नीरज सिसौदिया, बरेली
वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी फरीदपुर विधानसभा सीट पर संगठन को मजबूत करने में जुटी है, लेकिन जमीनी स्तर पर मिल रहे फीडबैक ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। यादव वोटरों के बीच पहले से चली आ रही नाराजगी के बाद अब मुस्लिम समाज के एक बड़े वर्ग ने भी पूर्व विधानसभा प्रत्याशी विजयपाल सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। स्थिति यह है कि पार्टी की ओर से फरीदपुर विधानसभा का सह प्रभार संभाल रहे मुलायम सिंह यूथ बिग्रेड के राष्ट्रीय महासचिव अरविंद यादव के सामने ही कई मुस्लिम नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विजयपाल सिंह के खिलाफ जमकर नाराजगी जाहिर की।

गांव-गांव जाकर बूथों का सत्यापन कर रहे अरविंद यादव हाल ही में विधानसभा क्षेत्र के सेक्टर नंबर दो में पहुंचे थे। यहां उन्हें जो फीडबैक मिला, उसने स्थानीय राजनीति की दिशा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे तीखी प्रतिक्रिया खतौली ग्राम पंचायत के वार्ड नंबर 90 से बीडीसी सदस्य सरवर खान की ओर से सामने आई।

सरवर खान ने अरविंद यादव के सामने साफ शब्दों में कहा कि यदि समाजवादी पार्टी एक बार फिर विजयपाल सिंह को उम्मीदवार बनाती है तो वह और उनके समर्थक भाजपा का साथ देंगे। उन्होंने दावा किया कि उनके परिवार का क्षेत्र के करीब चार हजार मुस्लिम वोटों पर प्रभाव है और इलाके का बड़ा मुस्लिम वर्ग विजयपाल सिंह से नाराज है। उनका कहना था कि मुस्लिम नेताओं और कार्यकर्ताओं की लगातार उपेक्षा की गई, जिसके कारण समाज में असंतोष बढ़ा है।

बीडीसी सदस्य सरवर खान ने कहा कि अगर विजयपाल सिंह को टिकट दिया गया तो उनका पूरा समूह भाजपा के पक्ष में मतदान करेगा। बाद में इंडिया टाइम 24 से बातचीत में भी उन्होंने अपने इस रुख की पुष्टि की और कहा कि मैं अपनी बात पर कायम हूं, मैंने अरविंद यादव के समक्ष अपनी पूरी बात रख दी है और यह स्पष्ट कर दिया है कि अगर आगामी विधानसभा सीट से पार्टी विजयपाल सिंह को टिकट देती है तो यहां के चार हजार से अधिक मुस्लिम वोट भाजपा के हिस्से में जाएंगे और विजयपाल सिंह का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा।

“विजयपाल के लिए बूथ अध्यक्ष नहीं बनूंगा”
अरविंद यादव के दौरे के दौरान मोहम्मद तस्लीम ने भी खुलकर नाराजगी जाहिर की। जब उन्हें बूथ अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने का प्रस्ताव दिया गया तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था कि वह विजयपाल सिंह के लिए चुनावी जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे। हालांकि जब उन्हें बताया गया कि अभी पार्टी ने किसी उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है और जरूरी नहीं कि विजयपाल सिंह को ही टिकट मिले, तब उन्होंने संगठनात्मक जानकारी देने पर सहमति जताई और उनका फॉर्म भी भरा गया। इसके बावजूद उन्होंने बूथ अध्यक्ष बनने के लिए हामी नहीं भरी।

मोहम्मद तस्लीम का कहना था कि विजयपाल सिंह आम कार्यकर्ताओं और जनता के काम नहीं करते, इसलिए क्षेत्र में उनके प्रति असंतोष बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि विजयपाल सिंह को टिकट दिया गया तो वह खुलकर विरोध करेंगे।

मुस्लिम और यादव वोटरों की बढ़ती नाराजगी से बढ़ी चिंता
सूत्रों के अनुसार सेक्टर दो के अंतर्गत लगभग 73 बूथ आते हैं और इन बूथों पर विजयपाल सिंह के प्रति नाराजगी का दायरा काफी व्यापक दिखाई दिया। स्थानीय नेताओं का कहना है कि विरोध करने वालों में बड़ी संख्या मुस्लिम और यादव समाज के लोगों की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि फरीदपुर विधानसभा में यही दो वर्ग समाजवादी पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक की रीढ़ माने जाते हैं। ऐसे में यदि इन वर्गों की नाराजगी बढ़ती है तो इसका असर भविष्य की चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है।
बूथ सत्यापन में निकली बलराम सिंह के फर्जीवाड़े की हवा
अरविंद यादव के दौरे का दूसरा बड़ा पहलू संगठन की जमीनी हकीकत का सामने आना रहा। सूत्रों के मुताबिक, सत्यापन के दौरान पता चला कि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के कार्यकाल में बनाए गए कई बूथ अध्यक्ष केवल कागजों तक सीमित थे।

जोन नंबर दो के 12 सेक्टरों के लगभग 73 बूथों के सत्यापन में दो दर्जन से अधिक ऐसे बूथ मिले जहां या तो बूथ अध्यक्ष मौजूद ही नहीं थे, या जिनके नाम दर्ज थे उनके मोबाइल नंबर गलत निकले। कई मामलों में मोबाइल नंबर किसी और व्यक्ति का था और नाम किसी अन्य का दर्ज था। कुछ बूथों पर ऐसे लोग अध्यक्ष बनाए गए थे जिन्हें यह तक जानकारी नहीं थी कि वे संगठन में किसी पद पर हैं।
इस खुलासे ने संगठन की बूथ स्तर की तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में फरीदपुर विधानसभा में चल रहा बूथ सत्यापन अभियान अब सिर्फ संगठन विस्तार का कार्यक्रम नहीं रह गया है, बल्कि यह स्थानीय नेतृत्व की स्वीकार्यता और संगठन की वास्तविक स्थिति का आईना भी बनता जा रहा है। समाजवादी पार्टी के लिए सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि क्या वह कार्यकर्ताओं और पारंपरिक वोट बैंक की नाराजगी को समय रहते दूर कर पाएगी या यह असंतोष चुनावी चुनौती में बदल जाएगा।




