विचार

शुभ नवरात्रि महिमा अपार

माँ जयकार शक्ति ओ भक्ति जागे बेड़ा हो पार पापनाशिनी दुर्गा चंडी रूपा तू सिंह वाहिनी तेरा श्रृंगार भक्ति भरे अपार करे उद्धार माँ तेरा नाम बिगड़े काम बने न हो नाकाम माँ आशीर्वाद जब प्राप्त हो जाये मिटे विवाद भक्ति ओ आस्था मिले गुम वो रास्ता हो माँ से वास्ता जौ का कसोरा पूजन […]

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चलो एक पौधा प्रेम का, मिलकर लगाया जाये…

चलो एक पौधा प्रेम का, मिलकर लगाया जाये। महोब्बत ही खुदा यह ,संबको बताया जाये।। नफरत करने वाले ,कभी भी पनपते नहीं। इस बात को अब, संबको दिखाया जाये।। मायूसी और उदासी से ,निकलें लोग जरा। हौसलों का नगमा ,संबको सुनाया जाये।। मिलकर जीने में ही है ,कौम की भलाई। इस बात को बहुत दूर, […]

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इक़ जमाना बीत गया भीगे बरसात में…

सोते नहीं छत पे पहले जैसे रात में। लगाते नहीं गले हर मुलाकात में।। बदल गया चलन अब जमाने का। देखते हैं कीमत हर भेंट सौगात में।। चकाचौंध रोशन बन गई दुनिया। अब यकीं घट गया जज्बात में।। बडे बूढ़ों के आशीर्वाद में रहा नहीं यकीं। बौखला जाते हैं बुजुर्गों की लात में।। दुनिया की […]

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शख़्सियत निशान छोड़ती है…

शख़्सियत निशान छोड़ती है। तहज़ीब खुद से बोलती है।। एक ही जुबाँ पर जहर शक्कर। कहते हैं झूठी जुबां झोलती है।। जिसको कद्र नहीं नफ़ासत की। अंगूठी हीरे की भी यूँ रोलती है।। अजब गजब सा आ गया जमाना। सच्चाई झूठ के आगे डोलती है।। *हंस* इक़ राज़ की बात बताऊँ मैं। जिन्दगी रोज़ नया […]

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यूं ही जिंदगी से शिकायत मत करो…

यूं ही जिन्दगी से शिकायत मत करो। मुस्कराने में भी यूं किफायत मत करो।। जिन्दगी बेमिसाल तोफहा ऊपरवाले का। उसकी दी हुई बर्बाद यह नियामत मत करो।। जी कर तो देखो चैन और सकूँ अंदर बसा है। खुशियों को बाहर से आयात मत करो।। रहो न मायूस होकर हमेशा जिंदगी के सफर में। शुरू अपने […]

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एसके कपूर की गजलें : अच्छी बात नहीं…

जहर की खेती बोई जाये अच्छी बात नहीं। दुनिया हम को नाच नचाये अच्छी बात नही।। हमको करना होगी गुलशन की पहरेदारी। कातिल आबोहवा मुस्काये अच्छी बात नहीं।। प्यार मुहब्बत के पौधों से भरना है सारा गुलशन। नफ़रत हर सू आँख दिखाये अच्छी बात नहीं।। इतनी पहरेदारी है कैसे यह है मुमकिन। दुश्मनआकर घात लगाये […]

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एसके कपूर की गजलें-3, गलतफहमी में जीने का…

गलतफहमी में जीने का मजा कुछ और होता है। किसी के गम को पीने का सिला कुछ और होता है।। हक़ीक़त जान कर रोता है अक्सर ही यहाँ इंसाँ। मगर सच बात कहने का नशा कुछ और होता है ।। सुलह कर ली है मैंने भी तो अब अपने मुक़द्दर से। रज़ा पर उसकी चलने […]

यूपी

अशोक टंडन और गीतांजलि ने जीती अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस प्रतियोगिता

नीरज सिसौदिया, बरेली एसबीआई वरिष्ठ नागरिक समूह प्रतियोगिता में अशोक टंडन ने सबको पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है. वहीं, रघुकुल तिलक ने दूसरा स्थान हासिल किया है. वहीं, जय जय हिंदी बरेली मंडल समूह में गीतांजलि वार्ष्णेय इफको बरेली प्रथम और रामपुर के रवि प्रकाश दूसरे स्थान पर रहे. वहीं हेल्थ इज […]

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जो गिर कर उठता बार बार, वही बनता अभिजीत है

गिर गिर कर फिर भी तुम संभलना सीखो। डूब कर भी तुम दुबारा उबरना सीखो।। विनाश नहीं सृजन ही तो होता है जीवन। मिट भी जाये गर तो फिर से लिखना सीखो।। बिखर कर दुबारा निखरना ही तो जीत है। सदा आगे की सोचो जो बीत गया अतीत है।। हमारी सोच आत्म विश्वास मीत हैं […]

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जैसी करनी वैसी भरनी यही विधि का विधान है

आज आदमी अनगिनत चेहरे लगाये हज़ार है। ना जाने कैसा चलन आ गया व्यवहार है।। मूल्य अवमूल्यन शब्द कोरे किताबी हो गये। अंदर कुछ अलग कुछ आज आदमी बाहर है।। जैसी करनी वैसी भरनी यही विधि का विधान है। गलत कर्मों की गठरी लिये घूम रहा इंसान है।। पाप पुण्य का अंतर ही मिटा दिया […]