नीरज सिसौदिया, बरेली
समाजवादी पार्टी की बरेली की सियासत में पूर्व राज्यसभा सांसद वीरपाल सिंह यादव का रविवार को आंवला में आयोजित बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। सम्मेलन में उन्होंने सिर्फ कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारी का संदेश नहीं दिया, बल्कि उन सियासी चर्चाओं का भी जवाब दिया, जिनमें आंवला सीट को लेकर परिवार और पार्टी के भीतर मतभेद की बातें सामने आ रही थीं। पूर्व विधायक महिपाल सिंह यादव और डॉ. जीराज सिंह यादव को एक मंच पर लाकर वीरपाल सिंह यादव ने यह दिखाने की कोशिश की कि टिकट की चर्चा और व्यक्तिगत दावेदारियों से ऊपर पार्टी का संगठन है। उनके भाषण का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही रहा कि अब चुनावी तैयारी में किसी समर्थक को उसके नेता या खेमे के आधार पर अलग नहीं माना जाएगा।

इस सम्मेलन को केवल एक सामान्य बूथ बैठक मानना इसके राजनीतिक संदेश को कम करके आंकना होगा। आंवला में एक मंच पर तीन प्रभावशाली नेताओं की मौजूदगी और वीरपाल सिंह यादव का स्पष्ट संबोधन आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के स्थानीय संगठन को एक दिशा देने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।
आंवला विधानसभा सीट पर टिकट को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही चर्चाओं की पृष्ठभूमि समझना जरूरी है। अखिलेश यादव ने 11 अक्टूबर को वीरपाल सिंह यादव को आंवला विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाया था। इस फैसले के बाद उनके पुत्र डॉ. देवेंद्र यादव के टिकट को लेकर अटकलें तेज हो गईं। दूसरी ओर पूर्व विधायक महिपाल सिंह यादव, उनके पुत्र अमित राज सिंह, डॉ. जीराज सिंह यादव और पूर्व जिलाध्यक्ष अगम मौर्य जैसे नामों को लेकर भी दावेदारी की चर्चाएं सामने आईं। कुछ दावेदारों के लखनऊ पहुंचकर अपनी बात रखने की खबरें भी प्रकाशित हुईं।

ऐसे माहौल में वीरपाल सिंह यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल अपने बेटे की दावेदारी को आगे बढ़ाने की नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर संभावित नाराजगी को संभालने की भी थी। टिकट की चर्चा में अक्सर समर्थक भी अलग-अलग खेमों में बंट जाते हैं। इसका असर बूथ स्तर तक पहुंचता है तो चुनावी तैयारी प्रभावित हो सकती है। वीरपाल सिंह यादव ने सम्मेलन में इसी आशंका को संबोधित किया। उन्होंने साफ कहा कि किसी कार्यकर्ता के साथ इस आधार पर भेदभाव नहीं होगा कि वह महिपाल सिंह यादव का समर्थक है, डॉ. जीराज सिंह यादव का समर्थक है या किसी अन्य दावेदार के साथ जुड़ा हुआ है।

यह बात उनके राजनीतिक दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण हिस्सा सामने लाती है। उन्होंने टिकट की दावेदारी को संगठन के भीतर स्थायी विभाजन का कारण बनने देने के बजाय सभी नेताओं और उनके समर्थकों को साथ रखने का संदेश दिया। राजनीति में किसी दावेदार का समर्थक होना अपने आप में विरोधी खेमे का सदस्य हो जाना नहीं है। चुनाव के समय वही कार्यकर्ता पार्टी का आधार बनता है। वीरपाल का संदेश था कि व्यक्ति के प्रति निष्ठा अपनी जगह है, लेकिन पार्टी का चुनावी लक्ष्य उससे बड़ा है।

सम्मेलन में महिपाल सिंह यादव और डॉ. जीराज सिंह यादव की मौजूदगी को इसी रणनीति के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। दोनों को लेकर नाराजगी की चर्चाएं थीं, लेकिन कार्यक्रम में तीनों नेताओं का एक मंच पर आना यह बताने के लिए पर्याप्त था कि स्थानीय स्तर पर संवाद और समन्वय की गुंजाइश बनी हुई है। यह तस्वीर उन चर्चाओं के विपरीत संदेश देती है, जिनमें सपा के भीतर रिश्तेदारी और टिकट की दावेदारी को लेकर टकराव की बात कही जा रही थी।
इस सम्मेलन की खासियत यह भी रही कि वीरपाल सिंह यादव ने केवल मंच साझा करने तक बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने अपने भाषण में समर्थकों के बीच भेदभाव न करने की बात कही। यानी एक मंच पर मौजूदगी को संगठनात्मक एकजुटता में बदलने की कोशिश की। किसी भी राजनीतिक दल में वरिष्ठ नेता की भूमिका केवल अपने समर्थकों को साथ रखने तक सीमित नहीं होती, बल्कि अलग-अलग समूहों को साझा लक्ष्य के लिए तैयार करना भी होती है। वीरपाल ने इसी भूमिका को सामने रखा।
डॉ. जीराज सिंह यादव का यह कहना कि राष्ट्रीय अध्यक्ष जिसे भी उम्मीदवार बनाएंगे, वे उसे पूरी ताकत से चुनाव लड़ाएंगे, सम्मेलन के संदेश को और मजबूत करता है। इसी तरह आंवला से पूर्व प्रत्याशी आरके शर्मा का यह स्पष्ट करना कि वह आंवला से टिकट की दावेदारी नहीं कर रहे हैं, स्थानीय राजनीतिक तस्वीर को कुछ हद तक साफ करता है।

अखिलेश के फैसले का दिया स्पष्ट संदेश
वीरपाल सिंह यादव ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव आंवला विधानसभा सीट से पार्टी का उम्मीदवार तय कर चुके हैं और जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव इसके गवाह हैं। उनका इशारा अपने पुत्र डॉ. देवेंद्र यादव की ओर था। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि कुछ लोग चुनाव चिह्न मिलने तक इंतजार करते हैं, लेकिन उन्हें अभी से पार्टी की जीत के लिए जुट जाना चाहिए। यह संदेश टिकट की घोषणा का इंतजार कर रहे कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारी की ओर मोड़ने की कोशिश है। उन्होंने टिकट को लेकर अनिश्चितता और चर्चाओं के बीच कार्यकर्ताओं को स्पष्ट दिशा देने की कोशिश की। उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने के लक्ष्य के साथ सभी को मिलकर काम करना है।
इस पूरे घटनाक्रम में जिला अध्यक्ष शुभलेश यादव की मौजूदगी का उल्लेख भी महत्वपूर्ण है। वीरपाल ने अपने बयान में उन्हें इस फैसले का गवाह बताया। इससे यह संदेश देने की कोशिश हुई कि आंवला को लेकर उनकी बात केवल व्यक्तिगत दावा नहीं, बल्कि पार्टी नेतृत्व के साथ हुई चर्चा और संगठनात्मक प्रक्रिया से जुड़ी है।

आंवला उनके लिए नई जमीन नहीं
वीरपाल सिंह यादव ने सम्मेलन में अपने राज्यसभा सदस्य के कार्यकाल के दौरान आंवला विधानसभा क्षेत्र में किए गए कार्यों का जिक्र भी किया। उनका कहना था कि आंवला उनके लिए कोई नई सीट नहीं है। यह बात उनके राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र से पुराने जुड़ाव को रेखांकित करती है। उनकी संगठनात्मक पृष्ठभूमि भी इस भूमिका को महत्वपूर्ण बनाती है। वीरपाल सिंह यादव करीब ढाई दशक तक लगातार समाजवादी पार्टी के बरेली जिलाध्यक्ष रहे हैं। वर्ष 2006 में उन्हें राज्यसभा सदस्य बनाया गया था। इतने लंबे समय तक जिला संगठन का नेतृत्व करने का अनुभव किसी नेता को कार्यकर्ताओं, स्थानीय पदाधिकारियों और अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के राजनीतिक समीकरणों की समझ देता है। बरेली की राजनीति में उनके समर्थकों का दायरा केवल आंवला तक सीमित नहीं माना जाता। जिले की दूसरी सीटों पर भी उनके पुराने संगठनात्मक संपर्क रहे हैं। यही वजह है कि उनके किसी भी बड़े राजनीतिक कार्यक्रम पर जिले के दूसरे विधानसभा क्षेत्रों के नेताओं की निगाह रहती है।
वीरपाल सिंह यादव का संदेश केवल एक सीट तक सीमित नहीं था। उन्होंने जिला पंचायत चुनाव में भी सभी कार्यकर्ताओं को समान नजर से देखने की बात कही। इससे स्पष्ट होता है कि वह विधानसभा चुनाव के साथ स्थानीय निकाय और पंचायत स्तर पर भी संगठन को एकजुट रखने पर जोर दे रहे हैं।

आंवला में एक मंच पर आए तीनों नेताओं की तस्वीर और वीरपाल सिंह यादव का संबोधन आने वाले दिनों में स्थानीय सपा राजनीति की दिशा तय करने वाली घटनाओं में गिना जा सकता है। अब देखना होगा कि सम्मेलन में दिया गया एकजुटता का संदेश बूथ स्तर तक किस तरह पहुंचता है और पार्टी के सभी नेता उसे चुनावी कामकाज में कितना उतारते हैं। फिलहाल वीरपाल सिंह यादव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनके लिए सबसे बड़ा लक्ष्य किसी एक दावेदार की राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी के संगठन को साथ लेकर चलना और अखिलेश यादव के नेतृत्व में सरकार बनाने के लिए कार्यकर्ताओं को तैयार करना है।

बूथ सम्मेलन में जिले की दूसरी सीटों के नेता भी पहुंचे
आंवला के बूथ सम्मेलन में मीरगंज के पूर्व विधायक सुल्तान बेग, बरेली कैंट विधानसभा सीट से सपा के टिकट के प्रबल दावेदार राजेश अग्रवाल सहित जिले की अन्य विधानसभा सीटों के नेता भी शामिल हुए। सम्मेलन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की मौजूदगी रही। एक अन्य स्थानीय समाचार रिपोर्ट में भी इस कार्यक्रम में वीरपाल सिंह यादव, महिपाल सिंह यादव, डॉ. जीराज सिंह यादव, जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव और अन्य नेताओं की उपस्थिति का उल्लेख किया गया है।




