उम्मीदवार को मैदान में उतारेगी यह तो फिलहाल तय नहीं हो पाया है लेकिन जिन दो बड़े नामों पर सबसे अधिक विचार करने की संभावनाएं जताई जा रही हैं उनमें डॉ. अनीस बेग और विजयपाल सिंह के नाम शामिल हैं।
दरअसल, इस बार मेयर पद का उम्मीदवार सी घोषणा आरक्षण पर लटकी हुई है। सरकारी सूत्र बताते हैं कि इस बार बरेली मेयर की सीट अनुसूचित जाति या पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हो सकती है। ज्यादा संभावनाएं एससी आरक्षित होने की जताई जा रही हैं। अगर यह सीट एससी वर्ग के लिए आरक्षित होती है तो समाजवादी पार्टी के पास सबसे बड़ा दलित चेहरा पूर्व विधायक विजयपाल सिंह का ही नजर आता है क्योंकि उन्हें कड़ी टक्कर देने वाले ब्रह्मस्वरूप सागर फिर से हाथी पर सवार हो चुके हैं। विजयपाल सिंह इस पद के लिए इसलिए भी बेहतर दावेदार माने जा रहे हैं क्यों वह दलित होने के साथ ही शहरी क्षेत्र में भी अपनी विशेष पहचान रखते हैं। उनके पुत्र और पुत्रवधु दोनों डॉक्टर हैं और वह एक प्रतिष्ठित अस्पताल का संचालन भी करते हैं। बरेली में अगर मुस्लिम और दलित अगर एक उम्मीदवार के पक्ष में एकजुट हो जाएं तो विरोधी खेमे के लिए जीतना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। बरेली में दोनों विधानसभा सीटों पर लगभग एक लाख वोटर दलित समाज से आते हैं। यही वजह है कि समाजवादी पार्टी मेयर के चुनाव में अबकी बार मुस्लिम -दलित कार्ड पर मजबूती से विचार कर रही है। इसकी एक वजह यह भी है कि विगत विधानसभा चुनाव में सपा ने शहर की दोनों सीटों पर सवर्ण उम्मीदवारों को जिस उम्मीद से टिकट दिया था उस पर पानी फिर गया। सवर्ण उम्मीदवार अपनी बिरादरी तक के वोट नहीं ला सके। नतीजा यह हुआ कि सपा को न तो सवर्णों के वोट मिले और न ही दलितों के। इसलिए चर्चा यह भी है कि इस बार अगर सीट सामान्य रहती है और पार्टी अगर हिन्दू को टिकट देती है तो भी विजयपाल सिंह के नाम पर दलित कार्ड खेला जाएगा क्योंकि पार्टी यह मान चुकी है कि बरेली का सवर्ण वोटर फिलहाल भाजपा से तोड़ पाना संभव नहीं है।
वहीं, दूसरी तरफ सपा के पास मुस्लिम वोटरों को सहेजना भी अबकी बार बड़ी चुनौती है। विधानसभा चुनाव में इंजीनियर अनीस अहमद खां, डॉ. अनीस बेग, मो. कलीमुद्दीन और अब्दुल कय्यूम खां मुन्ना जैसे नेताओं को दरकिनार कर सुप्रिया ऐ रन और राजेश अग्रवाल जैसे उम्मीदवारों को मैदान में उतार दिया गया। नतीजा यह हुआ कि मुस्लिम वोटों का प्रतिशत नहीं बढ़ पाया और पार्टी को दोनों सीटें गंवानी पड़ीं। बरेली जिले की जो दो सीटें सपा ने जीतीं वह मुस्लिम उम्मीदवारों की वजह से ही जीत सकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार पार्टी कोई रिस्क नहीं लेगी। अगर ऐसा होता है तो डॉ. अनीस बेग काे मेयर उम्मीदवार बनने का अवसर मिल सकता है। इसकी कई वजहें हैं। पहली वजह उनकी साफ सुथरी छवि और पार्टी के प्रति समर्पण है। दूसरी वजह यह है कि बड़े भाई सुल्तान बेग को टिकट मिलने की वजह से योग्य होने के बावजूद अनीस बेग को विधानसभा के टिकट से वंचित रहना पड़ा था। तीसरी वजह यह है कि दलितों में भी वह अच्छी पैठ रखते हैं। सियासी जानकारों का मानना है कि अनीस बेग के साथ पार्टी इस बार नाइंसाफी नहीं करेगी।
बहरहाल, कौन प्रत्याशी बनेगा और कौन नहीं यह कहना फिलहाल जल्दबाजी होगा मगर सियासी गलियारों में अटकलों का बाजार अब गर्माने लगा है।
विधानसभा चुनाव की तरह डॉ. आईएस तोमर के इस बार मेयर का चुनाव लड़ने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं।

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