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प्रमोद पारवाला की कविताएं : ‘बदलते परिवेश’
Share nowभोर के उजाले में, पंछियों का कलरव है, आज पता चला है।। निर्मल लहरों के संग , नदियाँ भी गाती हैं, आज पता चला है। उजला-उजला सा गगन, लगे नील वितान है, आज पता चला है। श्रंग से पर्वत लगे, ज्यूं चूमने व्योम हैं, आज पता चला है। वृक्षों से श्वासों का , नाता […]
जैसी करनी वैसी भरनी यही विधि का विधान है
Share nowआज आदमी अनगिनत चेहरे लगाये हज़ार है। ना जाने कैसा चलन आ गया व्यवहार है।। मूल्य अवमूल्यन शब्द कोरे किताबी हो गये। अंदर कुछ अलग कुछ आज आदमी बाहर है।। जैसी करनी वैसी भरनी यही विधि का विधान है। गलत कर्मों की गठरी लिये घूम रहा इंसान है।। पाप पुण्य का अंतर ही मिटा […]
यूं ही जिंदगी से शिकायत मत करो…
Share nowयूं ही जिन्दगी से शिकायत मत करो। मुस्कराने में भी यूं किफायत मत करो।। जिन्दगी बेमिसाल तोफहा ऊपरवाले का। उसकी दी हुई बर्बाद यह नियामत मत करो।। जी कर तो देखो चैन और सकूँ अंदर बसा है। खुशियों को बाहर से आयात मत करो।। रहो न मायूस होकर हमेशा जिंदगी के सफर में। शुरू […]




