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आस्था, पर्यटन और रोजगार का संगम होगा नाथ सर्किट, जागेश्वर धाम से गोला गोकर्ण नाथ तक को जोड़ा जाएगा, विस्तार से जानें डा. प्रमेंद्र माहेश्वरी के साथ खास बातचीत में

नीरज सिसौदिया, बरेली

सात प्राचीन स्वयंसिद्ध शिव मंदिरों की विरासत सहेजने के कारण बरेली शहर को नाथ नगरी के नाम से भी जाना जाता है. नाथ नगरी के इस प्राचीन स्वरूप को आस्था और पर्यटन के लिहाज से विकसित करने का सपना नाथ नगरी जलाभिषेक समिति ने न सिर्फ देखा बल्कि लगभग तीन साल पहले इस सपने को हकीकत में बदलने का सफर भी शुरू कर दिया था. पहले स्थानीय स्तर पर प्रयास किए और फिर मुख्यमंत्री दरबार तक जा पहुंचे. समिति के प्रयासों का ही नतीजा है कि आज मुख्यमंत्री के आदेश के बाद मंडलायुक्त रणवीर प्रसाद के निर्देश पर इसका ब्लू प्रिंट तैयार करने की दिशा में काम शुरू हो चुका है. सफलता के इस सफर में डा. प्रमेंद्र माहेश्वरी की अहम भूमिका रही है. वास्तव में नाथ सर्किट की परिकल्पना क्या है? इसके जरिये आस्था के कौन-कौन से शहर जोड़ने की उठाई जा रही है मांग? शहर के विकास से नाथ सर्किट का क्या कनेक्शन है? क्या रोजगार का साधन भी बनेगा नाथ सर्किट? ऐसे कई सवालों के जवाब जानते हैं डा. प्रमेंद्र माहेश्वरी से इस खास बातचीत में…
सवाल : नाथ सर्किट की परिकल्पना क्या है?

जवाब : बरेली शहर में ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के सात स्वयंसिद्ध प्राचीन शिव मंदिर मौजूद हैं. इनमें किला स्थित अलखनाथ मंदिर, प्रेमनगर चौराहे के पास स्थित टीबरीनाथ मंदिर, सुभाष नगर स्थित मढ़ीनाथ और तपेश्वर नाथ मंदिर, पीलीभीत बाईपास स्थित वनखंडी नाथ, कैंट स्थित धोपेश्वरनाथ मंदिर और नकटिया स्थित गोपालासिद्ध मंदिर शामिल हैं. इन्हीं मंदिरों की वजह से कहा जाता है कि बरेली शहर को शिव मंदिरों से नथा गया था. इन मंदिरों में हर साल खास तौर पर सावन के महीने में देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं.यहां से श्रद्धालु उत्तराखंड के अल्मोड़ा स्थित जागेश्वर धाम एवं लखीमपुर स्थित गोला गोकर्ण नाथ मंदिर तक भोलेनाथ के दर्शन को जाते हैं. ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के मंदिर होने के बावजूद पर्यटन के लिहाज से इसका विकास नहीं हो सका है. नाथ सर्किट का उद्देश्य धार्मिक महत्व के इन मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं को एक ऐसी व्यवस्था उपलब्ध कराना है जिससे वे आसानी से बिना किसी बाधा और परेशानी के सभी मंदिरों तक पहुंच सकें. साथ ही वे इन धार्मिक स्थलों की महत्ता व इतिहास को भी जान सकें.

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सवाल : नाथ सर्किट के तहत क्या -क्या सुविधाएं दी जानी चाहिए?
जवाब : नाथ सर्किट के तहत सबसे पहले मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी. इसके बाद सड़क, परिवहन, उचित मूल्य पर प्रसाद, रहने आदि की व्यवस्था होनी चाहिए. साथ ही सबसे जरूरी है कि इन मंदिरों के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को साहित्य के माध्यम से संजोने के साथ ही लोगों तक पहुंचाया भी जाए. आज सदियों पुराने आस्था के इन मंदिरों का इतिहास बिखरा हुआ है. धार्मिक साहित्य के माध्यम से हर मंदिर की प्राचीनता, भव्यता और महत्ता को संजोने की आवश्यकता है जिससे देश ही नहीं दुनिया भर के लोग इनके महत्व को जान सकें और इन मंदिरों से लाखों-करोड़ों लोगों को जोड़ा जा सके. आज विदेशों में भी भारतीय संस्कृति शोध का विषय बन चुकी है. भगवान विष्णु के दशावतारों पर रिसर्च हो रही है. ऐसे में नाथ नगरी के ये प्राचीन शिव मंदिर भी शोध का विषय बन सकते हैं. इनमेंं  इनमें कोई मंदिर पांच सौ साल पुराना है तो कोई पांच हजार वर्ष पुराना भी माना जाता हैै.   इस दिशा में व्यापक प्रयास करने की आवश्यकता है. नाथ सर्किट से जुड़ने वाले मंदिरों के आसपास के क्षेत्र को पर्यटन के लिहाज से विकसित किया जाना चाहिए ताकि अपने शहर के विकास के साथ ही रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकें.
सवाल : नाथ सर्किट के निर्माण से शहर वासियों को क्या लाभ होगा?
जवाब : धार्मिक पर्यटन के लिहाज से नाथ नगरी बेहद महत्वपूर्ण है. अगर नाथ सर्किट का निर्माण इसके मूल स्वरूप में किया जाए तो शहर के विकास के साथ ही रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे. देश के अन्य शहरों में जहां देवी के शक्ति पीठ स्थापित हैं अथवा आस्था के धाम मौजूद हैं वहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ ही आस्था के दरबार हैं. हमारे शहर में भी वह सब कुछ मौजूद है जो उन शहरों में है लेकिन यहां सब अव्यवस्थित है. सावन माह में जब जलाभिषेक यात्रा निकलती है तो एक मंदिर से दूसरे मंदिर तक जाने में श्रद्धालुओं को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. हन चाहते हैं कि नाथ सर्किट के माध्यम से शहर के सातों स्वयंसिद्ध शिव मंदिरों को इस तरह जोड़ा जाए कि श्रद्धालु एक साथ बेहद सुगमता से इन सभी मंदिरों में जलाभिषेक कर सकें. आज शहर में इनफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में तेजी से काम हो रहा है. एयरपोर्ट भी जल्द शुरू होने जा रहा है. ऐसे में नाथ सर्किट की परिकल्पना अस्तित्व में आती है तो नाथ नगरी देशभर में अपनी अलग पहचान स्थापित करने में कामयाब होगी और रोजगार का भी कोई संकट नहीं होगा.


सवाल : आप पिछले तीन साल से इस दिशा में प्रयासरत हैं. अब तक की प्रगति को किस नजरिये से देखते हैं?
जवाब : पिछले तीन वर्षों में हमने नाथ सर्किट के सपने को साकार करने की दिशा में काफी प्रयास भी किए हैं. पहले स्थानीय स्तर पर अधिकारियों के समक्ष यह प्रस्ताव रखा. फिर दिसंबर में जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ किसान सम्मेलन में शामिल होने बरेली आए थे तो उनसे मुलाकात कर उन्हें भी नाथ सर्किट के बारे में बताया. मुख्यमंत्री के निर्देश पर ही हम मंडलायुक्त रणवीर प्रसाद से मिले. उन्होंने इस संबंध में ब्लू प्रिंट तैयार कराना शुरू कर दिया है. हम चाहते हैं कि जल्द से जल्द इसका कार्य शुरू किया जाए और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसका उद्घाटन करें.

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