झारखण्ड

आज भी दर्द से तड़प उठती है संगीता, 2 वर्ष दरिंदगी एवं हैवानियत की हद पार करता रहा अफसर

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रामचंद्र कुमार अंजाना, बोकारो थर्मल
आर्थिक तंगी एवं गरीबी के कारण झारखंड से देश के अन्य राज्यों वमें घरेलू कामों के लिए ले जायी जाने वाली लड़कियों एवं महिलाओं के साथ मारपीट,उन्हें शारीरिक,मानसिक एवं आर्थिक रुप से प्रताड़ित करने की लगातार घ़टनायें प्रकाश में आती हैं बावजूद उस पर रोक लगने की बजाय ऐसी घटनाओं में बढ़ोतरी देखने को मिलती है।ऐसा ही एक मामला गोमिया थाना के स्वांग न्यू माईनस निवासी सैलून की दुकान चलाने वाले छोटेलाल ठाकुर एवं पंजा देवी की 23 वर्षीय विवाहिता पुत्री संगीता के साथ घटी । जिसे याद करके आज दो माह बाद भी संगीता रातों को सोये हुए दर्द एवं भय से चीख पड़ती है। उसके पूरे शरीर पर मार,कटे एवं जलाये गये के निशान तथा जख्म उसके साथ किये गये ज्यादतियों की कहानी खुद बयां करते हैं।

जख्मों के निशान दिखाती संगीता

स्वांग न्यू माइंस निवासी संगीता को गोमिया स्थित जीवन बीमा निगम के डीओ सुनील प्रसाद ने आईईएल स्थित अपने मकान में बीमार पत्नी की देखभाल करने तथा खाना बनाने के लिए संगीता के मामा राजेश्वर ठाकुर से बात कर विगत 7 दिसंबर 2016 को ले गया था। काम के बदले संगीता को खाना के अलावा आठ हजार रुपया देने की बात कही थी।बाद में डीओ सुनील प्रसाद ने संगीता को अपने कदमकुंआ स्थित ससुराल अपनी बीमार पत्नी की देखभाल के लिए बिना परिजनों को जानकारी दिये भेज दिया था।

पटना में आरंभ हुआ संगीता पर यातनाओं का सिलसिला

स्वांग स्थित अपने पिता के आवास पर संगीता ने गुरुवार को पत्रकारों को घटना के बारे में पूरी जानकारी देते हुए बताया कि एलआईसी डीओ सुनील प्रसाद द्वारा संगीता को पटना स्थित अपने ससुराल भेजे जाने के बाद उस पर यातनाओं का सिलसिला आरंभ हो गया। संगीता से पटना में घर का सारा काम करवाने के अलावा खाना बनाने का भी काम लिया जाता था। काम के बदले उसे भरपेट भोजन नहीं दिया जाता था।खाना मांगने पर उसे बुरी तरह से लात एवं घूसों से मारा जाता था।उसके शरीर को चाकुओं से गोदा एवं कई स्थानों पर गर्म झंझरा एवं लोहे से दागने का सिलसिला सुनील प्रसाद,उसकी साली मिक्की कुमारी के द्वारा आरंभ कर दिया गया था।संगीता ने रोते हुए बताया कि घरेलू काम एवं भूख की वजह से एक बार रात में उसने एक रोटी चुराकर खायी थी जिसे सुनील प्रसाद की साली मिक्की कुमारी ने देख लिया था।उस घटना के बाद से संगीता को रातों को हाथ पीछेकर हाथ एवं पैर बांध दिया जाता था तथा बदन के सारे कपड़े उतार दिये जाते थे।इसके पूर्व ठंड में उसे रात के एक दो बजे ठंडे पानी से नहाने को विवश किया जाता था। कभी-कभी उसे पूरे बदन एवं पैरों के तलवे में मिर्च के पाउडर का लेप लगा दिया जाता था जिसके कारण सारी रात वह जलन से परेशान रहा करती थी। संगीता कहती है कि उसके बायें पैर को गर्म तेल से जला दिया गया था। कई बार उसके शरीर एवं अंगों के साथ डीओ सुनील प्रसाद ने छेड़छाड़ भी की थी। घटना के बारे में परिजनों को सूचना नहीं दिये जाने के प्रश्न पर संगीता का कहना था कि उसका मोबाईल उन लोगों ने जब्त कर लिया था तथा बार-बार कहते थे कि घटना के बारे में किसी भी परिजन को सूचना दी या बताया तो तेरे साथ सभी काे जान से मार देंगे तथा सभी पर केस दर्ज कर जेल भिजवा देंगे।

क्या-क्या करता था पुलिस वाला लड़की के साथ, देखें वीडियो…

लगातार दी जा रही थी दवा एवं इंजेक्शन

संगीता ने कहा कि सुनील प्रसाद एवं उसकी साली उसे लगातार ओवरल एवं लोपामेट नामक दवा खिलाते थे तथा नींद का इंजेक्शन देते थे जिसके कारण वह सारी रात सोते रहते थी।जबरन दवा खिलाने से संगीता का एमसी विगत् छह माह से भी ज्यादा समय से रुका हुआ है और उसके पेट में जोरों का दर्द होता है।संगीता कहती है कि उसे डीओ सुनील प्रसाद ने विगत् मई माह में जबरन फिनाईल पिला दिया था तथा बाद में काफी मात्रा में नमक खिलाकर उल्टी करवाया।आर्थिक तंगी के कारण पटना से आने के बाद संगीता के माता पिता उसका ईलाज करवा पाने में अपने को असमर्थ महसूस कर रहे हैं।

एलआईसी डीओ के दोस्त ने किया दुष्कर्म

संगीता कहती है कि पटना में सुनील प्रसाद के एक दोस्त ने उसके ही घर में उसके साथ सारे कपड़े उतारकर दुष्कर्म किया था. संगीता के माता पिता को जब अपनी पुत्री की खोज खबर नहीं मिली तो उन्होंने 5 जून को गोमिया थाना में कांड संख्या 72/2018 भादवि की धारा 376,366,342,504,120बी के तहत प्राथमिकी दर्ज कर कांड का अनुसंधानक सअनि रमेश हांसदा को बनाया गया था।दर्ज प्राथमिकी दर्ज के आधार पर बेरमो के एसडीपीओ ने पटना के कदमकुंआ पुलिस से संपर्क किया।पुलिस के दबाव पर संगीता को सुनील प्रसाद ने गोमिया लाकर पुलिस के हवाले किया था।जिस समय संगीता को गोमिया लाया गया उस समय उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी।मामले में अनुसंधानक रमेश हांसदा का कहना था कि संगीता ने भादवि की धारा 164 के तहत बेरमो सिविल कोर्ट दंडाधिकारी के समक्ष जो बयान कलमबद्ध करवाया था उसमें अपने साथ किसी भी प्रकार की ज्यादती की बात नहीं कही थी।संगीता का मेडिकल जांच करवाये बिना 164 के तहत बयान करवाने के संबंध में अनुसंधानकर्ता का कहना था कि संगीता बालिक थी इसलिए उसका मेडिकल जांच नहीं करवाया गया और कोर्ट में बयान करवा दिया गया।उनका कहना था कि मामले में वरीय अधिकारी के निर्देश पर आरोप पत्र समर्पित कर दिया गया है और साक्ष्य के अभाव में आरोपियों पर आरोप तय नहीं हो पाया है।

डीओ का प़क्ष

इस संबंध में डीओ सुनील प्रसाद का कहना था कि 8 हजार रुपया मासिक पर संगीता को काम करने के लिए ले गया था।प्रत्येक माह संगीता की मां रुपया ले जाती थी जिसका लिखा हुआ है।उन्होंने कहा कि संगीता को उसकी मां ही प्रताड़ित करती रही है जिसके कारण वह मां के पास घर जाना नहीं चाहती थी।परंतु जब बात बढ़ी तो उसने खुद ही लड़की को लाकर सौंप दिया था।उसने कहा कि वह संगीता को उसके मामा राजेश्वर ठाकुर के कहने पर ले गया था।उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी प्रकार के आरोपों को गलत बताया।

पहले भी लगे हैं डीओ इस प्रकार के आरोप

वर्ष 2016 में आईईएल थाना के खंभरा बस्ती निवासी एक नाबालिग लड़की के साथ भी उक्त डीओ एवं उसके परिजनों के द्वारा पटना में इसी प्रकार के मारपीट एवं प्रताड़ित करने के मामले को लेकर परिजनों की शिकायत पर कांड संख्या 10/2016 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
स्वांग दक्षिणी के मुखिया धनंजय सिंह ने इस मामले में कहा कि संगीता की मां के द्वारा घटना की जानकारी मिलने के बाद बेरमो के एसडीपीओ एससी जाट से मिलकर मामले की जानकारी दी तथा एसडीपीओ की पहल एवं अथक प्रयास से संगीता को डीओ सुनील प्रसाद के आवास से गामिया लाया जा सका था।उन्होंने कहा कि डीओ सुनील प्रसाद पर पहले भी इस प्रकार के आरोप वर्ष 2016 में लगाये गये थे जब उसने घर में काम करने वाली एक नाबालिग आदिवासी लड़की को प्रताड़ित किया था।

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