नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली नगर निगम में एक बार फिर पेड़ों की कटाई और पर्यावरण संरक्षण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा के वरिष्ठ पार्षद एवं बरेली शहर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट के प्रबल दावेदार सतीश चंद्र सक्सेना ‘कातिब’ उर्फ मम्मा ने नगर निगम के पर्यावरण अभियंता पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। मम्मा का आरोप है कि राजेंद्र नगर ए ब्लॉक स्थित रजत टेंट हाउस के पास एक हरे-भरे विशाल आम के पेड़ को बिना वन विभाग की अनुमति और बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए कटवा दिया गया। इतना ही नहीं, इस दौरान बिजली विभाग से शटडाउन भी नहीं लिया गया, जिसके चलते बिजली का खंभा गिर गया और पूरे इलाके की विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई।
सतीश चंद्र सक्सेना ने शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि उन्हें सुबह स्थानीय लोगों ने फोन और व्हाट्सएप के माध्यम से सूचना दी कि राजेंद्र नगर ए ब्लॉक में सड़क किनारे लगा विशाल आम का पेड़ काटा जा रहा है। सूचना मिलते ही वह मौके पर पहुंचे। वहां मौजूद लोगों ने उन्हें वीडियो भी उपलब्ध कराए, जिनमें पेड़ की कटाई होती दिखाई दे रही है। उनका आरोप है कि मौके पर न तो वन विभाग का कोई अधिकारी मौजूद था और न ही नगर निगम का कोई जिम्मेदार अधिकारी। पेड़ काट रहे निजी व्यक्ति के पास भी किसी प्रकार की विभागीय अनुमति नहीं थी।
भाजपा पार्षद का कहना है कि स्थानीय निवासियों ने पेड़ कटवाने की अनुमति संबंधी दस्तावेज मांगे, लेकिन पेड़ काट रहे व्यक्ति कोई अनुमति पत्र नहीं दिखा सके। इसके अलावा बिजली विभाग से भी शटडाउन नहीं लिया गया था। नतीजा यह हुआ कि पेड़ की भारी शाखाएं बिजली के तारों और खंभे पर गिर गईं, जिससे बिजली का खंभा धराशायी हो गया और पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। गर्मी के मौसम में कई घंटों तक बिजली बाधित रहने से स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
सतीश चंद्र सक्सेना ने आरोप लगाया कि उन्होंने घटना की जानकारी तत्काल नगर आयुक्त को फोन पर दी और पूरी स्थिति से अवगत कराया। साथ ही नगर निगम के पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी को भी कई बार फोन किया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया और बाद में भी कोई जवाब नहीं दिया। मम्मा ने इसे अधिकारियों की लापरवाही बताते हुए कहा कि यदि समय रहते जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचते तो इस तरह की स्थिति नहीं बनती।

प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने यह भी दावा किया कि पर्यावरण अभियंता की कार्यशैली पहले भी सवालों के घेरे में रही है। उन्होंने बताया कि अपने वार्ड संख्या-23 इंदिरा नगर में वर्षों पुराने और खतरनाक हो चुके पेड़ों की वैज्ञानिक छंटाई के लिए वह पिछले वर्ष से लगातार पत्राचार कर रहे हैं। मार्च 2026 में वन विभाग ने 58 पेड़ों की छंटाई की अनुमति देते हुए इसके लिए 2,900 रुपये नगर निगम से जमा कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन कई बार याद दिलाने के बावजूद यह राशि जमा नहीं कराई गई।
मम्मा ने दावा किया कि इस संबंध में उन्होंने नगर आयुक्त से भी शिकायत की थी। यहां तक कि उपसभापति चुनाव के दौरान उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह मुद्दा उठाते हुए महापौर को प्रतीकात्मक रूप से 2,900 रुपये भी देने की कोशिश की थी, ताकि नगर निगम यदि राशि जमा नहीं कर पा रहा है तो वह स्वयं यह भुगतान कर दें। उनके अनुसार महापौर ने पैसे लेने से इनकार करते हुए पर्यावरण अभियंता को तत्काल राशि जमा कराकर पेड़ों की छंटाई कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन आज तक उन निर्देशों का पालन नहीं किया गया।

भाजपा पार्षद ने आरोप लगाया कि जिन पेड़ों की विधिवत छंटाई होनी चाहिए थी, उनकी अनदेखी की गई, जबकि दूसरी ओर बिना किसी अनुमति के एक पूरी तरह हरे-भरे आम के पेड़ को कटवा दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पेड़ की लकड़ी मौके से गायब कर दी गई। उन्होंने आशंका जताई कि लकड़ी को निजी लाभ के लिए बेचा गया होगा। हालांकि इस संबंध में उन्होंने कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
सतीश चंद्र सक्सेना ने नगर आयुक्त से मांग की है कि यह स्पष्ट किया जाए कि वन विभाग द्वारा निर्धारित 2,900 रुपये की राशि आखिर कब जमा की गई, यदि की गई तो उसका रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि किस अधिकारी की अनुमति से आम के पेड़ की कटाई कराई गई और यदि अनुमति नहीं थी तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।
भाजपा के वरिष्ठ पार्षद ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल भाषणों का विषय नहीं होना चाहिए, बल्कि सरकारी अधिकारियों को भी नियमों का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि नगर निगम के अधिकारी ही पर्यावरण संरक्षण के नियमों की अनदेखी करेंगे तो आम जनता में गलत संदेश जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई तो वह इस मुद्दे को जनहित का विषय बनाकर आगे भी उठाते रहेंगे।

नगर निगम प्रशासन की ओर से समाचार लिखे जाने तक इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। यदि प्रशासन या संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।




