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विधानसभा में गूंजे बरेली के मुद्दे, कैंट विधायक संजीव अग्रवाल ने सदन में रखी कई मांगें, जानिये कौन-कौन से मुद्दे उठाए विधानसभा में?

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नीरज सिसौदिया, बरेली

कैण्ट विधायक संजीव अग्रवाल ने विधान सभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर प्रस्तुत धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि यह अभिभाषण विकसित उत्तर प्रदेश 2047 की दिशा में सरकार के दूरदर्शी विज़न को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नये भारत के संकल्पों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सशक्त आधार मिल रहा है।

श्री अग्रवाल ने कहा कि नाथ नगरी के रूप में विख्यात बरेली को नाथ कॉरिडोर की सौगात मिली है और धार्मिक पहचान को भव्य स्वरूप मिला है। उन्होंने बरेली को मेडिकल, एजुकेशन और ट्रेडिंग हब बताते हुए यहां एम्स की स्थापना की मांग की ताकि बरेली मंडल, आसपास के मंडलों और कुमायूं क्षेत्र के लोगों को उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। साथ ही जरी, बांस-बेत, फर्नीचर और प्लाई उद्योग से जुड़े कारीगरों व उद्यमियों को प्रोत्साहन एवं संरक्षण देने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने ऐतिहासिक बरेली कॉलेज को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की मांग दोहराई तथा सुभाष नगर अंडरपास के शीघ्र शुभारंभ की बात बताते हुए मणिनाथ क्षेत्र में भी अंडरपास निर्माण की आवश्यकता बताई। बरेली एयरपोर्ट से सीमित उड़ानों को बढ़ाते हुए जयपुर-अहमदाबाद, लखनऊ-कोलकाता, लखनऊ-वाराणसी, बैंगलोर तथा चेन्नई-तिरुपति के लिए उड़ानें प्रारंभ करने की मांग की। चारधाम यात्रा हेतु बरेली सिविल एयरपोर्ट से हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने की आवश्यकता भी उन्होंने रखी। बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार को देखते हुए बरेली में मेट्रो रेल सेवा शुरू करने तथा बदायूं रोड पर नए बस अड्डे के निर्माण की मांग करते हुए उन्होंने राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन किया।

लोकतंत्र सेनानियों के लिए कराया ध्यानाकर्षण

कैण्ट विधायक संजीव अग्रवाल ने विधानसभा में नियम 301 के तहत लोकतंत्र सेनानियों की सम्मान राशि एवं सुविधाओं में वृद्धि की मांग उठाई जिसे अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया। श्री अग्रवाल ने कहा कि आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा हेतु संघर्ष करने वाले सेनानी सम्मान के हकदार हैं। वर्तमान में अधिकांश सेनानी वृद्धावस्था व स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं इसलिए उनकी सम्मान राशि बढ़ाई जानी चाहिए। साथ ही आश्रितों को स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के समान चिकित्सा व सामाजिक सुरक्षा सुविधाएँ प्रदान करने की मांग भी की।

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