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न्याय, समानता और कल्याण के मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करता है अहिल्याबाई होलकर का जीवन, डॉ. अनीस बेग ने महाराष्ट्र की बेटी को किया नमन, बताई त्याग और संघर्ष की पूरी कहानी, आप भी पढ़ें

नीरज सिसौदिया, बरेली
सती प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों और महिला अधिकारों की रक्षा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाली महाराष्ट्र की बेटी अहिल्याबाई होलकर को उनकी जयंती पर समाजवादी पार्टी की ओर से नमन किया गया। इस दौरान जिला अध्यक्ष शिवचरन कश्यप, महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी और चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉक्टर अनीस बेग, जिला उपाध्यक्ष रविंद्र यादव, अंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेंद्र सोनकर और महिला सभा की अध्यक्ष स्मिता यादव सहित अन्य समाजवादी नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।


इस अवसर पर पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने गोष्ठी का आयोजन किया, जिसमें महारानी अहिल्याबाई के जीवन और उनके कार्यों पर प्रकाश डाला गया।
पार्टी के जिलाध्यक्ष शिव चरन कश्यप ने कहा कि महारानी अहिल्याबाई भारतीय इतिहास की एक प्रेरणादायी, न्यायप्रिय और जनकल्याणकारी शासिका थीं। उनका जीवन उदाहरण है कि नारी नेतृत्व भी प्रशासन, न्याय और सेवा के क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित कर सकता है।
गोष्ठी में महानगर अध्यक्ष शमीम खान सुल्तानी ने कहा कि रानी अहिल्याबाई का जीवन हमें सिखाता है कि कैसे हम समाज के लिए काम कर सकते हैं और सामाजिक न्याय को बढ़ावा दे सकते हैं।
डॉक्टर अनीस बेग ने कहा कि रानी अहिल्या बाई होलकर एक प्रेरणादायी और न्यायप्रिय शासिका थीं।
रानी अहिल्या बाई होलकर भारतीय इतिहास की एक प्रमुख और प्रभावशाली शासिका थीं। उनका जन्म 31 मई 1725 को हुआ था और उन्होंने अपने शासनकाल में मध्य भारत के मालवा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कार्य किए।


उन्होंने कहा कि अहिल्या बाई का जन्म महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव में हुआ था। उनके पिता मानकोजी शिंदे एक साधारण किसान थे। अहिल्या बाई की शिक्षा-दीक्षा सामान्य थी, लेकिन उन्हें धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों की अच्छी समझ थी। उनका विवाह 1734 में मल्हार राव होलकर के पुत्र खंडे राव से हुआ था।
1754 में अपने पति की मृत्यु के बाद, अहिल्या बाई के ससुर मल्हार राव होलकर ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें प्रशासनिक कार्यों में शामिल किया। 1766 में मल्हार राव की मृत्यु के बाद, अहिल्या बाई ने अपने पुत्र मालेराव की देखभाल की, लेकिन 1767 में मालेराव की भी मृत्यु हो गई। इसके बाद, अहिल्या बाई ने स्वयं शासन संभाला और महेश्वर को अपनी राजधानी बनाया।


डॉक्टर अनीस बेग ने आगे बताया कि अहिल्या बाई ने अपने शासनकाल में कई महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने एक निष्पक्ष और प्रभावी न्याय व्यवस्था स्थापित की। उन्होंने अपराधियों को सजा देने में निष्पक्षता और दया का संतुलन बनाए रखा। उन्होंने कृषि को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए, जैसे कि सिंचाई सुविधाओं का विकास और किसानों को ऋण प्रदान करना। अहिल्या बाई ने कई मंदिरों, घाटों और अन्य धार्मिक स्थलों का निर्माण करवाया। उन्होंने काशी (वाराणसी) में भी कई निर्माण कार्य करवाए। उन्होंने सती प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के लिए काम किया और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की।

डॉक्टर अनीस बेग ने कहा कि रानी अहिल्या बाई होलकर की विरासत आज भी जीवित है। उनके शासनकाल में किए गए कार्य और उनकी न्यायप्रियता और कल्याणकारी नीतियां उन्हें एक आदर्श शासिका के रूप में स्थापित करती हैं। उनकी कहानी महिलाओं और अन्य लोगों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए काम करते हैं। रानी अहिल्या बाई होलकर का जीवन और कार्य हमें सिखाता है कि सच्ची नेतृत्व क्षमता और न्यायप्रियता के साथ, कोई भी व्यक्ति समाज में महत्वपूर्ण परिवर्तन ला सकता है। उनकी कहानी हमें प्रेरित करती है कि हम भी अपने समाज के लिए कुछ अच्छा करने का प्रयास करें और न्याय, समानता और कल्याण के मूल्यों को बढ़ावा दें।
इस अवसर पर पार्टी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे, जिनमें जिला उपाध्यक्ष रविन्द्र यादव, अम्बेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेंद्र सोनकर, जिला कोषाध्यक्ष अशोक यादव, स्मिता यादव, राजेश्वरी यादव और अन्य लोग शामिल थे।

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