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दो सीटों से ठोकी ताल, शहर विधायक की खोली पोल, राजेश अग्रवाल से क्यों हैं बेहतर, पढ़ें सपा नेता विष्णु शर्मा का बेबाक इंटरव्यू

समाजवादी पार्टी के युवा नेता विष्णु शर्मा ने कैंट और शहर दोनों ही विधानसभा सीटों से टिकट के लिए दावेदारी की है. उन्हें यकीन है कि पार्टी उन्हें जिस भी सीट से मैदान में उतारेगी वह जीतकर ही आएंगे. इसकी क्या वजह है? शहर विधानसभा सीट पर वरिष्ठ सपा नेता राजेश अग्रवाल भी दावेदारी जता रहे हैं. ऐसे में विष्णु शर्मा को टिकट क्यों दिया जाना चाहिए? वर्तमान शहर विधायक डा. अरुण कुमार के कार्यकाल को वह किस नजरिये से देखते हैं? विष्णु शर्मा का कांग्रेस में एक बड़ा कद था. खुद प्रदेश अध्यक्ष उनके घर आए थे. फिर कांग्रेस छोड़कर सपा में शामिल होने की क्या वजह रही? वह किन मुद्दों पर चुनाव लड़ना चाहते हैं? ऐसे कई बिंदुओं पर युवा सपा नेता विष्णु शर्मा ने इंडिया टाइम 24 के संपादक नीरज सिसौदिया से खुलकर बात की. पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश…
सवाल : आप मूलरूप से कहां के रहने वाले हैं, पारिवारिक पृष्ठभूमि क्या रही?
जवाब : मेरे दादा पंडित किशन्नी महाराज पहलवान बरेली शहर की फेमस पर्सनालिटी हैं. आज भी उनके नाम से लोग हमें और हमारे परिवार को जानते हैं. हमारा पुश्तैनी कारोबार डेयरी और खेती का था. मूल रूप से मैं बरेली का रहने वाला हूं मेरा जन्म गुलाब नगर स्थित चाहबाई मोहल्ले में हुआ था. आज भी हमारा पुश्तैनी मकान वहीं है. फन सिटी के पास खजुरिया घाट नाम का एक गांव है जहां हमारा फार्म है, वहां हमारा खेती और डेयरी का काम आज भी चलता है. हम चार भाई-बहन हैं. दो बहनें मुझसे बड़ी हैं और एक मेरा छोटा भाई है जो नोएडा की एक प्रतिष्ठित कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर है. मेरे पिता राम हरि शर्मा राजनीति में भी सक्रिय रहते थे और भूमि विकास बैंक के 10 साल तक लगातार अध्यक्ष भी रहे. उन्होंने पूर्व सांसद हरीश गंगवार को हराया था.
सवाल : आपकी पढ़ाई लिखाई कहां से हुई?
जवाब : मेरी प्राथमिक शिक्षा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्कूलों में हुई. पहले सरस्वती शिशु मंदिर और फिर विद्या मंदिर में मैंने पढ़ाई की. 9वीं से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई मैंने राजकीय इंटर कॉलेज से की. फिर इनवर्टिस यूनिवर्सिटी से बीसीए किया और केसीएमटी से एमबीए पास किया.
सवाल : करियर की शुरुआत कब हुई?
सवाल : वर्ष 2004 में एजुकेशन पूरी करने के बाद 2005 में मैंने बीमा कंपनी में नौकरी शुरू की. वर्ष 2011 तक मैंने बीमा कंपनियों में नौकरी की. उसके बाद अपना व्यवसाय खड़ा करने का प्रयास किया. शुरुआती एक साल में मुझे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. एक वक्त तो ऐसा आया था जब खर्च चलाना तक मुश्किल हो गया था. सेविंग्स खत्म हो चुकी थीं और पुश्तैनी कारोबार भी घाटे में चल रहा था. इसलिए वहां से भी मुझे कोई सपोर्ट नहीं मिल पा रहा था. मैंने बहुत संघर्ष किया और वर्ष 2014 आते-आते मेरी कंपनी रियालिटी एडवाइजर बरेली के टॉप मोस्ट ब्रांड में शामिल हो चुकी थी. अब मैं अच्छा काम कर रहा हूं.

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ विष्णु शर्मा.

सवाल : जब आपका प्रॉपर्टी का काम अच्छा चलने लगा था तो फिर राजनीति के दलदल में आने की जरूरत क्यों पड़ी?
जवाब : मेरे राजनीति में आने के पीछे भी एक बड़ी वजह रही. मैं राजनीति में नहीं आना चाहता था लेकिन हालातों के हाथों मजबूर होकर मुझे आना पड़ा. यह उस दौर की बात है जब प्रदेश में भाजपा की सरकार नहीं थी. भूमि विकास बैंक के चुनाव हो रहे थे. मेरे पिता जब नामांकन कराने जा रहे थे तो एक बड़े राजनेता ने हम लोगों पर हमला करवा दिया ताकि मेरे पिता नामांकन न करा सकें. उस वक्त प्रदेश में सरकार भी उसी राजनेता की पार्टी की थी इसलिए हमें कहीं से भी कोई सपोर्ट नहीं मिला. मैं जुल्म सहने के बाद भी मन मसोस कर रह गया तो मुझे लगा कि हमें इसका जवाब इन्हीं की भाषा में देना चाहिए. यही वजह रही कि वर्ष 2015 में राजनीति के इस दलदल में उतरने को मैं मजबूर हो गया और कांग्रेस का हिस्सा बना.
सवाल : आपने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत कांग्रेस से की थी. कांग्रेस में आपको उचित सम्मान भी मिल रहा था, खुद प्रदेश अध्यक्ष तक आपके घर आए थे. फिर ऐसी क्या वजह रही कि आपने कांग्रेस को अलविदा कह दिया?
जवाब : जब पिछले साल लॉकडाउन लगा था तो मैंने मोदी जी का काफी विरोध किया था जिसके चलते मुझे एक साजिश के तहत भाजपा नेताओं ने जेल में डाल दिया था. मैं प्रियंका गांधी जी का बहुत आभारी हूं कि जब उनके संज्ञान में यह मामला आया तो उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू को मेरे घर भेजा लेकिन वर्तमान में प्रदेश और जिले में जो राजनीतिक माहौल है उसे देखते हुए मुझे लगा कि भाजपा को हराने के लिए एक मजबूत ताकत की जरूरत है. मेरा उद्देश्य मोदी व योगी द्वारा जो सांप्रदायिक उन्माद फैलाया जा रहा है उसे रोकना था तो उसे रोकने के लिए मुझे अखिलेश जी से बेहतर शख्सियत कोई नजर नहीं आई. इसके अलावा अखिलेश जी द्वारा जिले और प्रदेश में कराए गए विकास कार्यों से मैं बहुत प्रभावित था तो सांप्रदायिक ताकतों को रोकने एवं जिले एवं प्रदेश के विकास के लिए मैंने अखिलेश यादव के साथ आने का निर्णय लिया.
सवाल : विधानसभा चुनाव आने वाले हैं. आपने कैंट विधानसभा क्षेत्र और शहर विधानसभा क्षेत्र दोनों ही सीटों से टिकट के लिए दावेदारी की है. दो सीटों से दावेदारी करने का क्या औचित्य है?
जवाब : देखिए आज की तारीख में कहीं न कहीं राजनीति में समीकरण बहुत मायने रखते हैं. चाहे वह जातिगत समीकरण हों, विकास के समीकरण हों या किसी और तरह के समीकरण हों. चूंकि मैं ब्राह्मण समुदाय से बिलॉन्ग करता हूं और कैंट व शहर विधानसभा सीट ऐसी विधानसभा सीट है जो ब्राह्मण बाहुल्य विधानसभा क्षेत्र हैं इसलिए मैंने दोनों सीटों से दावेदारी की.

साथियों के साथ सपा में शामिल हुए थे विष्णु शर्मा

सवाल : ब्राह्मण बाहुल्य आप कैसे कह सकते हैं जबकि कैंट में बनिया और शहर में कायस्थ वोट सबसे ज्यादा हैं?
जवाब : आपकी यह गणना पुरानी कैलकुलेशन के आधार पर है. जो आज की स्थिति है उसमें कैंट में सबसे ज्यादा ब्राह्मण वोट हैं और शहर विधानसभा क्षेत्र में भी कायस्थ एवं बनिया वोटों के लगभग बराबर ही ब्राह्मण वोट हैं.
सवाल : आपको नहीं लगता कि आप जातिवादी राजनीति को बढ़ावा दे रहे हैं कि ब्राह्मण वोट ज्यादा है तो ब्राह्मण चुनाव लड़ जाए?
जवाब : देखिए मैं जातिवादी राजनीति करने बिल्कुल भी नहीं आया हूं मगर राजनीति में आने के बाद मैंने सीखा कि सामने वाला शत्रु आप पर जिस शस्त्र से वार कर रहा है आपको पहले उससे अपना बचाव करना है और फिर उसी शस्त्र से उसका जवाब देना है. क्योंकि मेरा मुकाबला भाजपा से है और भाजपा ने शुरू से ही जाति और धर्म की राजनीति की है इसलिए मुझे भी इसका सहारा लेना पड़ रहा है. आज हर प्रदेश में पार्टी इसी हिसाब से टिकट देती है. मेरा जो उद्देश्य है वह जातिवाद के साथ-साथ युवाओं को साधने का, विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने का था, इसलिए मैंने शहर और कैंट दोनों सीटों से दावेदारी की.
सवाल : शहर विधानसभा क्षेत्र से राजेश अग्रवाल जैसे वरिष्ठ सभासद भी दावेदार हैं. ऐसे में आपके अंदर ऐसा क्या है कि पार्टी आपको टिकट दे?
जवाब : देखिए मैं युवा होने के साथ-साथ शिक्षित भी हूं. देश, प्रदेश और जिले के हर मुद्दे की गहराई से समझ रखता हूं. जनता के लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा है इसकी समझ मुझे है. राजेश जी एक बेहतर दावेदार हैं, मुझसे सीनियर हैं, मैं दिल से उनकी इज्जत करता हूं लेकिन हर पार्टी आज युवा सोच को बढ़ावा दे रही है. बंगाल और असम को ही देख लीजिए. वहां 70 परसेंट टिकट 45 वर्ष से कम उम्र वालों को ही दिया गया है तो मुझे उम्मीद है कि अखिलेश जी मेरी समझ, मेरे जोश और मेरी सोच को देखते हुए मुझे टिकट देंगे.
सवाल : अगर पार्टी आपको टिकट देती है तो आप के मुद्दे क्या होंगे?
जवाब : मेरा पहला मुद्दा सांप्रदायिकता का जो जहर लोगों के दिमाग में भाजपा द्वारा भरा गया है उसे निकालना होगा. जब तक लोगों के दिमाग से यह शहर नहीं निकलेगा तब तक उनका ध्यान रोजगार स्वास्थ्य शिक्षा और अन्य मुद्दों पर नहीं जाएगा. उसके बाद बरेली को नोएडा की तर्ज पर एक इंडस्ट्रियल हब बनाना चाहता हूं ताकि यहां के युवा रोजगार के लिए मेट्रो सिटीज की ओर पलायन न करें.
सवाल : वर्तमान शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार के कार्यकाल को आप किस नजरिए से देखते हैं?
जवाब : आज लोगों ने यह मानसिकता बना रखी है कि विधायक डेवलपमेंट करे या न करे, बस आपके घर खुशी या गमी में पहुंच जाए तो वह बहुत अच्छा विधायक है. ऐसा नहीं है, शहर का विकास गमी या खुशी में जाने से ही नहीं होता बल्कि विकास के लिए एक जुझारू विधायक होना जरूरी होता है जो जनता के साथ हर आंदोलन में कंधे से कंधा मिला कर खड़ा रहे. जेल जाने से न डरे. राजनीति यह नहीं कहती कि आप जनता से मिलते रहो और जो विकास के वादे किए थे घोषणापत्र में उन्हें भूल जाओ.

सपा में शामिल होने पर विष्णु शर्मा का स्वागत करते पार्टी नेता.

सवाल : क्या विकास के वादे किए थे विधायक डॉ. अरुण कुमार ने और कौन से वादे उन्होंने पूरे नहीं किए?
जवाब : देखिए यह पुराना मुद्दा है, मैं इसमें ज्यादा डिटेल में नहीं जाऊंगा. आप पिछली बार का ही घोषणा पत्र उठाकर देख लीजिए विधायक ने एक भी वादा पूरा नहीं किया है. जो भी विकास हुए हैं वे अखिलेश जी की सरकार की देन हैं. चाहे वह फ्लाईओवर हो, एंबुलेंस सेवा हो या पुलिस की डायल सेवा हो, सारे काम अखिलेश यादव के कार्यकाल में ही हुए हैं.
सवाल : शहर विधानसभा क्षेत्र के कौन-कौन से इलाके आपकी नजर में पिछड़े हुए हैं?
जवाब : बहुत से ऐसे इलाके हैं जहां सड़कें तक नहीं बन सकी हैं. वीर सावरकर नगर, बन्नूवाल सहित कई इलाकों का बुरा हाल है. कई जगह तो पानी तक नहीं पहुंच पाया है. 100 फुटा रोड के आसपास के कई इलाकों में मैंने खुद भ्रमण किया है जहां आज तक पानी नहीं पहुंच पाया है. बन्नूवाल के इलाकों में कच्चे रास्ते हैं. लोग खड़ंजा रोड पर चलने को मजबूर हैं. बहुत सी कॉलोनियां ऐसी हैं जो नियमित नहीं हो पाई हैं जिस कारण वहां के लोग भी दुश्वारियों के बीच जीवन गुजारने के लिए मजबूर हैं.
सवाल : कौन सी कॉलोनियां हैं जो नियमित नहीं हो पाई हैं?
जवाब : आशुतोष सिटी के पास की कई डेवलपिंग कॉलोनियां नियमित नहीं हुई हैं. धौरेरा माफी की तरफ कई कॉलोनियां ऐसी हैं जो नियमित नहीं हुई हैं कॉलोनियां बना तो दी गई हैं लेकिन सरकारी सुविधा उन्हें नहीं मिल पा रही है.
सवाल : जब कॉलोनियां ही अवैध हैं तो सरकार उनमें डेवलपमेंट क्यों करेगी?
जवाब : आप वैध कॉलोनी ही बता दीजिए जहां बीडीए ने सरकारी फीस लेने के बाद डेवलपमेंट कराया हो. सरकार गरीबों के आवास के बारे में बिल्कुल नहीं सोचती. इतने सारे नियम बना दिए हैं कि एक इंसान एक छोटा सा मकान भी लेने जाता है तो वह भी 40-50 लाख रुपए में पड़ता है. एक 20- 25 हजार रुपये कमाने वाला आदमी 40-50 लाख रुपये का मकान कैसे खरीद पाएगा? लोअर मिडिल क्लास तो इस बारे में सोच तक नहीं सकता. उसकी मजबूरी हो जाती है कि वह अवैध कॉलोनियों में ही मकान ले जहां उसे सस्ते मकान मिल सकते हैं. सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए. अगर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार आती है तो मैं अखिलेश यादव जी से इस दिशा में काम करने का आग्रह करूंगा. नियमों को सरल बनाने का प्रयास करूंगा. अभी जो नियम बनाए गए हैं वह सिर्फ सरकारी अधिकारियों और नेताओं की जेब भरने के लिए बनाए गए हैं.
सवाल : शहर विधानसभा क्षेत्र का सबसे बड़ा मुद्दा आप किसे मानते हैं?
जवाब : मैं लगभग तीन-चार दशकों से इस शहर को देखता आ रहा हूं. मेरी नजर में यहां का सबसे बड़ा मुद्दा हिंदू-मुस्लिम ही रहा है. बरेली की जनता ने कभी विकास के नाम पर वोट नहीं दिया. प्रदेश में सरकार चाहे किसी भी पार्टी की रही हो पर बरेली में एक ही पार्टी जीतती आ रही है. मैं लोगों से अपील करना चाहता हूं कि विकास के मुद्दे पर भी विचार करें. जो पोटेंशियल यहां की है उस हिसाब से आज बरेली को प्रदेश के टॉप 3 शहरों में होना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ क्योंकि यहां के लोग हिंदू और मुस्लिम में ही उलझे रहे. मैं बरेली की जनता से निवेदन करूंगा कि एक बार अखिलेश जी के हाथों को मजबूत बनाएं.
सवाल : समाज सेवा के क्षेत्र में भी कोई उल्लेखनीय कार्य किया है आपने?
जवाब : देखिए यह बताने का विषय तो नहीं है. मेरा मानना है कि वह समाज सेवा ही क्या जिसके बारे में बताने की जरूरत पड़े. फिर भी आपने पूछा है तो मैं बताना चाहूंगा कि वर्ष 2013 से 2018 तक मैं सरस्वती शिशु मन्दिर के चार-पांच बच्चों को हर साल शैक्षिक रूप से गोद लेता था. ये उसी स्कूल के बच्चे थे जिस स्कूल में कभी मैंने पढ़ाई की थी. इन बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का पूरा खर्च मैं खुद उठाता था. इसके अलावा त्योहारों पर गरीबों के लिए भंडारे आदि की व्यवस्था करने के साथ ही अन्य सामाजिक कार्यों में भी मैं बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेता रहा हूं. मैं आज भी समाज सेवा के कई कार्य करना चाहता हूं पर मोदी जी की आर्थिक नीतियों के कारण मैं मजबूर हो गया. उन नीतियों ने लोगों का व्यापार चौपट कर दिया और मेरे व्यापार पर भी असर पड़ा जिस कारण मैं वे कार्य नहीं कर पाया जिनके बारे में मैंने सोचा था. मैं वादा करता हूं कि जैसे ही हालात सुधरेंगे मैं और बेहतर काम करूंगा.

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