

Related Articles
बाहरी राज्यों में गए थे रोटी की खातिर, अब अपने घर जाना भी हुआ मुश्किल, सरकार के नियमों से परेशान हैं हिमाचल के बाशिंदे, जानिए क्यों?
नीरज सिसौदिया, जालंधर कहते हैं पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी कभी पहाड़ के काम नहीं आते. दरकते पहाड़ों के बीच सिसकती जिंदगी को रोटी की मजबूरी ने हिमाचल के जिन बाशिंदों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर किया था आज वो अपने ही प्रदेश के लिए बेगाने हो गए हैं. उनकी परेशानियों को […]
कब तक दिल्ली के भरोसे बैठे रहेंगे हिमाचली फूल
शारदा आनंद गौतम, पालमपुर हिमाचली बाग-बगीचों में इन दिनों बहार है। रंग-बिरंगे फूल आकर्षण का केंद्र बनें हुए है। हिमाचली किसान-बागवान के चेहरे भी इन फूलों को देखकर आनंदित है। करीबन डेढ़ दशक से हिमाचल में फूलों की खेती की तरफ युवाओं का रूझान बढ़ा है और उन्होंने आगे आते हुए न केवल अपने खेतों […]
संवरने लगे हैं पहाड़ों के रास्ते, सपनों को राह दिखा रही विद्या भारती
मनाली से लौटकर नीरज सिसौदिया की रिपोर्ट हिमाचल प्रदेश के धरती पहाड़ी की नुहार बदलने लगी है। केंद्र सरकार के प्रयासों से पहाड़ों के पथरीली रास्ते अब संवरने लगे हैं| न सिर्फ सड़कें चौड़ी हो रही है बल्कि पहाड़ों का सीना चीर कर बनाई जा रही सुरंगों के कारण फासले भी कम होने लगे हैं| […]




