उत्तराखंड

ट्रॉमा सेंटर चालू होता तो बच सकती थीं पांच जिंदगियां

राजेंद्र भंडारी, टनकपुर 

माता पूर्णागिरि के आ रहे यात्रियों को कल एक डम्पर ने कुचल दियाा. कुछ यात्रियों को बचाया जा सकता था किंतु अस्पताल में कोई जीवन रक्षक सामान यहां तक कि ऑक्सीजन भी नहीं थी और उनके परिजन इस काउंटर से उस काउंटर दौड़ते रहे. घायल एक एक कर दम तोड़ रहे थे. अगर टनकपुर का ट्रॉमा सेंटर चालू हालत में होता तो पांच लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती थी.

दरअसल, एसडीएम अनिल कुमार चन्याल के अनुसार कल के हादसे में मौके पर छह लोगों की मौत हुई थी. तीन लोगों ने टनकपुर सरकारी अस्पताल में दम तोड़ा था तो दो लोगों ने हायर सेंटर ले जाते वक्त रास्ते में दम तोड़ा था. ऐसे में अगर टनकपुर का ट्रॉमा सेंटर चालू होता तो शायद इन पांच की जिंदगी बच सकती थी.

अस्पताल में खड़े लोग और परिजन मायूस होकर घायलो की आंखें बंद होते देखने को मजबूर थे. आपको बताते चलें कि तब लोगों को करोड़ों रुपये से बने ट्रॉमा सेंटर की याद आ रही थी जो लोगों को मुंह चिढ़ा रहा है. इसे  विभाग को ट्रांसफर होने के बाद भी चालू नहीं किया जा सका है. ‘सफेद हाथी बना टनकपुर का ट्रॉमा सेंटर’ शीर्षक से ‘इंडिया टाइम 24’ ने इस ट्रॉमा सेंटर की खबर 15 मई को प्रकाशित कर प्रशासन को इस संबंध में चेताया भी था लेकिन विभागीय आला अधिकारियों ने कोई पहल करने का प्रयास नहीं किया. नतीजतन कल के हादसे में गंभीर घायल पांच जिंदगियों को नहीं बचाया जा सका. अब जनता का धैर्य जवाब दे गया है. सोशल मीडिया में जो कल से जनता का विरोध चल रहा है उसको देखते हुए लगता है कि जल्द ही ट्रामा सेंटर और अस्पताल की कमियों को देखते हुए किसी बड़े आंदोलन की तैयारी है.

ठीक उसी तरह के आंदोलन कि जैसा कि गत दिनों सेंट फ्रांसिस स्कूल के छात्र की मौत के बाद हुआ था. जब अभिभावकों ने खुद मोर्चा संभाला था और सड़कों पर उतर आए थे. अगर ऐसा हुआ तो यह प्रशासन और स्थानीय सांसद व विधायक के लिये बेहद शर्मनाक होगा.

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