विवादित चेहरों से दूरी बनाना चाहती है भाजपा, इसलिए हो रही बरेली महानगर अध्यक्ष की घोषणा में देरी, पैनल में पहुंचे दो नाम रह चुके हैं विवादित, एक अधीर तो दूसरा यतिन भाटिया, पढ़ें किन-किन विवादों में उछला था नाम?
नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली भाजपा महानगर अध्यक्ष की घोषणा में देरी यूं ही नहीं हो रही है। इसकी बड़ी वजह पैनल में पहुंचे दो विवादित चेहरे हैं। इनमें पहला चेहरा मौजूदा महानगर अध्यक्ष अधीर सक्सेना का है तो दूसरा पूर्व महामंत्री यतिन भाटिया का। इनमें एक मेयर उमेश गौतम का करीबी है तो दूसरा ब्रज क्षेत्र के अध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य का। दोनों की पैरवी मजबूत है लेकिन विवाद उनका पीछा छोड़ने का नाम नहीं ले रहे।
सबसे पहले बात अधीर सक्सेना से जुड़े विवादों की करते हैं। अधीर सक्सेना उस वक्त महामंत्री हुआ करते थे। उनकी सिद्धि विनायक गैस एजेंसी के सिलेंडरों में ढाई से चार किलो तक कम गैस मिली थी। बाट माप विभाग ने एजेंसी पर जुर्माना भी लगाया था। लेकिन राजनीतिक रसूख के चलते बाद में मामला रफा दफा कर दिया गया। इसके बाद लोकसभा चुनाव में एक केंद्रीय नेता की रैली के लिए टेंट के भुगतान को लेकर भी अधीर सक्सेना विवादों में रहे हैं। टेंट मालिक गोपेश अग्रवाल ने भुगतान न होने पर मुख्यमंत्री तक को पत्र लिख डाला था। इस मुद्दे को इंडिया टाइम 24 ने प्रमुखता से उठाया था। जिसके बाद गोपेश अग्रवाल को दबाव में लेकर मामला दबा दिया गया। इसके अलावा अधीर सक्सेना पर एक नेता का पिछलग्गू बनने के भी आरोप जगजाहिर हैं। इतना ही नहीं उन पर पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा करने और उन्हें दरकिनार कर पार्टी से बगावत करके पार्षद का चुनाव लड़ने वाले अजय चौहान को अपनी कार्यकारिणी में अहम जिम्मेदारी देने के भी गंभीर आरोप लग रहे हैं। इसके अलावा अधीर सक्सेना के कार्यकाल में महानगर की दोनों विधानसभा सीटों पर लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन में भी गिरावट दर्ज की गई है। चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि अधीर सक्सेना के कार्यकाल में पार्टी को ऐसे दर्जनों बूथों पर हार का सामना करना पड़ा है जहां पार्टी हमेशा से जीत हासिल करती आ रही थी।
अब बात करते हैं यतिन भाटिया की। यतिन भाटिया क्षेत्रीय अध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य के करीबी हैं। वह छात्र जीवन से ही उनके साथ जुड़े हुए हैं। यतिन भाटिया को वर्ष 2018 में तत्कालीन महानगर अध्यक्ष उमेश कठेरिया के साथ ही पद से हटाया गया था। यतिन भाटिया तब महामंत्री थे और महेंद्र नाथ पांडेय उस वक्त प्रदेश भाजपा अध्यक्ष थे। विवादों के चलते इन दोनों को पार्टी ने किनारे कर दिया था। इतना ही नहीं यतिन भाटिया पर प्रॉपर्टी डीलर आशुतोष शर्मा ने रंगदारी मांगने का मुकदमा भी दर्ज कराया था। हालांकि आशुतोष शर्मा ने इस मामले में तत्कालीन महानगर अध्यक्ष उमेश कठेरिया और तत्कालीन कोषाध्यक्ष संदीप अग्रवाल को भी आरोपी बनाया था।
दिलचस्प बात यह है कि पैनल में जो नाम गए हैं उनमें ये दोनों नाम भी प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन दोनों की ही पैरवी मजबूत है।
अब पार्टी के समक्ष चुनौती यह है कि वह इस बार किसी भी ऐसे चेहरे को पार्टी की कमान नहीं सौंपना चाहती जो किसी भी रूप में विवादित रहे हों। पार्टी नहीं चाहती थी महानगर की कमान किसी ऐसे विवादित या भ्रष्टाचार में कथित तौर पर आरोपित पाए गए चेहरे को दी जाए जो वर्ष 2027 के चुनाव में विपक्ष के लिए मददगार साबित हों।
बहरहाल, एक-दो दिन में पार्टी को अंतिम निर्णय लेना है। अब देखना यह है कि पार्टी विवादित चेहरों पर भरोसा जताती है या फिर किसी नए साफ-सुथरी छवि वाले चेहरे पर दांव आजमाती है।
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