यूपी

सपा का सदस्‍यता अभियान, प्रदेश में बरेली नंबर-1, महबूब अली और सुल्‍तानी बने यूपी के ‘सुल्‍तान’, जानिये कैसे?

नीरज सिसौदिया, बरेली
विधानसभा चुनावों में भले ही समाजवादी पार्टी प्रदेश की सत्‍ता पर काबिज होने में नाकाम रही हो मगर वर्ष 2017 के मुकाबले लगभग तीन गुना सीटें जीतने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्‍साह चरम पर है। ज्‍यादातर सीटों पर हार-जीत का अंतर पांच सौ से भी कम का रहा है। यही वजह है कि आगामी नगर निगम चुनावों से पहले पार्टी की ओर से जोर-शोर से सदस्‍यता अभियान चलाया जा रहा है। विगत एक जुलाई से चलाया जा रहा यह अभियान प्रदेशभर में सफलता के नए आयाम हासिल कर रहा है। इसके तहत अब तक लगभग पांच लाख से भी अधिक नए प्राथमिक सदस्‍य जोड़े जा चुके हैं। सबसे ज्‍यादा उत्‍साह बरेली जिले में देखने को मिल रहा है। यही वजह है कि पिछले लगभग डेढ़ माह के दौरान प्रदेशभर में बरेली जिला नए सक्रिय सदस्‍य जोड़ने के मामले में पहले पायदान पर है। बता दें कि बरेली में सदस्‍यता अभियान का प्रभारी पूर्व कैबिनेट मंत्री और मौजूदा विधायक महबूब आलम को बनाया गया है। उनकी तत्‍परता का ही परिणाम है कि आज बरेली प्रदेश में पहले पायदान पर जगह बनाने में कामयाब हो सका है। वहीं, प्रदेश के 17 नगर निगमों (महानगर) में बरेली नगर निगम (महानगर) पहले नंबर पर है। यहां सबसे अधिक सदस्‍य जोड़ने का रिकॉर्ड निवर्तमान महानगर अध्‍यक्ष शमीम खां सुल्‍तानी के नाम दर्ज हो गया है।
लखनऊ स्‍थित पार्टी मुख्‍यालय के एक वरिष्‍ठ नेता ने बताया कि नए सदस्‍यों को जोड़ने के लिए तीन स्‍तर पर पार्टी की ओर से सदस्‍यता पर्ची की बुक दी गई हैं। इनमें संगठन स्‍तर पर अलग और विधायक एवं पूर्व विधायकों को विधानसभा के स्‍तर पर सदस्‍यता बुक दी गई हैं। उन्‍होंने बताया कि बरेली जिले को सर्वाधिक 42 सौ किताबें दी गई हैं जिनमें विधायकों और पूर्व विधायकों को दी गई किताबें भी शामिल हैं। इतनी अधिक संख्‍या में किसी भी जिले में मेंबरशिप बुक की मांग नहीं आई है। अन्‍य जिलों में यह आंकड़ा 35 सौ से ऊपर नहीं पहुंच सका है। उन्‍होंने बताया कि प्रदेश में कुल 17 नगर निगम हैं जिनमें निवर्तमान महानगर अध्‍यक्षों को मेंबरशिप बुक दी गई है। इनमें सबसे अधिक किताबों की मांग बरेली महानगर के निवर्तमान अध्‍यक्ष शमीम खां सुल्‍तानी की ओर से की गई थी। उन्‍हें कुल छह सौ किताबें दी गई थीं। प्रत्‍येक किताब में पचास सदस्‍यता पर्चियां हैं यानि एक किताब के जरिये 50 प्राथमिक सदस्‍य बनाए जा सकते हैं। बरेली महानगर के निवर्तमान अध्‍यक्ष को छोड़ दें प्रदेश के किसी भी महानगर अध्‍यक्ष ने इतनी संख्‍या में मेंबरशिप बुक नहीं ली हैं। अन्‍य महानगरों में यह आंकड़ा चार सौ से ऊपर नहीं पहुंच पाया है। ऐसा पार्टी के सूत्र बताते हैं। दिलचस्‍प बात यह है कि बरेली महानगर ने जहां छह सौ किताबें ली हैं वहीं, पूरे पीलीभीत जिला संगठन ने महज सात सौ किताबें ही ली हैं। बरेली महानगर संगठन की ओर से अब तक तीन सौ किताबें मुख्‍यालय में अपने स्‍तर से जमा करवाई जा चुकी हैं जिनमें विधायक और पूर्व विधायक की एक भी बुक शामिल नहीं है। इसके अलावा दो सौ किताबें पूरी हो चुकी हैं जबकि सौ किताबें प्रोसेस में बताई जा रही हैं। वहीं, बताया जाता है कि इलाहाबाद, मुरादाबाद, कानपुर सहित विभिन्‍न महानगरों में महानगर संगठन के स्‍तर पर किताबों का आंकड़ा तीन से चार सौ के बीच है।

 

सदस्यता अभियान चलाते निवर्तमान महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी।

1993 में चलाया गया था सपा का पहला सदस्‍यता अभियान, तब भी सुल्‍तानी को मिला था प्रशस्‍ति पत्र

बता दें कि बरेली के निवर्तमान महानगर अध्‍यक्ष शमीम खां सुल्‍तानी नए सदस्‍यों को जोड़ने में शुरू से ही सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। उन्‍होंने वर्ष 1987 में लोकदल ब से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। वह युवा लोकदल के महानगर मंत्री थे। इसके बाद 4 अक्‍टूबर सन् 1992 को समाजवादी पार्टी का गठन हुआ। वर्ष 1993 में पहली बार पार्टी ने चुनाव लड़ा। उसी दौरान पार्टी की ओर से पहला सदस्‍यता अभियान चलाया गया था। शमीम खां सुल्‍तानी उस दौर में पार्टी के संस्‍थापक सदस्‍यों में से एक थे। जब पार्टी की ओर से पहला सदस्‍यता अभियान चलाया गया तो शमीम खां सुल्‍तानी ने उसमें बढ़-चढ़ कर भाग लिया। उस दौरान पार्टी के पहले महानगर अध्‍यक्ष प्रोफेसर जाहिद खां की ओर से शमीम खां सुल्‍तानी को जून 1993 में नए सदस्‍य जोड़ने के लिए एक प्रशस्‍ति पत्र देकर सम्‍मानित किया गया था। वहीं, तत्‍कालीन विधायक प्रवीण सिंह ऐरन ने 28 अगस्‍त 1993 को उन्‍हें एक प्रमाणपत्र भी प्रदान किया था।

कैसे बनते हैं सक्रिय सदस्‍य

पार्टी के संविधान के अनुसार, सक्रिय सदस्‍य वही सदस्‍य बन सकता है जो 50 प्राथमिक सदस्‍यों को संगठन से जोड़ता है। पार्टी की ओर से प्रत्‍येक बूथ पर एक सक्रिय सदस्‍य बनाया जाता है। इसी सदस्‍य पर चुनावों में पार्टी को अपना बूथ जिताने की जिम्‍मेदारी होती है। प्रत्‍येक सक्रिय सदस्‍य पांच वर्ष के लिए बनाया जाता है। संविधान के अनुसार, प्रत्‍येक राज्‍य स्‍तरीय पार्टी को हर पांच वर्ष में प्रांतीय एवं राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का आयोजन करना अनिवार्य होता है। इन्‍हीं सम्‍मेलनों में प्रदेश एवं राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष का चयन किया जाता है। इस सम्‍मेलन में महानगर की ओर से सक्रिय सदस्‍यों को भेजा जाता है जिन्‍हें डेलीगेट भी कहा जाता है। प्रांतीय सम्‍मेलन में 15 फीसदी और राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन में दस फीसदी सक्रिय सदस्‍य भेजे जाते हैं।

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