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अंबेडकर जयंती की भव्य शोभायात्रा में बिखेरे सम्मान के रंग, नीली पगड़ी से सिख सम्मान तक, बरेली के सामाजिक सौहार्द का चेहरा बने राजेश अग्रवाल

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नीरज सिसौदिया, बरेली

बरेली शहर में मंगलवार का दिन सामाजिक सौहार्द, सांस्कृतिक एकता और सर्वसमाज के सम्मान का प्रतीक बन गया। भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर निकली शहर की सबसे बड़ी और भव्य शोभायात्रा से लेकर बैसाखी के उल्लासपूर्ण कार्यक्रमों तक, समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रत्याशी, वरिष्ठ पार्षद और कैंट विधानसभा सीट से प्रबल दावेदार राजेश अग्रवाल पूरे दिन अलग-अलग आयोजनों में सक्रिय नजर आए। उनकी यही सक्रियता उन्हें बरेली के सामाजिक सौहार्द का मजबूत चेहरा बनाती दिखी।

डॉ. भीमराव अंबेडकर दलित उत्थान सेवा समिति और अन्य संगठनों की ओर से आयोजित इस शोभायात्रा में हजारों लोग शामिल हुए। शहर की मुख्य सड़कों पर नीले झंडे, बैंड-बाजे, झांकियां और बाबा साहब के जयकारों के बीच माहौल पूरी तरह सामाजिक न्याय और समानता के संदेश से गूंज उठा।

इस दौरान राजेश अग्रवाल नीली पगड़ी, उसी रंग के गमछे और सादगीपूर्ण कुर्ता-पायजामे में बाबा साहब के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करते नजर आए। साहू गोपीनाथ क्षेत्र में उनके द्वारा लगाए गए स्वागत कैंप ने शोभायात्रा की भव्यता को और बढ़ा दिया। जैसे ही लगभग ढाई किलोमीटर लंबी शोभायात्रा कैंप के पास पहुंची, वहां मौजूद कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भारी मात्रा में पुष्पवर्षा कर अंबेडकरवादियों का स्वागत किया। दलित समाज के प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और यात्रा का नेतृत्व कर रहे प्रमुख लोगों का पगड़ी पहनाकर, शॉल ओढ़ाकर और मालाएं पहनाकर सम्मान किया गया।

इस पूरे आयोजन में नवल किशोर, सुरेंद्र सोनकर, रणवीर सिंह जाटव सहित कई प्रमुख दलित नेताओं का विशेष सम्मान किया गया। यह दृश्य सामाजिक समरसता और बराबरी के संदेश को और मजबूत करता नजर आया। लोगों ने इसे सिर्फ स्वागत नहीं, बल्कि सम्मान की राजनीति और सामाजिक जुड़ाव का प्रतीक बताया।

अंबेडकर जयंती के आयोजन के बाद राजेश अग्रवाल शहर में आयोजित बैसाखी के विभिन्न कार्यक्रमों में भी शामिल हुए, जहां सिख समाज ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। गुरुद्वारा और अन्य सामुदायिक स्थलों पर आयोजित कार्यक्रमों में पहुंचकर उन्होंने सिख समाज को बैसाखी की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान सिख समाज के प्रमुख लोगों ने उन्हें सिरोपा और सम्मान स्वरूप पगड़ी पहनाकर स्वागत किया। यह नजारा बरेली की गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे की खूबसूरत मिसाल बन गया।

सिर्फ यही नहीं, शहर के अलग-अलग इलाकों में जहां भी बाबा साहब अंबेडकर की जयंती या बैसाखी से जुड़े कार्यक्रम आयोजित हो रहे थे, वहां राजेश अग्रवाल की मौजूदगी लगातार बनी रही। वे कई सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों में पहुंचे, लोगों से मिले, बधाई दी और आयोजकों का उत्साह बढ़ाया। उनकी इस सक्रियता ने साफ संदेश दिया कि वे किसी एक वर्ग नहीं, बल्कि सर्वसमाज के साथ जुड़ाव और सम्मान की राजनीति में विश्वास रखते हैं।

दरअसल, बरेली शहर में मंगलवार को भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर निकाली गई सबसे बड़ी और भव्य शोभायात्रा ने पूरे शहर को नीले रंग में रंग दिया। डॉ. भीमराव अंबेडकर दलित उत्थान सेवा समिति और अन्य सामाजिक संगठनों की ओर से आयोजित इस विशाल शोभायात्रा में हजारों की संख्या में अंबेडकरवादी, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा, महिलाएं और बच्चे शामिल हुए। शहर की सड़कों पर बाबा साहब के जयकारों, बैंड-बाजों, आकर्षक झांकियों और नीले झंडों के बीच ऐसा माहौल बना कि हर तरफ सामाजिक समरसता, सम्मान और भाईचारे का संदेश दिखाई दे रहा था।

इस ऐतिहासिक शोभायात्रा के दौरान समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रत्याशी, कैंट विधानसभा सीट से आगामी चुनाव के प्रबल दावेदार और वरिष्ठ पार्षद राजेश अग्रवाल पूरी तरह बाबा साहब के विचारों के रंग में रंगे नजर आए। उन्होंने जिस अनोखे और आत्मीय अंदाज में इस शोभायात्रा का स्वागत किया, वह पूरे आयोजन का सबसे खास आकर्षण बन गया।

साहू गोपीनाथ क्षेत्र में राजेश अग्रवाल की ओर से शोभायात्रा के स्वागत के लिए एक भव्य कैंप लगाया गया था। जैसे ही लगभग ढाई किलोमीटर से अधिक लंबी शोभायात्रा उनके कैंप के पास पहुंची, वहां मौजूद लोगों ने जोरदार जयकारों के बीच भारी मात्रा में पुष्पवर्षा कर यात्रा में शामिल लोगों का स्वागत किया। फूलों की बारिश से पूरा माहौल भावुक, उत्साहपूर्ण और यादगार बन गया। शोभायात्रा में शामिल अंबेडकरवादी इस सम्मान से भावविभोर नजर आए।

राजेश अग्रवाल ने स्वयं आगे बढ़कर यात्रा में शामिल लोगों को फूल-मालाएं पहनाईं, शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया और मिठाइयां वितरित कीं। इसके साथ ही गर्मी को देखते हुए पानी की बोतलों की भी व्यवस्था की गई थी। कैंप में आने वाले हर व्यक्ति को सम्मानपूर्वक जलपान और सेवा दी गई।

इस बार आयोजन की एक खास झलक वह भी रही, जब राजेश अग्रवाल ने बच्चों को किताबें वितरित कर शिक्षा का संदेश दिया। बाबा साहब डॉ. अंबेडकर के शिक्षा, समानता और जागरूकता के विचारों को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने बच्चों को प्रेरणादायक पुस्तकें देकर उन्हें पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया। इस पहल को वहां मौजूद लोगों ने खूब सराहा और इसे बाबा साहब के विचारों को सच्ची श्रद्धांजलि बताया।

इसके अलावा दलित समाज के प्रमुख नेताओं का भी विशेष सम्मान किया गया। नवल किशोर, सुरेंद्र सोनकर, रणवीर सिंह जाटव सहित कई प्रमुख दलित नेताओं का राजेश अग्रवाल ने पगड़ी पहनाकर भव्य स्वागत किया। यह सम्मान समारोह शोभायात्रा के दौरान आकर्षण का बड़ा केंद्र बना रहा। पगड़ी पहनाकर किया गया यह स्वागत सामाजिक सम्मान, आत्मीयता और बराबरी का मजबूत संदेश देता नजर आया।

शोभायात्रा की भव्यता देखते ही बन रही थी। लगभग ढाई किलोमीटर से अधिक लंबी इस यात्रा में कई आकर्षक झांकियां, बाबा साहब के विचारों को दर्शाते बैनर, सामाजिक संदेश देने वाले पोस्टर, डीजे, बैंड और बड़ी संख्या में युवा शामिल थे। शहर की मुख्य सड़कों से गुजरती इस शोभायात्रा के दोनों ओर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी हुई थी। छतों और बालकनियों से लोग इस नजारे को देख रहे थे। जगह-जगह लोगों ने फूल बरसाकर बाबा साहब को नमन किया।

इस पूरे आयोजन में राजेश अग्रवाल की मौजूदगी और उनकी सादगीपूर्ण शैली लोगों को खास तौर पर प्रभावित करती नजर आई। उन्होंने नीली पगड़ी, उसी रंग का गमछा और सादा कुर्ता-पायजामा पहनकर बाबा साहब के प्रति अपना गहरा सम्मान प्रदर्शित किया। उनका यह पहनावा न सिर्फ अंबेडकरवादी विचारधारा के प्रति सम्मान का प्रतीक बना, बल्कि दलित समाज के साथ उनके भावनात्मक जुड़ाव को भी मजबूती से दर्शाता रहा।

दरअसल, राजेश अग्रवाल ने इस भव्य स्वागत के माध्यम से एक बड़ा सामाजिक संदेश देने का प्रयास किया। उन्होंने यह दिखाया कि वे दलित समाज के सम्मान, अधिकार, शिक्षा और बराबरी के पक्षधर हैं। बच्चों को किताबें देना और दलित नेताओं का पगड़ी पहनाकर सम्मान करना इसी सोच का प्रतीक माना गया। उनके स्वागत और सम्मान के तरीके ने यह स्पष्ट किया कि वे सामाजिक एकता, समरसता, सौहार्द, सेवा, शिक्षा और समर्पण की राजनीति में विश्वास रखते हैं।

यात्रा मार्ग पर जगह-जगह लगाए गए राजेश अग्रवाल के स्वागत बैनर और पोस्टर भी चर्चा का विषय बने रहे। इन पोस्टरों में बाबा साहब को नमन करते हुए सामाजिक सम्मान और भाईचारे का संदेश दिया गया था। इन बैनरों ने पूरे माहौल को और भी आकर्षक और भव्य बना दिया।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह आयोजन काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खास तौर पर तब, जब भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के कई प्रमुख नेता इस सबसे बड़ी शोभायात्रा से दूर नजर आए, वहीं राजेश अग्रवाल ने खुलकर दलित समाज के साथ अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। इससे दलित समाज और अंबेडकरवादी वर्ग में उनके प्रति सकारात्मक संदेश गया है।

कुल मिलाकर, बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर निकली इस विशाल और भव्य शोभायात्रा में राजेश अग्रवाल ने अपने अनोखे स्वागत, पुष्पवर्षा, किताब वितरण, पगड़ी सम्मान और सामाजिक समरसता के संदेश से खुद को एक ऐसे जननेता के रूप में प्रस्तुत किया, जो हर वर्ग के सम्मान, शिक्षा और अधिकार की बात करता है। उनकी मौजूदगी ने इस आयोजन को और भी खास, यादगार और प्रभावशाली बना दिया।

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