यूं ही जिन्दगी से शिकायत मत करो।
मुस्कराने में भी यूं किफायत मत करो।।
जिन्दगी बेमिसाल तोफहा ऊपरवाले का।
उसकी दी हुई बर्बाद यह नियामत मत करो।।
जी कर तो देखो चैन और सकूँ अंदर बसा है।
खुशियों को बाहर से आयात मत करो।।
रहो न मायूस होकर हमेशा जिंदगी के सफर में।
शुरू अपने लिये यह गलत रवायत मत करो।।
हंसी खुशी का दूसरा नाम ही है जिंदगी।
बस जिंदादिली में कोई रियायत मत करो।।
दिल से दिल से मिलाओ हर किसी से तुम।
जीना है तो नफरत की हिमायत मत करो।।
*हंस* दिल से बनो एक आदमी अमीर तुम।
दिखावे की यूँ झूठी इनायत मत करो।।
-एस के कपूर “श्री हंस”
मो. 9897071046, 8218685464

यूं ही जिंदगी से शिकायत मत करो…




