बरेली कैंट विधानसभा सीट पर 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी में टिकट के दावेदारों की सक्रियता तेज है। सपा के पूर्व प्रत्याशी, पार्षद और बरेली विकास प्राधिकरण के सदस्य राजेश अग्रवाल भी अपनी दावेदारी को लेकर लगातार सक्रिय हैं। करीब तीन दशक से राजनीति में सक्रिय राजेश अग्रवाल छवि आंदोलन और जनसमस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष करने वाले नेता की है। वह चुनाव हो या सामान्य समय, लगातार जनता के बीच रहते हैं और अलग-अलग विभागों में लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों से संपर्क करते हैं। 2027 के चुनाव, संभावित समय से पहले चुनाव, पीडीए, जातीय समीकरण, भाजपा के वोट, एसआईआर, जनसंपर्क, आंदोलनों, सोशल मीडिया और अन्य दावेदारों के बीच अपनी स्थिति को लेकर ‘इंडिया टाइम 24 डॉट कॉम’ के संपादक नीरज सिसौदिया ने राजेश अग्रवाल से विस्तार से बातचीत की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश-

सवाल: विधानसभा चुनाव के लिए आप खुद को कितना तैयार मानते हैं?
राजेश अग्रवाल: इतने साल मेहनत करने और दिन-रात काम करने के बाद भी अगर मैं यह कहूं कि मैं पूरी तरह तैयार हूं तो शायद यह कहना ठीक नहीं होगा। सार्वजनिक जीवन में तैयारी हमेशा चलती रहती है। जनता मुझे जानती है और लगातार यह उम्मीद भी कर रही है कि मुझे चुनाव लड़ना चाहिए। लोगों से मिलना, उनके बीच कार्यक्रम करना और लगातार काम करते रहना मेरी तैयारी का हिस्सा है। मैं कह सकता हूं कि मेरी चुनावी तैयारी बहुत अच्छी चल रही है। चुनाव फरवरी में हों या सितंबर में मेरी तैयारी पूरी है।

सवाल: प्रदेश में चर्चा है कि भारतीय जनता पार्टी नवंबर या दिसंबर से पहले विधानसभा चुनाव करा सकती है। आप इसे किस नजरिए से देखते हैं?
राजेश अग्रवाल : छोटा चुनाव हो या बड़ा, हम पिछले 30 साल से हर दिन चुनावी मोड में ही रहते हैं। अगर चुनाव नवंबर या दिसंबर में भी होते हैं तो न मुझे नुकसान होगा और न समाजवादी पार्टी को। समाजवादी पार्टी ने 2024 में पीडीए के जरिए अपनी जड़ें मजबूत की हैं और स्थानीय स्तर पर भी हम अपनी जड़ों को मजबूत कर रहे हैं। इसलिए चुनाव पहले हों या बाद में, हमें कोई दिक्कत नहीं है।
भाजपा से नाराज लोग मुझे वोट दे सकते हैं क्योंकि मैं उनके बीच रहता हूं और उनके काम करता हूं। सिर्फ भाजपा ही नहीं, बसपा, कांग्रेस या दूसरी पार्टियों से जुड़े जो लोग भाजपा से नाराज हैं, उन्हें एक विकल्प चाहिए। क्योंकि मैं उनके संपर्क में हूं और उनके काम आता हूं, इसलिए उनका वोट भी मुझे मिल सकता है।
मैं करीब 30 साल से पार्षद हूं। इस दौरान मेरे साथ करीब 300 लोग पार्षद बन चुके हैं। मेरा इतना बड़ा नेटवर्क है। मैं व्यापार मंडल से भी जुड़ा हूं और तमाम सामाजिक संस्थाओं से भी जुड़ा हूं। मेरा वार्ड और मेरा घर दोनों इसी कैंट विधानसभा क्षेत्र में हैं।

सवाल: आपकी पार्टी के ही कुछ लोगों का कहना है कि राजेश अग्रवाल मुद्दे तो उठाते हैं, लेकिन उन्हें अंजाम तक नहीं पहुंचा पाते। ऐसे कौन से मुद्दे हैं जिन्हें आपने उठाया और अंजाम तक पहुंचाया?
राजेश अग्रवाल: यह बात सही नहीं है। मैंने हाउस टैक्स का मुद्दा अंजाम तक पहुंचाया। दुकानों के बढ़े हुए किराए का मुद्दा उठाया और उसे भी अंजाम तक पहुंचाया। इज्जतनगर में दुकानों को तोड़े जाने के खिलाफ आवाज उठाई और उसमें भी सफलता मिली। नगर निगम के बाहर दुकानें तोड़े जाने का मुद्दा भी उठाया और उसे अंजाम तक पहुंचाया। शास्त्री नगर मार्केट में दुकानों के लेटर गिर गए थे और उनकी अनुमति नहीं मिल रही थी। दुकानदारों को दुकानें खाली करने का आदेश दिया जा रहा था। मैंने उनके लिए आवाज उठाई और उन्हें परमिशन दिलाई। एक जगह सड़क के किनारे दीवार खड़ी करने की कोशिश हो रही थी। मैंने उसका विरोध किया और दीवार नहीं बनने दी, क्योंकि उससे आम जनता को परेशानी होती। कोरोना काल में भी मैंने दो साल लोगों की सेवा की। ऐसे कई मुद्दे हैं जिन्हें मैंने पिछले तीन दशक में मजबूती से उठाया और अंजाम तक पहुंचाया।
मेरा एक बड़ा मुद्दा अभी भी पेंडिंग है और वह है चौपुला अंडरपास। यह कोई छोटा-मोटा मुद्दा नहीं बल्कि बहुत बड़ा मुद्दा है।
इसके अलावा मैंने सफाई कर्मचारियों के लिए भी आंदोलन किया। उस समय उन्हें छह हजार रुपये मिलते थे। हमारे आंदोलन के बाद उनका मानदेय नौ हजार रुपये हुआ। अब इसे 13 हजार रुपये कराने के लिए भी आंदोलन कर रहे हैं।

सवाल: मौजूदा समय में आप कौन-कौन से मुद्दों को लेकर जनता के बीच हैं?
राजेश अग्रवाल: समाजवादी पार्टी की जो अपनी ताकत है, मैं उसका हिस्सा हूं। इसके अलावा मेरी 30 साल की निस्वार्थ सेवा मेरी सबसे बड़ी ताकत है। मैंने किसी का एक कप पानी तक नहीं पिया, एक रुपये का चंदा नहीं लिया और न ही एक पैसे का कमीशन लिया। मैं सुबह से रात तक लोगों के सुख-दुख में जाता हूं, उनकी मदद करता हूं और सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होता हूं। नगर निगम के चुनाव में भाजपा से जुड़े बड़े लोगों के सामने भी मुझे जनता का समर्थन मिला है। चाहे किसी वित्त मंत्री के रिश्तेदार के सामने चुनाव हो या मौजूदा विधायक का अपना बूथ, मैंने उन्हें हराया है। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस वार्ड में आ चुके हैं। इससे आप मेरी क्षेत्र में मजबूती का अंदाजा लगा सकते हैं।

सवाल: कुछ लोगों का कहना है कि अगर मौजूदा कैंट विधायक संजीव अग्रवाल को भाजपा फिर उम्मीदवार बनाती है तो आपको अग्रवाल समाज का वोट नहीं मिलेगा और इसका नुकसान सपा को होगा। क्या कहेंगे?
राजेश अग्रवाल: ये सब टिकट पाने के लिए कही जाने वाली बातें हैं। मैं शहरी राजनीति की एक बात साफ कर दूं। कैंट विधानसभा सीट से नवाब मुजाहिद हसन खान चुनाव लड़ें या सुप्रिया ऐरन या कोई और, विपक्षी उम्मीदवारों के सामने सबसे बड़ी समस्या भाजपा का वोट नहीं ला पाना रही है। बरेली महानगर की दोनों विधानसभा सीटों पर मैं उन नेताओं में हूं जो भाजपा का वोट अपनी तरफ ला सकते हैं और लाते हैं। इसलिए यह कहना कि मुझे बनिया वोट नहीं मिलेगा, वाल्मीकि वोट नहीं मिलेगा या कायस्थ वोट नहीं मिलेगा, बिल्कुल गलत है। मुझे हर बिरादरी के लोगों का वोट मिलेगा, क्योंकि मैं दिन-रात लोगों के काम करता हूं। शहर में वोट सिर्फ जाति के आधार पर नहीं पड़ता। कायस्थ सिर्फ कायस्थ उम्मीदवार को वोट नहीं देगा, वह भाजपा को भी वोट देगा। लोधी, राजपूत या किसी अन्य जाति का व्यक्ति भी केवल अपनी जाति के उम्मीदवार को वोट नहीं देता। हां, इन जातियों के वे लोग आपको वोट देंगे जिनके आपने काम किए हैं और जिनके आप सुख-दुख में काम आए हैं। आप यह बताइए कि कोई भी उम्मीदवार किसी भी जाति का हो, अगर वह लोगों के बीच बैठता ही नहीं, उनके बीच जाता ही नहीं और उनके काम आता ही नहीं तो किसी भी पार्टी से टिकट मिलने के बाद उसे वोट क्यों मिलेगा?
समाजवादी पार्टी का समर्थक भाजपा को वोट क्यों देगा? वह तभी देगा जब आपने व्यक्तिगत रूप से उसका कोई काम किया हो। मैं समाजवादी पार्टी के लोगों के भी काम करता हूं और बाकी लोगों के भी। दूसरे लोग चुनावी दिखावे के लिए जनता के काम करते हैं, जबकि मेरे लिए यह रोज का काम है। मैं 30 साल से यही करता आ रहा हूं।

सवाल: कुछ लोगों का कहना है कि एसआईआर के दौरान आपने वोट बनवाने के लिए कोई काम नहीं किया। इस पर क्या कहेंगे?
राजेश अग्रवाल: यह बिल्कुल बकवास है। अगर मैंने काम नहीं किया तो वोट कैसे बने? वोट बनवाने के लिए बीएलओ के साथ लगना पड़ा, फॉर्म भरने पड़े और 2003 की डिटेल देनी पड़ी। हम आज भी यह काम कर रहे हैं। मैंने रामपुर बाग, गांधी उद्यान, नौमहला मस्जिद, सुभाष नगर और दूसरे क्षेत्रों में वोट बनवाने का काम किया है। अगर मैंने वोट नहीं बनवाए होते तो लोगों के वोट कैसे बनते?

सवाल: आपकी छवि बरेली के आंदोलनकारी और जनता के काम करने वाले नेता की है। प्रचार के मोर्चे पर खुद को कहां पाते हैं?
राजेश अग्रवाल: पहले मैं प्रचार नहीं करता था, लेकिन अब मैं भी खूब प्रचार करता हूं क्योंकि प्रचार आज की जरूरत है। अगर आप अच्छी चीजों का प्रचार नहीं करेंगे तो लोग गलत चीजों का प्रचार करेंगे और उसका नुकसान समाज और देश दोनों को होगा। मैं माउथ पब्लिसिटी में भी विश्वास करता हूं। माउथ पब्लिसिटी को कोई काट नहीं सकता, क्योंकि उसमें जनता खुद आपका प्रचार करती है। इसलिए प्रचार में भी मैं आगे हूं और माउथ पब्लिसिटी में भी।
जहां तक कार्यक्रमों की बात है तो मैं पिछले कई वर्षों से लगातार कार्यक्रम करता आ रहा हूं। कभी आंदोलन के रूप में, कभी धरना-प्रदर्शन के रूप में, कभी पीडीए पंचायत, पीडीए गोष्ठी और पीडीए महापंचायत के रूप में। इसके अलावा भंडारा, कांवड़ियों की सेवा, रथ यात्रा और कई धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रम भी आयोजित करता रहा हूं।

सवाल: 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर आप अब तक लगभग कितने कार्यक्रम कर चुके हैं?
राजेश अग्रवाल: यह बताना बहुत मुश्किल है, क्योंकि मुझे इतनी संख्या याद नहीं रहती। मैंने पिछले 30 साल में कोई फाइलिंग सिस्टम भी नहीं बनाया कि हर कार्यक्रम की फोटो खींचकर एल्बम तैयार करता। जब से फेसबुक लोकप्रिय हुआ है, तब से मेरे फेसबुक अकाउंट पर जाकर आप देख सकते हैं कि मैं कितने कार्यक्रमों में शामिल हुआ हूं। मैं सामान्य तौर पर रोज कम से कम आठ से दस आयोजनों में शामिल होता हूं। एक बात और कहना चाहता हूं। कुछ नेता शादी में जाकर गले मिलने या किसी के निधन पर जाकर शोक जताने की फोटो फेसबुक पर डालकर राजनीति करते हैं। मैं इस तरह की राजनीति नहीं करता।
मैं केवल सामाजिक, धार्मिक, खुशी के कार्यक्रमों, सामाजिक संस्थाओं के आयोजनों या अपने कार्यक्रमों की तस्वीरें फेसबुक पर डालता हूं। किसी की मौत को राजनीति का माध्यम बनाना मुझे पसंद नहीं है और न ही मैं कभी ऐसा करना चाहूंगा। मैं दिनभर जनता के बीच रहता हूं।

सवाल: इन दिनों आपका दैनिक रूटीन क्या रहता है?
राजेश अग्रवाल: मैं सुबह पांच बजे उठता हूं। सुबह सात बजे से लोग मेरे घर आना शुरू कर देते हैं और यह सिलसिला रात करीब नौ बजे तक चलता है। कोई भी व्यक्ति मुझे कहीं भी और किसी भी समय अपनी समस्या के समाधान के लिए बुला सकता है। नगर निगम हो, बरेली विकास प्राधिकरण हो, बिजली विभाग हो या कोई दूसरा विभाग, मैं वहां जाता हूं।
मैं उन लोगों से भी पूछना चाहता हूं जो मेरे खिलाफ टिकट मांग रहे हैं कि उन्होंने आज तक किस विभाग की शक्ल देखी है? उन्होंने किस विभाग से जनता की समस्याओं का समाधान कराया है? मैं जनता के लिए अधिकारियों से लड़ता हूं। चाहे डीएम हों, कमिश्नर हों या नगर आयुक्त, छोटे अधिकारियों की तो बात ही छोड़ दीजिए। मैं हर विभाग में जनता का काम कराने के लिए आवाज उठाता हूं।

सवाल: व्यक्तिगत आंदोलन और जनसरोकार के मोर्चे पर दूसरे दावेदारों के मुकाबले आप खुद को कहां पाते हैं?
राजेश अग्रवाल: यह जनता बताएगी कि वह मुझे कहां रखती है। आप मेरा फेसबुक देख लीजिए, एक भी स्पॉन्सर्ड कमेंट नहीं मिलेगा। अगर ऐसा कोई कमेंट मिल जाए तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा। कुछ लोग स्पॉन्सर्ड कमेंट डलवाते हैं। मैं इस तरह की चीजों में विश्वास नहीं करता। मुझे यह बताने के लिए प्रचार की जरूरत नहीं है कि मैं कहां खड़ा हूं। जनता खुद जानती है। मैं दूसरे लोगों की बुराई नहीं करना चाहता, लेकिन मेरा काम करने का तरीका अलग है। जब हम किसी मुद्दे को उठाते हैं तो पहले आठ-दस दिन उस मुद्दे की पढ़ाई करते हैं। उसके बाद अधिकारियों के साथ बैठक करने जाते हैं। हमें संबंधित नियम और कानून की पूरी जानकारी होती है। एक नेता के लिए पार्टी की बैठकों में शामिल होना, आर्थिक सहयोग करना, जनता के काम करना और जनता को सहयोग देना, सब जरूरी है। मैं ये सभी काम करता हूं। साल के 365 दिन जनता के बीच रहता हूं। शहर और कैंट की दो विधानसभा सीटों की बात करें तो आप कोई ऐसा नेता बता दीजिए जो मेरी तरह हर मोर्चे पर काम कर रहा हो। मैं खुद को एक ‘फुल पैकेज’ मानता हूं।

सवाल: हाल ही में आपकी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात हुई थी। यह मुलाकात कहां हुई और कैसी रही?
राजेश अग्रवाल: वह मुलाकात केवल हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिलने के लिए की गई थी। हमने उस मुलाकात में टिकट की कोई मांग नहीं रखी। मैं इतना जरूर कहूंगा कि हमें जितनी उम्मीद थी, उससे कहीं अधिक उन्होंने हमें समझा। इसके लिए मैं उनका बहुत आभारी हूं। उन्होंने हमें बहुत अच्छा रिस्पांस दिया। आज तक किसी भी नेता ने हमें उतना प्रेम और सम्मान नहीं दिया, जितना हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दिया। यह मुलाकात हमारे लिए बहुत सम्मान और आत्मीयता वाली रही।




