Share nowकितनी पीड़ा अब देखो, तीमारदार सहते हैं दुत्कारा जाता जिनको, आँसू पीकर रहते हैं । बेबस मरीज की आहें, बेरहम नहीं हैं सुनते दौलत का खेल चल रहा, ताने-बाने वे बुनते बीमार भले मर जाए, वे अपना मतलब चुनते उनके कारण कितने ही, देखे अपना सिर धुनते घर में मर जाना अच्छा, कुछ लोग […]
Share nowगीत -उपमेंद्र सक्सेना एड. करते हैं अभिव्यक्ति उसी की, भाव उठे जो मन में प्यारा जननी जन्म-भूमि जैसी ही, हिंदी है आँखों का तारा। बदलें आज मानसिकता को, हिंदी को अब हम अपनाएँ अपनी भाषा में है जो रस, और कहीं हम उसे न पाएँ जो अब सबके दिल को छू ले, उसमें अपनापन […]
Share nowसौगंध उठाते हैं, हारेगा कोरोना. तू हार मानकर ही, मानेगा कोरोना. हर बीमारी भागी, इस मानव के आगे. हर रोग वायरस सब, हरदम ही हैं भागे. पापों की गठरी ले, भागेगा कोरोना. सौगंध… चलता था सब सुखमय, मानव का पृथ्वी पर. हर बुरी बात लाया, दानव सा धरती पर. करनी का फल निश्चित, पायेगा […]