पंजाब

पानी के मसले पर नियमों और जनहित से खिलवाड़ न करें मेयर राजा : मोहिंदर भगत

नीरज सिसौदिया, जालंधर
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों और गिरते भूजल स्तर के चलते भविष्य में जल संकट की संभावनाओं को दरकिनार कर नए ट्यूबवेल के प्रस्ताव पास करने के नगर निगम की फाइनेंस एंड कॉन्ट्रैक्ट कमेटी के फैसले को पंजाब प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष मोहिंदर भगत ने गलत करार दिया है| उन्होंने मेयर जगदीश राज राजा को नियमों और जनहित से खिलवाड़ न करने की नसीहत दी है|
इंडिया टाइम 24 से खास बातचीत में मोहिंदर भगत ने कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने जो निर्देश दिए हैं वह जालंधर के भविष्य को देखते हुए दिए गए हैं| अगर इन निर्देशों का उल्लंघन होता है तो यह सीधे-सीधे ट्रिब्यूनल की अवमानना है| उन्होंने कहा कि नगर निगम के कमिश्नर जो कि एक आईएएस अधिकारी हैं उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ट्रिब्यूनल के आदेशों का पूरी तरह से पालन किया जाए, उसका सम्मान किया जााए | उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि कत्ल करने वाले से यह बताने की जरूरत नहीं होती कि कत्ल मत करो, यह गलत है। उसे खुद भी पता होता है कि कत्ल करना गुनाह है और इसकी सजा भी मिल सकती है| ऐसे में नियम तोड़ने वालों की यह जिम्मेदारी बनती है कि नियम ना तोड़े जाएं।
बता दें कि नियमों को ताक पर रखकर डार्क जोन में होने के बावजूद जालंधर में नए ट्यूबवेल लगाने के प्रस्ताव नगर निगम की एफएंडसीसी की मीटिंग में पास कर दिए गए| अब अगर यह ट्यूबवेल लगाए जाते हैं तो जालंधर का भूजल स्तर और भी नीचे पहुंच जाएगा|
इसके चलते भविष्य में जल संकट की स्थिति पूरे शहर में और भी विकराल हो जाएगी| द वाटर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ पॉल्यूशन एक्ट 1977 भी इसकी इजाजत नहीं देता है।
बता दें कि जालंधर में भूजल स्तर पहले ही लगभग 140 फुट से भी नीचे पहुंच चुका है जिसके चलते पहले ही कई इलाके जल संकट से जूझ रहे हैं| बात अगर पंजाब की करें तो हर साल तीन से चार फीट तक भूजल स्तर गिर रहा है| प्रदेश के 112 ब्लॉकों में 300 फीट से भी नीचे भूजल स्तर गिर चुका है जिस कारण यहां सिंचाई के लिए ट्यूबवेल बोरिंग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है|

इसी की दुहाई देकर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र सरकार से पंजाब को छह हजार करोड़ रुपए की बहुद्देश्यीय योजना में शामिल करने की मांग की थी जिसे स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार ने पंजाब को योजना में शामिल भी कर लिया था. इसके बावजूद मेयर जगदीश राज राजा मामले की गंभीरता को नहीं समझ पा रहे हैं और नये ट्यूबवैल लगाने पर तुले हुए हैं.

प्रदेश भर में लगभग 1400000 से भी अधिक ट्यूबवैल चल रहे हैं और लगभग 50000 ट्यूबवेलों के प्रस्ताव लंबित पड़े हैं| इतना ही नहीं शहरों को पानी सप्लाई करने वाले लगभग दो लाख ट्यूबेल दम तोड़ने लगे हैं और जलापूर्ति भी ठप होने लगी है| ऐसे में नगर निगम की ओर से नए ट्यूबवेल लगाना कितना कारगर साबित होगा इस पर सवाल उठने लगे हैं|

जल संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्य कर रही संस्था नीर फाउंडेश के निदेशक रमन कांत कहते हैं कि जिन इलाकों में जमीन में पानी की खपत की तुलना में उनका दोहन अधिक होता है उन्हें डार्क जोन में शामिल किया जाता है| जालंधर डार्क जोन में पहले ही शामिल किया जा चुका है| अब अगर नये ट्यूबवेल लगाये जायेंगे तो भविष्य में जलसंकट और भी विकराल रूप धारण कर सकता है। वह कहते हैं कि कई स्थानों पर ऐसा भी देखा गया है कि जहां नये ट्यूबवेल लगाये गये हैं वहां पास के इलाकों में लगे ट्यूबवेल बंद हो चुके हैं। जालंधर में भी ऐसी संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले उनकी संस्था ने मानसा जिले में भी ग्राउंड वाटर पर काफी काम किया था। जालंधर में भी हालात बेकाबू न हों इसका ध्यान रखा जाना चाहिये।

पर्याणविद् व वनस्पति विज्ञानी आदर्श पांडे कहते हैं कि भूगर्भ जल का पहला स्टेटा 90 से 110 फुट का होता है जिससे ड्रिंकिंग वाटर सप्लाई किया जाता है| जालंधर में यह पहला स्टेटा पूरी तरह से सूख चुका है| दूसरा स्टेटा 140 से 160 फुट तक का होता है जिसका उपयोग सिर्फ सिंचाई के लिए किया जा सकता है| जालंधर में अब उस स्टेटस का पानी लोगों को पीने के लिए दिया जा रहा है जो सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसी ही स्थिति दिल्ली में उत्पन्न हुई थी और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से वहां सभी अवैध कीबोर्ड बंद करने के निर्देश सरकार को दिए गए थे| वहां के पानी में हानिकारक केमिकल आ रहे थे जिससे कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा था| अब ऐसे ही हालात जालंधर में भी पैदा होने जा रहे हैं| दूरदर्शिता का परिचय देते हुए एफएंडसीसी की बैठक में नए ट्यूबवेल के प्रस्ताव को पास कर दिए गए लेकिन इनका प्रभाव भविष्य पर क्या पड़ेगा इस पर कोई विचार नहीं किया गया| सूत्र बताते हैं कि एक विधायक के करीबी को फायदा पहुंचाने के लिए सारे नियम कानून और जनहित की अनदेखी कर प्रस्ताव पास कर दिए गए हैं| जल्दी ही इन पर काम शुरू कराने की भी योजना है|

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