पंजाब

डॉग कंपाउंड गाड़ी देने गए ओबरॉय हुए जख्मी, चार दिन अस्पताल में रहे भर्ती पर मेयर राजा ने हाल तक नहीं पूछा

नीरज सिसौदिया, जालंधर
सत्ता के खेल भी बड़े निराले होते हैं. जब कुर्सी हो तो हर कोई सलाम करता है और जब कुर्सी छिन जाए तो सारी नैतिकता धरी की धरी रह जाती है. बात जब सत्ता के नशे में धुत सियासतदान की हो तो नैतिकता की बात ही बेमानी हो जाती है. इसका जीता जागता उदाहरण जालंधर के मेयर जगदीश राज राजा के रूप में देखा जा सकता है. यह किस्सा राजा और पूर्व डिप्टी मेयर के पति कुलदीप सिंह ओबरॉय का है.
दरअसल, सुनील ज्योति जब मेयर थे तो उन्होंने कुलदीप सिंह ओबरॉय का वर्षों पुराना डॉग प्रोजेक्ट का सपना चकनाचूर कर दिया था. उस वक्त राजा ओबरॉय के साथ कदम से कदम मिलाते नजर आए थे. राजा ने यहां तक कह दिया था कि अगर वह मेयर होते तो ओबरॉय को ही यह प्रोजेक्ट देते. वक्त बदला और राजा मेयर की कुर्सी पर काबिज हो गए. ओबरॉय का सपना अब चकनाचूर हो चुका था बस यादों के रूप में वो गाड़ी ओबरॉय के पास रह गई थी जिसे उन्होंने प्रोजेक्ट के लिए खरीदा था. कुछ दिन पहले ओबरॉय वो गाड़ी वापस करने नंगलशामा के डॉग कंपाउंड पहुंचे. वहां डॉक्टर राजकमल को गाड़ी सौंपी और लौटने लगे थे. इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वह जमीन पर गिर गए. उनके शरीर में चार जगह फ्रेक्चर हो गया और वह बेहोश हो गए. किसी तरह उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. 12 जून से 16 जून तक ओबरॉय अस्पताल में भर्ती रहे. इस दौरान निगम अधिकारी डॉ राजकमल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता बलराज ठाकुर सहित कई लोग कुलदीप ओबरॉय का हाल जानने पहुंचे लेकिन सूत्र बताते हैं कि मेयर राजा ने उन्हें फोन तक करना मुनासिब नहीं समझा.

ये वही ओबरॉय थे जिनकी पत्नी डिप्टी मेयर थीं और वह खुद कई बार लगातार पार्षद भी रहे. और ये वही राजा हैं जो उनके डिप्टी मेयर पद के कार्यकाल में नैतिकता और मानवता की बातें करते नहीं थकते थे. लोगों का कहना है कि वैसे भले ही राजा ओबरॉय का हाल पूछें या न पूछें यह उनका निजी मामला है लेकिन ओबरॉय निगम के काम से डॉग कंपाउंड गए थे और वहां घायल हो गए इसलिए उन्हें ओबरॉय का हालचाल नैतिकता के आधार पर जरूर पूछना चाहिए था. यह उनका कर्तव्य भी था. राजा साहब सत्ता के खेल में कब कौन राजा बन जाए कुछ पता नहीं होता, इसलिए इतनी खुमारी अच्छी नहीं. इस संबंध में जब मेयर जगदीश राज राजा से बात करने का प्रयास किया गया तो उनसे संपर्क नहीं हो सका. वहीं कुलदीप सिंह ओबरॉय ने इस संबंध में कुछ भी कहने से इंकार कर दिया.

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