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फरीदपुर में पहली बार नंबर नहीं, मेहनत का सम्मान, समाजवादी अंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव चंद्रसेन सागर ने शुरू किया ऐतिहासिक अभियान, 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में पास होने वाले 385 बच्चों को दिए मेडल, उपहार और प्रमाण पत्र, कल भुता ब्लॉक में होगा सम्मान समारोह, जानिये क्या है खास?

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नीरज सिसौदिया, बरेली
फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों एक ऐसी पहल चर्चा का केंद्र बनी हुई है, जो न सिर्फ शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम है, बल्कि समाज में सकारात्मक संदेश भी दे रही है। फरीदपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट के प्रबल दावेदार और पूर्व ब्लॉक प्रमुख चंद्रसेन सागर ने एक अनूठी मुहिम की शुरुआत की है, जिसके तहत 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा पास करने वाले हर छात्र-छात्रा को सम्मानित किया जा रहा है।
यह पहल इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि इसमें केवल टॉपर्स या अधिक अंक पाने वाले छात्रों को ही नहीं, बल्कि हर उस बच्चे को सम्मान दिया जा रहा है जिसने मेहनत करके परीक्षा पास की है। गुरुवार को इस अभियान की शुरुआत फतेहगंज पूर्वी नगर पंचायत से की गई, जहां बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और उनके अभिभावक मौजूद रहे। इसके बाद ग्राम भिटौरा, सलेमपुर और टिशुआ में भी सम्मान समारोह आयोजित किए गए। पहले ही दिन कुल 385 विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।


कार्यक्रम का माहौल बेहद उत्साहपूर्ण और भावनात्मक था। मंच पर जब बच्चों को बुलाकर पदक, प्रमाण पत्र और पुरस्कार दिए गए, तो उनके चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी। कई अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों के मनोबल को बढ़ाते हैं और उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
इस पूरे अभियान की खास बात यह रही कि सभी बच्चों को एक समान पुरस्कार दिया गया। इससे किसी भी बच्चे के मन में यह भावना नहीं आई कि वह दूसरों से कमतर है। चंद्रसेन सागर खुद मंच पर मौजूद रहे और अपने हाथों से बच्चों को सम्मानित किया, जिससे कार्यक्रम और भी खास बन गया।


चंद्रसेन सागर ने अपने संबोधन में कहा कि इस पहल का उद्देश्य सिर्फ पुरस्कार देना नहीं, बल्कि समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि किसी बच्चे की प्रतिभा को सिर्फ अंकों के आधार पर नहीं आंका जा सकता। हर बच्चा अपने आप में खास होता है और उसकी मेहनत का सम्मान होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि अक्सर देखा जाता है कि सिर्फ टॉप करने वाले छात्रों को ही सम्मान मिलता है, जिससे बाकी बच्चों के मन में हीन भावना पैदा हो जाती है। उनकी यह पहल उसी सोच को बदलने की कोशिश है। उनका मानना है कि अगर हर बच्चे को सम्मान मिलेगा, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वह आगे और बेहतर करने के लिए प्रेरित होगा।


यह अभियान केवल एक-दो गांवों तक सीमित नहीं रहने वाला। चंद्रसेन सागर ने बताया कि इसे पूरे फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र में चलाया जाएगा। सभी ब्लॉकों और नगर पंचायतों में जाकर ऐसे ही कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि कोई भी योग्य छात्र इस सम्मान से वंचित न रह जाए।
शनिवार को भुता ब्लॉक में भी इसी तरह का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जहां वहां के छात्रों को पदक, प्रमाण पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा। इस अभियान को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है और लोग इसे एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देख रहे हैं।


चंद्रसेन सागर का राजनीतिक और सामाजिक जुड़ाव भी इस पहल को खास बनाता है। वह फरीदपुर से पांच बार विधायक रहे स्वर्गीय सियाराम सागर के छोटे भाई हैं और लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में बनती जा रही है, जो केवल राजनीति ही नहीं, बल्कि समाज के विकास के लिए भी काम करना चाहता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की पहल से बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ेगी और अभिभावक भी अपने बच्चों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करेंगे। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां कई बार संसाधनों की कमी के कारण बच्चे पढ़ाई से दूर हो जाते हैं, वहां इस तरह का सम्मान उन्हें नई ऊर्जा देता है।


कुल मिलाकर, फरीदपुर में शुरू हुई यह पहल केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सोच का बदलाव है। यह पहल संदेश देती है कि हर बच्चे की मेहनत मायने रखती है और उसे सम्मान मिलना चाहिए। चंद्रसेन सागर की यह कोशिश न सिर्फ शिक्षा को बढ़ावा दे रही है, बल्कि समाज में समानता और प्रोत्साहन का नया उदाहरण भी पेश कर रही है। इस अभियान के जरिये चंद्रसेन सागर न सिर्फ बच्चों के दिलों में जगह बना रहे हैं बल्कि अभिभावकों के दिलों में भी घर बना रहे हैं क्योंकि एक बच्चे की मुस्कुराहट पूरे परिवार को गौरवान्वित करती है। अब तक टॉपर्स के लिए तालियां बजाने वाले बच्चे स्कूलों से निराश होकर खाली हाथ लौटने को मजबूर होते थे तो उनसे ज्यादा तकलीफ उनके माता-पिता को होती थी। कोई एक नंबर से मेरिट सूची में आने से चूक जाता था तो कोई दो नंबर से। लेकिन चंद्रसेन सागर ने इस पूरी परंपरा को ही बदल डाला है। उनकी इस पहल के बाद अब हर बच्चे को बनता सम्मान मिलेगा। अगर यह अभियान इसी तरह आगे बढ़ता रहा, तो आने वाले समय में यह न सिर्फ फरीदपुर, बल्कि अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।

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