नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली कैंट विधानसभा सीट पर वर्ष 2027 के चुनावों की आहट अब साफ सुनाई देने लगी है। राजनीतिक दलों के नेता धीरे-धीरे मैदान में सक्रिय हो रहे हैं, लेकिन अगर किसी एक चेहरे की चर्चा इन दिनों सबसे ज्यादा हो रही है तो वह हैं समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और कैंट विधानसभा सीट से पार्टी के टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे डॉ. अनीस बेग। डॉ. अनीस बेग ने अपने प्रचार अभियान को जिस तरह नई धार और नई रफ्तार दी है, उसने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच वह लगातार जनता के बीच पहुंच रहे हैं। हालात यह हैं कि एक दिन में चार से पांच पीडीए पंचायतों का आयोजन और इसके अलावा कई अन्य सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी अब आम बात हो गई है।

डॉ. अनीस बेग का यह अभियान सिर्फ चुनावी सक्रियता तक सीमित नहीं दिखाई देता, बल्कि यह समाजवादी पार्टी की पीडीए राजनीति को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। यही वजह है कि उनके कार्यक्रमों में युवाओं, महिलाओं, पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों की भागीदारी लगातार बढ़ती नजर आ रही है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि बरेली में पीडीए पंचायतों की शुरुआत करने का श्रेय भी डॉ. अनीस बेग को ही जाता है। जब प्रदेश स्तर पर पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समाज को जोड़ने की रणनीति बनाई जा रही थी, तब डॉ. अनीस बेग ने उसे सबसे पहले बरेली कैंट विधानसभा क्षेत्र में जमीन पर उतारने का काम किया। पिछले तीन वर्षों में उन्होंने लगातार मोहल्लों, गलियों और बस्तियों में जाकर समाजवादी पार्टी की नीतियों और राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav के संदेश को लोगों तक पहुंचाने का काम किया।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि जहां कई नेता सिर्फ चुनाव के आसपास सक्रिय दिखाई देते हैं, वहीं डॉ. अनीस बेग लगातार जनता के बीच बने रहे। यही कारण है कि अब कैंट विधानसभा क्षेत्र में उनका एक मजबूत जनसंपर्क नेटवर्क तैयार हो चुका है। रविवार को डॉ. अनीस बेग ने लगातार चार पीडीए पंचायतों में हिस्सा लिया। इन पंचायतों में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। शाम 6 बजे कोट शाहदाना में ताहिर सकलैनी और फैजान बेग के यहां पीडीए पंचायत आयोजित की गई। इसके बाद शाम 7 बजे दूधिया मंदिर, नेकपुर में जयवीर सोनकर के यहां पंचायत हुई। रात 8 बजे कुलाहरा सुभाष नगर में फरजाना के यहां बैठक का आयोजन किया गया और रात 9 बजे पुलिस चौकी के पास बिहारीपुर में कामिल साहब के यहां पीडीए पंचायत हुई। इन सभी कार्यक्रमों में डॉ. अनीस बेग ने लोगों की समस्याएं सुनीं और उन्हें भरोसा दिलाया कि राजनीति का उद्देश्य सिर्फ सत्ता हासिल करना नहीं बल्कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों की आवाज बनना होना चाहिए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉ. अनीस बेग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह सिर्फ भाषण देकर नहीं चले जाते बल्कि लोगों की व्यक्तिगत समस्याओं को भी गंभीरता से सुनते हैं। कई जगहों पर उन्होंने बीमार लोगों की मदद, छात्रों की शिक्षा और गरीब परिवारों की सहायता का भरोसा भी दिया। यही वजह है कि उनकी पंचायतें केवल राजनीतिक बैठकें नहीं रह गई हैं, बल्कि लोगों के दुख-दर्द साझा करने का मंच बनती जा रही हैं।
डॉ. अनीस बेग की राजनीति की एक और खास बात उनकी सामाजिक स्वीकार्यता मानी जा रही है। मंदिरों से लेकर गुरुद्वारों तक और दीपावली से लेकर लोहड़ी तक शायद ही कोई ऐसा अवसर हो, जहां उनकी मौजूदगी नजर न आई हो। वह लगातार सामाजिक सद्भाव और भाईचारे का संदेश देते दिखाई देते हैं। यही वजह है कि अलग-अलग समुदायों के बीच उनकी छवि एक ऐसे नेता की बनती जा रही है जो समाज को जोड़ने की राजनीति करता है। कैंट विधानसभा क्षेत्र के कई बुजुर्गों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह राजनीतिक माहौल में कटुता बढ़ी है, उसके बीच डॉ. अनीस बेग का संयमित और सकारात्मक रवैया लोगों को प्रभावित कर रहा है।

आज के दौर में जहां राजनीति में व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप आम हो चुके हैं, वहीं डॉ. अनीस बेग का अंदाज कुछ अलग दिखाई देता है। उनके भाषणों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, गरीबों की मदद और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे प्रमुखता से नजर आते हैं। वह किसी भी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी पर व्यक्तिगत टिप्पणी करने से बचते हैं, लेकिन सरकार की नीतियों और व्यवस्थागत कमियों पर खुलकर सवाल जरूर उठाते हैं। उनकी सभाओं में अक्सर यह बात सुनने को मिलती है कि व्यवस्था को सिर्फ कोसने से बदलाव नहीं आएगा, बल्कि उसके सुधार के लिए जमीन पर काम करना होगा। यही वजह है कि लोग उन्हें सिर्फ नेता नहीं बल्कि अपने बीच का व्यक्ति मानने लगे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डॉ. अनीस बेग का लगातार मोहल्लों और वार्डों में पहुंचना उन्हें अन्य दावेदारों से अलग बना रहा है। कैंट विधानसभा सीट के लगभग हर इलाके में उनकी सक्रियता दिखाई दे रही है। चाहे पुराना शहर हो, बिहारीपुर, नेकपुर, सुभाष नगर या कोट शाहदाना—हर जगह उनका जनसंपर्क अभियान तेज होता नजर आ रहा है। लोगों के बीच बैठकर संवाद करने की उनकी शैली भी उन्हें खास बनाती है। वह मंच से भाषण देने के बजाय लोगों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनना ज्यादा पसंद करते हैं। यही कारण है कि महिलाएं, युवा और बुजुर्ग उनसे खुलकर अपनी बात कहते दिखाई देते हैं।
डॉ. अनीस बेग की पीडीए पंचायतों में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। युवा वर्ग का कहना है कि वह रोजगार, शिक्षा और तकनीकी सुविधाओं जैसे मुद्दों पर गंभीरता से बात करते हैं। वहीं महिलाएं उन्हें ऐसे नेता के रूप में देख रही हैं जो सम्मान के साथ उनकी समस्याएं सुनते हैं। उनकी टीम भी लगातार सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर सक्रिय दिखाई दे रही है। यही कारण है कि उनका अभियान अब सिर्फ पारंपरिक जनसंपर्क तक सीमित नहीं रह गया बल्कि डिजिटल माध्यमों में भी तेजी से चर्चा का विषय बनता जा रहा है।

बरेली कैंट विधानसभा सीट हमेशा से राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती रही है। यहां जातीय और सामाजिक समीकरण चुनाव परिणामों में बड़ी भूमिका निभाते हैं। ऐसे में पीडीए पंचायतों के माध्यम से पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज को जोड़ने की डॉ. अनीस बेग की रणनीति को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर यही सक्रियता आगे भी जारी रही तो आने वाले समय में कैंट विधानसभा की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल इतना जरूर साफ है कि डॉ. अनीस बेग ने अपने लगातार जनसंपर्क, सकारात्मक राजनीति और पीडीए पंचायतों के जरिए चुनावी माहौल को गर्म कर दिया है। जनता के बीच उनकी बढ़ती मौजूदगी यह संकेत दे रही है कि वह सिर्फ टिकट के दावेदार नहीं बल्कि कैंट विधानसभा की राजनीति में एक मजबूत और प्रभावशाली चेहरा बनकर उभर रहे हैं।




