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नगर निगम में भ्रष्टाचार का एक और खेल उजागर, रिश्वत का आनंद उठा रहा राजस्व निरीक्षक सच्चिदानंद, महिला बोली- मेरे नाजुक अंगों को हाथ लगाया, धक्के देकर बाहर निकाला, इंसाफ मांगने गई पीड़िता और पूर्व उपसभापति अतुल कपूर तो करने लगा अभद्रता, पढ़ें सच्चिदानंद का काले कारनामे की पूरी कहानी

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नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली नगर निगम एक बार फिर गंभीर आरोपों के कारण सुर्खियों में है। इस बार आरोपों के केंद्र में हैं जोन-4 में तैनात राजस्व निरीक्षक सच्चिदानंद, जिन पर एक महिला ने हाउस टैक्स के मामले में रिश्वत लेने, फिर अतिरिक्त रकम मांगने, धमकी देने, अभद्रता करने और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला तब और गर्मा गया जब इंसाफ की गुहार लेकर पहुंची महिला के साथ भाजपा नेता एवं नगर निगम के पूर्व उपसभापति अतुल कपूर भी अधिकारी के कार्यालय पहुंचे और वहां हुई कथित अभद्रता का वीडियो सामने आ गया।
यह पूरा घटनाक्रम केवल एक महिला की शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर निगम की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के दावों पर भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन अधिकारियों पर लगातार शिकायतें आती रही हों, उनके खिलाफ कार्रवाई आखिर क्यों नहीं होती?


शाहदाना कॉलोनी निवासी सीमा रानी का आरोप है कि उनके मकान का हाउस टैक्स गलत तरीके से बढ़ा हुआ दिखाया जा रहा था और करीब 61 हजार रुपये का बकाया दर्शाया गया था। जब उन्होंने समाधान के लिए नगर निगम का दरवाजा खटखटाया तो राजस्व निरीक्षक सच्चिदानंद ने कथित रूप से मामला निपटाने के लिए 20 हजार रुपये की मांग की।
महिला का आरोप है कि करीब डेढ़ वर्ष पहले उन्होंने यह रकम दे भी दी, लेकिन न तो कोई रसीद मिली और न ही उनका मामला सुलझाया गया। इसके बाद जब भी वह जानकारी लेने पहुंचीं, उन्हें टाल दिया गया।
आरोप तो यहां तक हैं कि बाद में अलग-अलग नंबरों से फोन कर फिर 20 हजार रुपये की मांग की गई और कहा गया कि पहले दिए गए 20 हजार रुपये तो “रिश्वत” के थे, अब काम करवाना है तो अलग से पैसे देने होंगे। महिला का दावा है कि पैसे न देने पर कुर्की की धमकी तक दी गई।


मामला तब तूल पकड़ गया जब पीड़ित महिला ने अपनी शिकायत पूर्व उपसभापति एवं भाजपा नेता अतुल कपूर को बताई। आरोप है कि अतुल कपूर महिला को साथ लेकर सीधे जोन-4 कार्यालय पहुंचे और राजस्व निरीक्षक से जवाब मांगा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बातचीत के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया और कथित तौर पर अधिकारी ने महिला और अतुल कपूर दोनों के साथ अभद्र व्यवहार किया। इस दौरान हुई बातचीत का वीडियो भी सामने आया है, जिसके बाद पूरे मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है।
अतुल कपूर का कहना है कि वह पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए अंत तक उसके साथ खड़े रहेंगे और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होने तक संघर्ष जारी रहेगा।

पहले भी लग चुके हैं कई आरोप

नगर निगम के गलियारों में यह चर्चा नई नहीं है। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के कई पार्षद पहले भी सच्चिदानंद की कार्यशैली को लेकर सवाल उठा चुके हैं। सूत्रों के अनुसार विभिन्न पार्षदों द्वारा कई बार नगर निगम अधिकारियों को शिकायतें भी दी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।
यही वजह है कि इस नए विवाद के बाद नगर निगम प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। लोग पूछ रहे हैं कि यदि शिकायतें पहले से थीं तो जांच क्यों नहीं हुई और यदि जांच हुई तो उसका परिणाम क्या निकला?

महिला ने लगाए और भी गंभीर आरोप

अपनी तहरीर में सीमा रानी ने आरोप लगाया है कि 17 जून को जब वह अपने पुत्र के साथ कार्यालय पहुंचीं तो उनके साथ गाली-गलौज की गई और जान से मारने तक की धमकी दी गई। महिला का आरोप है कि 16 जून 2026 को भी वह नगर निगम कार्यालय गई थीं। उस दौरान अधिकारी ने कथित तौर पर उनसे कहा कि वह पॉश कॉलोनी में रह रही हैं, फिर भी रिश्वत देने को तैयार नहीं हैं। महिला का आरोप है कि अधिकारी ने वहां मौजूद लोगों से उन्हें धक्का देकर बाहर निकालने तक की बात कही।
सबसे गंभीर आरोप लगाते हुए महिला ने कहा है कि कार्यालय से बाहर निकालते समय अधिकारी ने उनके शरीर के नाजुक अंगों को जानबूझकर छुआ। महिला का कहना है कि उस समय वह पार्षद प्रतिनिधि अतुल कपूर को साथ लेकर कार्यालय गई थीं।
पीड़िता ने पुलिस से मांग की है कि आरोपी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार, धमकी, अभद्रता और अन्य आरोपों के संबंध में रिपोर्ट दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही उसकी आय से अधिक संपत्ति की भी जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।

करोड़ों की संपत्ति का सवाल भी उठा

पीड़िता ने अपनी शिकायत में राजस्व निरीक्षक की कथित संपत्तियों की जांच की मांग भी की है। उनका कहना है कि अधिकारी की आय और जीवनशैली की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। हालांकि फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
यही कारण है कि अब लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर एक राजस्व निरीक्षक के खिलाफ बार-बार आरोप क्यों लग रहे हैं और यदि आरोप निराधार हैं तो उन्हें लेकर स्पष्ट जांच क्यों नहीं कराई जाती?

अब पुलिस और नगर निगम की परीक्षा

पीड़िता ने थाना बारादरी में तहरीर देकर एफआईआर दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब निगाहें पुलिस और नगर निगम प्रशासन पर हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल एक अधिकारी का मामला नहीं होगा, बल्कि नगर निगम की उस व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करेगा जिसमें आम नागरिक अपने वैध काम के लिए महीनों तक भटकते हैं।
फिलहाल सच्चिदानंद पर लगे आरोप जांच के दायरे में हैं, लेकिन इतना तय है कि इस मामले ने नगर निगम की कार्यशैली, जवाबदेही और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जनता अब यह जानना चाहती है कि शिकायतों का अंजाम क्या होगा—जांच या फिर एक और फाइल, जो किसी अलमारी में धूल खाती रह जाएगी।

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