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फरीदपुर विधानसभा सीट – ‘चांद’ और ‘सूरज’ से रोशन होगी सियासत, साइकिल को ‘चंद्र’ से तो धोबी समाज को ‘भास्कर’ से हैं बड़ी उम्मीदें, जानिये क्या है वजह?

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नीरज सिसौदिया, बरेली
फरीदपुर विधानसभा सीट पर वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल अभी से तेज होने लगी है। भाजपा के लगातार मजबूत होते जनाधार और उसके विजय रथ को रोकने के लिए विपक्ष की नजर दो ऐसे चेहरों पर टिकी है, जिन्हें प्रतीकात्मक तौर पर ‘चांद’ और ‘सूरज’ कहा जा रहा है। एक ओर समाजवादी पार्टी के कद्दावर और अनुभवी नेता चंद्रसेन सागर हैं, जिनसे सपा कार्यकर्ताओं को नई उम्मीद बंधी है, तो दूसरी ओर धोबी समाज के बीच ‘सूरज’ बनकर उभरे युवा नेता और सर्व जन आम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयप्रकाश भास्कर हैं, जिनसे समाज अपने राजनीतिक सूखे के खत्म होने की आस लगाए बैठा है।
फरीदपुर विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास लंबे समय तक सागर परिवार के इर्द-गिर्द घूमता रहा है। स्वर्गीय सियाराम सागर ने इस सीट से पांच बार विधायक बनकर न केवल अपनी मजबूत पकड़ बनाई, बल्कि फरीदपुर को प्रदेश की राजनीति में एक अलग पहचान भी दिलाई। सियाराम सागर के बाद उम्मीद थी कि उनके परिवार से ही कोई चेहरा सपा की विरासत को आगे बढ़ाएगा, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। उनके छोटे पुत्र विशाल सागर सियासत में वह मुकाम हासिल नहीं कर पाए, जिसकी उनसे अपेक्षा की जा रही थी। इसके चलते सपा का पारंपरिक वोट बैंक धीरे-धीरे बिखरता गया और भाजपा को यहां मजबूत होने का अवसर मिला। हालांकि, उनके बड़े पुत्र डीके सागर का प्रभाव अच्छा माना जाता है लेकिन सरकारी नौकरी के कारण वह स्वयं मैदान में नहीं उतर सके। इस बार उनकी पत्नी कल्पना सागर इस सीट से चुनाव लड़ना चाहती हैं।
हालांकि सियाराम सागर की राजनीतिक विरासत पूरी तरह खत्म नहीं हुई। उनके सबसे भरोसेमंद सिपाही और ‘हनुमान’ कहे जाने वाले चंद्रसेन सागर आज भी फरीदपुर की राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं। चंद्रसेन सागर का राजनीतिक सफर बेहद दिलचस्प और संघर्षों से भरा रहा है। सियाराम सागर को शुरुआती दौर में विधानसभा तक पहुंचाने में चंद्रसेन की भूमिका अहम मानी जाती है। संगठन और जमीन दोनों पर पकड़ रखने वाले चंद्रसेन को क्षेत्र का ऐसा नेता माना जाता है, जो कार्यकर्ताओं के सुख-दुख में हमेशा खड़ा दिखाई देता है।
2027 के चुनाव को लेकर चंद्रसेन सागर पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहे हैं। फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र के हर बूथ पर बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) नियुक्त करना कोई आसान काम नहीं होता, लेकिन चंद्रसेन सागर ने यह काम अपने दम पर कर दिखाया है। पार्टी के भीतर उन्हें ऐसा इकलौता नेता माना जा रहा है, जिसने अपने प्रभाव और मेहनत के बल पर यह जिम्मेदारी निभाई है। यही वजह है कि इस बार समाजवादी पार्टी के भीतर उन्हें टिकट का प्रबल दावेदार माना जा रहा है।
सपा कार्यकर्ताओं का मानना है कि चंद्रसेन सागर न केवल राजनीतिक रूप से परिपक्व हैं, बल्कि भाजपा के मजबूत संगठन और संसाधनों का मुकाबला करने की क्षमता भी रखते हैं। उनका नाम आते ही पुराने सपा समर्थकों में एक बार फिर उत्साह दिखाई देने लगा है। पार्टी के कई वरिष्ठ कार्यकर्ता खुलकर कहने लगे हैं कि अगर 2027 में फरीदपुर सीट पर भाजपा को चुनौती दी जा सकती है, तो वह चेहरा चंद्रसेन सागर ही हो सकते हैं। यही कारण है कि ‘साइकिल’ की रफ्तार को ‘चंद्र’ से जोड़कर देखा जा रहा है।
दूसरी ओर, फरीदपुर की राजनीति का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू धोबी समाज से जुड़ा हुआ है। एक समय इस विधानसभा सीट से धोबी समाज के नेता नंदराम विधायक हुआ करते थे। नंदराम ने न केवल भाजपा से बल्कि समाजवादी पार्टी के टिकट पर भी विधानसभा तक का सफर तय किया। वे अपने समाज की मजबूत आवाज थे और फरीदपुर की राजनीति में उनकी अलग पहचान थी। लेकिन उनके बाद धोबी समाज का कोई भी नेता उस स्तर तक नहीं पहुंच सका। धीरे-धीरे समाज राजनीतिक हाशिये पर चला गया और उसकी आवाज कमजोर पड़ती गई।
इसी पृष्ठभूमि में जयप्रकाश भास्कर का उदय हुआ। जयप्रकाश भास्कर ने खुद को केवल एक नेता के रूप में नहीं, बल्कि अपने समाज की आवाज के रूप में स्थापित किया। उन्होंने सर्व जन आम पार्टी का गठन कर एक नई राजनीतिक शुरुआत की। शुरुआत में इसे एक सीमित दायरे की कोशिश माना गया, लेकिन समय के साथ जयप्रकाश भास्कर की सक्रियता और मुद्दों ने उन्हें चर्चा के केंद्र में ला दिया। आज उनकी पहचान सिर्फ फरीदपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में उनके नाम की चर्चा होने लगी है।
जयप्रकाश भास्कर की खास बात यह है कि उनकी पार्टी से केवल धोबी समाज के लोग ही नहीं, बल्कि पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यक समाज के लोग भी जुड़ने लगे हैं। उन्होंने सामाजिक न्याय, प्रतिनिधित्व और सम्मान जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर राजनीति की है। यही वजह है कि धोबी समाज उन्हें अपने लिए ‘सूरज’ के रूप में देख रहा है, जो लंबे समय से छाए अंधेरे को दूर कर सकता है। समाज को उम्मीद है कि नंदराम की राजनीतिक विरासत को जयप्रकाश भास्कर किसी न किसी मुकाम तक जरूर पहुंचाएंगे।
फरीदपुर सीट पर 2027 का चुनाव इसलिए भी दिलचस्प होने जा रहा है क्योंकि यहां मुकाबला सिर्फ दलों का नहीं, बल्कि प्रतीकों और उम्मीदों का भी है। एक ओर सपा के लिए ‘चांद’ यानी चंद्रसेन सागर हैं, जिनसे पार्टी को खोई हुई जमीन वापस पाने की उम्मीद है। दूसरी ओर धोबी समाज के लिए ‘सूरज’ यानी जयप्रकाश भास्कर हैं, जिनसे समाज को फिर से राजनीतिक पहचान मिलने की आस है। दोनों ही चेहरों की अपनी-अपनी ताकत और सीमाएं हैं, लेकिन इतना तय है कि इनकी मौजूदगी ने फरीदपुर की राजनीति में नई ऊर्जा भर दी है।
भाजपा के लिए भी यह स्थिति आसान नहीं होगी। अब तक जिस सीट पर विपक्ष बिखरा हुआ नजर आता था, वहां दो मजबूत विकल्प उभरते दिख रहे हैं। सवाल यही है कि क्या ‘चांद’ और ‘सूरज’ की यह रोशनी भाजपा के विजय रथ को रोक पाएगी या फिर फरीदपुर में एक बार फिर भगवा परचम लहराएगा। भाजपा इस बार यहां से स्वर्गीय विधायक श्याम बिहारी लाल के बेटे को उम्मीदवार बना सकती है। वहीं, भाजपा अनुसूचित जाति-जनजाति मोर्चा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रामबाबू वर्मा भी यहां से टिकट के प्रबल दावेदार बताए जा रहे हैं जो पूर्व बसपा विधायक और सपा के पूर्व प्रत्याशी विजयपाल सिंह के भतीजे हैं। बहरहाल, 2027 का चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आएगा, फरीदपुर की सियासत और भी दिलचस्प मोड़ लेने वाली है।

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