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शासनादेश का खुला उल्लंघन कर अधिशासी अभियंता बनकर बैठे हैं राजीव राठी, पार्षद सतीश चंद्र सक्सेना “मम्मा” की शिकायत पर फंसे राजीव, तत्काल अधिशासी अभियंता निर्माण के पद से हटाने की मांग, नगर आयुक्त से प्रमुख सचिव तक भेजी शिकायत, जानिये क्या है पूरा विवाद, देखें पूरा शासनादेश

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नीरज सिसौदिया, बरेली

नगर निगम बरेली में पर्यावरण अभियंता के कार्यों और जिम्मेदारियों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। पार्षद एवं कार्यकारिणी समिति सदस्य सतीश चंद्र सक्सेना “कातिब उर्फ मम्मा” ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर अधिशासी अभियंता (निर्माण) के पद पर कार्यरत राजीव राठी की नियुक्ति को असंवैधानिक बताते हुए तत्काल हटाने की मांग की है। मम्मा ने स्पष्ट कहा है कि श्री राठी शासनादेश के विपरीत कार्य कर रहे हैं और उनके द्वारा जारी पत्रावलियों की जांच कराई जानी चाहिए।

शासनादेश की कॉपी

शासनादेश संख्या 465/नौ-4-11-90 एल.सी. 107 के तहत नगर निगमों में पर्यावरण अभियंता के कार्यों और दायित्वों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। इसमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सीवर और नालों की सफाई, सीटी सेनीटेशन प्लान, पब्लिक टॉयलेट्स, नदी घाटों की सफाई, प्रदूषण नियंत्रण, प्लास्टिक व निर्माण मलबे का निस्तारण, स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी पहल, साथ ही जनता की भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन कार्यक्रम तैयार करने जैसी जिम्मेदारियां शामिल हैं।

साथ ही साफ लिखा है कि पर्यावरण अभियंता से सिविल कार्य नहीं लिया जाएगा, ताकि वे अपने पर्यावरण संबंधी कर्तव्यों को पूरी जिम्मेदारी से निभा सकें।

मम्मा ने प्रमुख सचिव, विशेष सचिव और नगर आयुक्त को भेजी गई शिकायत में कहा है कि राजीव राठी, जिन्हें पर्यावरण अभियंता की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वे निर्माण विभाग में अधिशासी अभियंता के पदनाम का अवैध रूप से उपयोग कर रहे हैं। यदि उन्हें प्रभारी अधिशासी अभियंता निर्माण बनाया गया है, तो यह निर्णय नियमविरुद्ध और असंवैधानिक है।

पार्षद मम्मा ने शासन को भेजे अपने पत्र में आरोप लगाया है कि राठी न केवल गलत तरीके से पदनाम का उपयोग कर रहे हैं, बल्कि उन्होंने दिनांक 05 जुलाई 2025 को पत्रांक 884/अधि.अभि./निर्माण विभाग जारी कर अपनी स्थिति को अधिशासी अभियंता के रूप में प्रस्तुत किया, जो शासनादेश का सीधा उल्लंघन है।

मम्मा की मांग

पार्षद सतीश चंद्र सक्सेना मम्मा ने नगर आयुक्त से मांग की है कि:

राजीव राठी को तत्काल अधिशासी अभियंता (निर्माण) के पद से हटाया जाए।

उनके कार्यकाल में जारी की गई निर्माण संबंधी सभी पत्रावलियों और आदेशों की जांच कराई जाए।

नगर निगम में पर्यावरण अभियंता के पद पर योग्य और नियमसम्मत अधिकारी की नियमित तैनाती की जाए।

प्रमुख सचिव आलोक रंजन और विशेष सचिव विपिन कुमार द्विवेदी द्वारा जारी आदेश में नगर निगमों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि पर्यावरण अभियंता से सिविल कार्य न लिया जाए लेकिन राजीव राठी से लिया जा रहा है।

नगर निगम की मुश्किलें बढ़ीं

इस पूरे विवाद ने नगर निगम बरेली की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सीवेज ट्रीटमेंट, नदी घाटों की सफाई और प्रदूषण नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। शासन की ओर से साफ संकेत है कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया को जल्द दुरुस्त नहीं किया गया तो निगम के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सकती है।

अब सवाल यह है कि नगर आयुक्त इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या राजीव राठी को हटाकर निगम में नियमसम्मत पर्यावरण अभियंता की नियुक्ति की जाती है या नहीं।

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