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बरेली कैंट विधानसभा सीट : शूटिंग चैंपियनशिप के बहाने चुनावी निशाना लगा गए कांग्रेसी दिग्गज नवाब मुजाहिद हसन खां, दिल्ली में हाईकमान के कई नेताओं मिले, गठबंधन हुआ तो कांग्रेस के खाते में जा सकती है कैंट सीट, जानिये कैसे गुपचुप बड़ी तैयारी कर रहे हैं बरेली के नवाब?

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नीरज सिसौदिया, बरेली
उत्तर प्रदेश स्टेट रायफल एसोसिएशन की ओर से 21 से 30 जून तक दिल्ली के डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में आयोजित शूटिंग चैंपियनशिप के बहाने दिल्ली आए बरेली के दिग्गज कांग्रेसी नेता और बरेली कैंट विधानसभा सीट से पूर्व प्रत्याशी नवाब मुजाहिद हसन खां चुनावी निशाना भी साध गए। सूत्र बताते हैं कि उन्होंने विगत 30 जून को दिल्ली में हाईकमान के कुछ नेताओं से मुलाकात की और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बरेली कैंट विधानसभा सीट से चुनावी बिसात बिछा दी है।
बता दें कि यूपीएसआरए की ओर से आयोजित इस चैंपियनशिप में नवाब मुजाहिद हसन खां ने डबल ट्रैप शूटिंग में गोल्ड मेडल हासिल किया। इसके लिए उन्हें विगत 30 जून को आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में पुरस्कृत किया जाना था। सूत्र बताते हैं कि नवाब साहब 30 जून को अपनी कार से बरेली से दिल्ली आए। वह दोपहर करीब डेढ़ बजे समारोह में पहुंचे। यहां अपना गोल्ड मेडल लेने के बाद वह पार्टी हाईकमान से मिलने पहुंचे। सूत्र बताते हैं कि उन्होंने पार्टी के कुछ आला नेताओं से मुलाकात की और उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर बरेली कैंट विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा से उन्हें अवगत कराया। ये मुलाकातें बेहद गोपनीय बताई जा रही हैं। सूत्र यह भी बताते हैं कि पार्टी नेताओं का यह मानना है कि वर्ष 2017 में जिन सीटों पर पार्टी उम्मीदव ने गठबंधन उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था, उन सीटों पर वर्ष 2027 में भी वह दावा करेगी। खासतौर पर उन सीटों पर जहां उसे 10 से 15 हजार वोटों से ही शिकस्त मिली थी। साथ ही उन विधानसभा सीटों पर भी पार्टी दावा करेगी जहां से पार्टी के मौजूदा सांसद हैं। पार्टी द्वारा जीते गए प्रत्येक संसदीय क्षेत्र की ज्यादातर विधानसभा सीटों पर पार्टी दावा करेगी।
सूत्र यह भी बताते हैं कि कांग्रेस इस बार उत्तर प्रदेश में एक प्रदेश अध्यक्ष की जगह पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए अलग-अलग अध्यक्ष नियुक्त करने जा रही है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए किसी ओबीसी हिन्दी जाति के नेता को कमान सौंपी जा सकती है जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए किसी मुस्लिम नेता को अध्यक्ष बनाया जा सकता है। दोनों ही अध्यक्ष मौजूदा सांसद हो सकते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोटों को साधने और एआईएमआईएमप्रमुख ओवैसी के माध्यम से मुस्लिम वोटों के संभावित बिखराव को रोकने के लिए तेज तर्रार नेता और सांसद इमरान मसूद को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। अगर ऐसा हुआ तो नवाब मुजाहिद हसन खां की राह और भी आसान हो जाएगी।
ऐसे में उन समाजवादी नेताओं के सपनों पर ग्रहण लग सकता है जो कैंट विधानसभा सीट पर पुरजोर तरीके से जोर-आजमाइश करने में लगे हैं। नवाब मुजाहिद हसन खां निश्चित तौर पर बरेली कैंट विधानसभा सीट पर विपक्ष का सबसे बड़ा चेहरा हैं। ऐसे में उनकी दावेदारी को उम्मीदवारी में बदलना तनिक भी मुश्किल नहीं होगा। बहरहाल, नवाब मुजाहिद हसन खां के इस दिल्ली दौरे ने उनके समर्थकों का उत्साह दोगुना कर दिया है। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस जिला अध्यक्ष अशफाक सकलैनी भी चाहते हैं कि सपा के साथ गठबंधन की स्थिति में बरेली कैंट, बरेली शहर और आंवला विधानसभा सीट कांग्रेस के हिस्से में आए। इसके लिए उन्होंने अपनी तैयारी भी तेज कर दी है।
हालांकि कांग्रेस हाईकमान और नवाब मुजाहिद हसन खां की मुलाकात को लेकर आधिकारिक रूप से कोई बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस दौरे की चर्चा लगातार बनी हुई है। समर्थकों का मानना है कि दिल्ली में हुई बैठकों के बाद बरेली कैंट विधानसभा को लेकर नई राजनीतिक तस्वीर उभर सकती है। वर्ष 2017 के चुनाव में नवाब मुजाहिद हसन खां के साथ सक्रिय रहे कई पुराने कार्यकर्ता भी एक बार फिर क्षेत्र में सक्रिय होने लगे हैं। उनका मानना है कि यदि गठबंधन की स्थिति बनती है तो कांग्रेस इस सीट पर पहले से कहीं अधिक मजबूती के साथ चुनाव मैदान में उतर सकती है।
फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर अंतिम मुहर कांग्रेस संगठन में होने वाले बदलाव और समाजवादी पार्टी के साथ संभावित गठबंधन की तस्वीर साफ होने के बाद ही लगेगी। लेकिन इतना तय है कि शूटिंग रेंज में गोल्ड मेडल जीतने के साथ-साथ नवाब मुजाहिद हसन खां ने दिल्ली में राजनीतिक स्तर पर भी ऐसा निशाना साधा है, जिसकी गूंज अब बरेली की चुनावी राजनीति में साफ सुनाई देने लगी है।

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