नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली कैंट विधानसभा सीट पर 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी के भीतर संभावित उम्मीदवारों की सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। इसी क्रम में समाजवादी अल्पसंख्यक सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष और कैंट विधानसभा सीट से पार्टी के टिकट के प्रबल दावेदार इंजीनियर अनीस अहमद खां ने दलित समाज के प्रबुद्ध लोगों के बीच संवाद की एक नई राजनीतिक पहल शुरू की है। गुरुवार को बीसलपुर चौराहे स्थित एक शादी हॉल में ‘पीडीए परिवार में दलित संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसे सामान्य राजनीतिक सभा या शक्ति प्रदर्शन के तौर पर आयोजित करने के बजाय दलित समाज के अलग-अलग वर्गों के प्रबुद्ध और सामाजिक रूप से सक्रिय लोगों के साथ संवाद और विचार-विमर्श के मंच के रूप में पेश किया गया। आयोजन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि आगामी चुनाव को लेकर केवल भीड़ जुटाने के बजाय समाज के विभिन्न वर्गों के प्रभावशाली और जागरूक लोगों के साथ बैठकर राजनीतिक परिस्थितियों, सामाजिक मुद्दों और पीडीए की संभावनाओं पर चर्चा की जाए।
इंजीनियर अनीस अहमद खां की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी पहुंचे। महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी, जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव, रणवीर सिंह, सुरेंद्र सोनकर, जितेंद्र मुंडे समेत पार्टी के कई नेताओं की मौजूदगी ने कार्यक्रम को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बना दिया। कार्यक्रम में दलित समाज के बड़ी संख्या में सम्मानित लोगों ने भाग लिया और इंजीनियर अनीस अहमद के समर्थन में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
‘पीडीए परिवार में दलित संवाद’ में खटीक, जाटव, धोबी, वाल्मीकि और धानुक समाज के प्रतिनिधियों और प्रबुद्ध लोगों ने हिस्सा लिया। आयोजकों का मानना है कि कैंट विधानसभा क्षेत्र में दलित मतदाताओं की संख्या चुनावी दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक क्षेत्र में करीब 25 हजार जाटव, लगभग 30 हजार वाल्मीकि, 7-8 हजार धोबी, 3-4 हजार खटीक और 2-3 हजार धानुक मतदाता हैं। इस तरह अलग-अलग दलित जातियों को मिलाकर लगभग 70 से 75 हजार मतदाता होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

राजनीतिक रूप से यह आंकड़ा कैंट विधानसभा सीट के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोजकों के मुताबिक जाटव समाज का एक हिस्सा समाजवादी पार्टी के साथ जुड़ता रहा है, जबकि अन्य कई दलित जातियों का झुकाव लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी की ओर रहा है। ऐसे में इन वर्गों के बीच संवाद स्थापित करना समाजवादी पार्टी के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती के साथ-साथ अवसर भी है।
इंजीनियर अनीस अहमद खां की इस पहल को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। कार्यक्रम के माध्यम से उन्होंने दलित समाज के उन लोगों तक पहुंच बनाने की कोशिश की, जो अपने-अपने समुदायों में सामाजिक प्रभाव रखते हैं और राजनीतिक मुद्दों पर लोगों की राय बनाने में भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण बात आयोजकों द्वारा बताई गई इसकी रणनीति रही। अनीस अहमद खां की ओर से स्पष्ट किया गया कि ‘पीडीए परिवार में दलित संवाद’** का उद्देश्य केवल बड़ी भीड़ जुटाकर राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन करना नहीं है। इसके बजाय दलित समाज के शिक्षित, जागरूक, सामाजिक रूप से सक्रिय और प्रभावशाली लोगों के साथ बैठकर पार्टी की विचारधारा और नीतियों पर चर्चा करना इसका मुख्य उद्देश्य है।

इस संवाद के दौरान समाजवादी पार्टी की नीतियों, पीडीए की अवधारणा और वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर चर्चा की गई। साथ ही पार्टी की ओर से सरकार की जिन नीतियों और कामकाज को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं, उन्हें भी समाज के बीच ले जाने की रणनीति पर विचार किया गया।
अनीस अहमद खां की इस पहल को कैंट विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के पीडीए आधार को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। खासकर ऐसे समय में जब 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपने-अपने सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने में जुटे हैं, तब दलित समाज के भीतर सीधा संवाद राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है।

‘पीडीए परिवार में दलित संवाद’ को एक अकेला कार्यक्रम नहीं बल्कि कार्यक्रमों की प्रस्तावित श्रृंखला की शुरुआत बताया गया है। आने वाले दिनों में दलित समाज की अलग-अलग जातियों के साथ इसी तरह संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है। इसके बाद पिछड़े वर्ग की प्रमुख जातियों के प्रबुद्ध लोगों को भी संवाद की इस प्रक्रिया से जोड़ने की तैयारी है।
आयोजकों के मुताबिक कुर्मी, यादव, कश्यप सहित अन्य पिछड़ी जातियों के सामाजिक और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों के साथ भी संवाद किया जाएगा। इसके बाद अल्पसंख्यक समाज के प्रबुद्ध एवं राजनीतिक रूप से सक्रिय लोगों के साथ सम्मेलन और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है।
इस तरह पूरी कवायद को पीडीए यानी **पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक** सामाजिक समूहों के बीच संवाद का नेटवर्क तैयार करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। इसका मकसद अलग-अलग समुदायों के बीच केवल चुनावी समय में संपर्क स्थापित करना नहीं, बल्कि चुनाव से काफी पहले राजनीतिक मुद्दों और स्थानीय समस्याओं को लेकर बातचीत का माहौल तैयार करना है।

कैंट सीट पर अनीस अहमद की सक्रियता बढ़ी
इंजीनियर अनीस अहमद खां को बरेली कैंट विधानसभा सीट से 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी के टिकट का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। पिछले कुछ समय से उनकी राजनीतिक गतिविधियां भी कैंट विधानसभा क्षेत्र में लगातार दिखाई दे रही हैं। अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच संपर्क और संवाद के कार्यक्रमों के जरिए वह अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
‘पीडीए परिवार में दलित संवाद’ उसी रणनीति की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। खासतौर पर दलित समाज के उन वर्गों तक पहुंच बनाने की कोशिश है, जिनका चुनावी व्यवहार हमेशा एकतरफा नहीं रहा है और जिनके बीच किसी भी राजनीतिक दल के लिए अपना आधार बढ़ाने की पर्याप्त गुंजाइश रहती है।

कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के स्थानीय संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों और नेताओं की मौजूदगी से भी अनीस अहमद की गतिविधियों को राजनीतिक महत्व मिला है। महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी और जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव समेत पार्टी नेताओं की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि कार्यक्रम केवल व्यक्तिगत स्तर पर आयोजित सामाजिक संवाद तक सीमित नहीं था, बल्कि इसे पार्टी की व्यापक राजनीतिक रणनीति के साथ जोड़कर भी देखा जा रहा है।
पीडीए के जरिए कैंट में नया सामाजिक समीकरण बनाने की कोशिश
बरेली कैंट विधानसभा सीट पर चुनावी राजनीति लंबे समय से विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ऐसे में दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक समाज के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश किसी भी राजनीतिक दल के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

इंजीनियर अनीस अहमद की पहल का अगला चरण पिछड़ी जातियों और अल्पसंख्यक समाज के प्रबुद्ध लोगों तक पहुंच बनाने का है। यदि यह संवाद अभियान लगातार चलता है तो आने वाले समय में यह कैंट विधानसभा सीट की स्थानीय राजनीति में एक अलग तरह की राजनीतिक गतिविधि के रूप में सामने आ सकता है।
हालांकि इन संवाद कार्यक्रमों का वास्तविक चुनावी असर 2027 के चुनाव के दौरान ही स्पष्ट होगा, लेकिन इतना जरूर है कि टिकट के दावेदारों के बीच बढ़ती सक्रियता ने कैंट विधानसभा सीट की राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। अनीस अहमद खां का फोकस फिलहाल भीड़ की बजाय समाज के प्रभावशाली और जागरूक लोगों के साथ संपर्क मजबूत करने पर दिखाई दे रहा है।

‘पीडीए परिवार में दलित संवाद’ के जरिए शुरू हुई यह पहल आगे किस रूप में आकार लेती है और क्या यह दलित, पिछड़े तथा अल्पसंख्यक समाज के बीच समाजवादी पार्टी के लिए नए राजनीतिक समीकरण तैयार कर पाती है, यह आने वाले महीनों में देखने वाली बात होगी। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि कैंट विधानसभा क्षेत्र में 2027 के चुनाव की तैयारियां अब केवल राजनीतिक दलों के स्तर पर ही नहीं, बल्कि संभावित दावेदारों की व्यक्तिगत सक्रियता के स्तर पर भी तेज हो चुकी हैं।




