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Exclusive : कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना और बरेली भाजपा को ले डूबेंगे भाजपा नेता अनुपम कपूर के विनायक अस्पताल के काले कारनामे, एक और कारनामा पढ़ें सिर्फ इंडिया टाइम 24 पर

नीरज सिसौदिया, बरेली
कोरोना काल में अस्पताल संचालकों द्वारा किस प्रकार लूट खसोट की गई इसका जीता जागता उदाहरण भाजपा नेता अनुपम कपूर के विनायक अस्पताल में मरीजों से हुई लूट खसोट के रूप में देखा जा सकता है. सत्ता का नशा अस्पताल संचालक पर इस कदर हावी रहा कि लूट खसोट का सिलसिला सीएमओ और जिलाधिकारी से शिकायत के बाद भी चलता रहा. इंडिया टाइम 24 ने लगातार भाजपा नेता अनुपम कपूर के विनायक अस्पताल के काले कारनामों का खुलासा किया था. अब कोरोना काल का इस अस्पताल का एक और बिल सामने आया है जिसमें सरकार द्वारा निर्धारित राशि से कहीं अधिक राशि मरीज से वसूल की गई है. हैरानी की बात यह है कि यह बिल उस तिथि के बाद का है जब विनायक अस्पताल के काले कारनामों के खिलाफ मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पास शिकायत भी पहुंच चुकी थी और अस्पताल प्रबंधन ने कंप्यूटर की गड़बड़ी बताते हुए अधिक वसूल की गई राशि भी मरीज के परिजनों को वापस कर दी थी. उसके बाद एक और कारनामा सामने आया था जिसमें फिर से राशि वापस कर मामला शांत करा दिया गया था. इसके बाद मरीज के गहने चोरी करने का मामला सामने आया था जिसमें मैनेजर के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी. इसके बावजूद अस्पताल को सील नहीं किया गया. अब एक और कारनामा सामने आया है. ऐसा लगता है मानो सरकार ने ही भाजपा नेता अनुपम कपूर को मरीजों के साथ लूट खसोट की खुली छूट दे दी है. अब चूंकि अनुपम कपूर भाजपा नेता हैं उक्त अस्पताल का उद्घाटन खुद यूपी के कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना ने किया था, इसलिए पूरे बरेली शहर में भाजपा और सुरेश खन्ना की थू-थू हो रही है. विपक्षी भी इस बार कोरोना काल में सरकार की नाकामी, अस्पतालों की लूट खसोट और किसान आंदोलन को ही मुद्दा बना रहे हैं. ऐसे में निश्चित तौर पर भाजपा नेता अनुपम कपूर के विनायक अस्पताल की लूट खसोट का मुद्दा बरेली शहर में तो भाजपा को ले डूबेगा. साथ ही कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना के करीबी होने के कारण उनकी भी फजीहत करा रहा है.


ताजा मामला दुर्गा नगर बरेली के रहने वाले पुरुषोत्तम सचदेवा का है. बिल के मुताबिक पुरुषोत्तम सचदेवा को 30 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और 12 मई को डिस्चार्ज कर दिया गया. उनका कुल बिल दो लाख 63 हजार 800 रुपये का बनाया गया. इसमें 13 हजार रुपये प्रतिदिन की दर से एक लाख 56 हजार रुपये वसूल किए गए जबकि सरकार की ओर से प्रतिदिन का चार्ज 8000 रुपये ऑक्सीजन चार्ज के साथ निर्धारित किए गए थे. नर्सिंग चार्ज दो हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 24 हजार रुपये वसूले गए. डा. पुनीत अग्रवाल की कंसलटेंसी फीस 15 सौ रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 19 हजार 500 रुपये वसूल की गई यानि आपको डॉक्टर अगर एक बार देखने आएगा तो वह 15 सौ रुपये लेगा. नेबुलाइजेशन चार्ज के 50 रुपये के हिसाब 36 यूनिट का 18 सौ रुपये लिया गया. ईएमओ चार्ज 500 रुपये के हिसाब से 6000 रुपये लिया गया. क्रिटिकल केयर चार्ज के नाम पर एक दिन का पांच हजार रुपये लिया गया. ऑक्सीजन चार्ज के नाम पर तीन हजार रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से 36000 रुपये वसूले गए जबकि सीएमओ के अनुसार सरकार की ओर से स्पष्ट निर्देश थे कि ऑक्सीजन का चार्ज बेड चार्ज में ही शामिल है, यह अलग से नहीं लिया जा सकता. साथ ही इसकी मॉनिटरिंग के नाम पर 6000 रुपये अतिरिक्त वसूल किए गए. इसके अलावा अन्य मदों में भी राशि वसूल कर मरीज से लूट खसोट की गई.

Vinayak hospital Bareilly

यह तो नमूना मात्र है. अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोरोना काल में कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना का करीबी होने और स्वयं भाजपा नेता होने का गलत फायदा उठाते हुए खुलेआम मरीजों से मनमाने पैसे वसूले गए. ऐसे दर्जनों बिल सामने आ रहे हैं जो भाजपा नेता अनुपम कपूर के विनायक अस्पताल के काले खेल की गवाही दे रहे हैं. इसके बावजूद मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एसके गर्ग और डीएम नितीश कुमार विनायक अस्पताल प्रबंधन के आगे नतमस्तक नजर आ रहे हैं. सूत्र बताते हैं कि एक बार तो अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई के लिए अधिकारियों ने कमर कस ली थी लेकिन फिर ऊपर से फोन आ गया और मामला दबा दिया गया.

Suresh Khanna

मामला दबाने वाले यह भूल गए कि चुनाव नजदीक हैं और जनता के साथ ऐसी लूट खसोट करने वालों को जनता कभी माफ नहीं करेगी. कुछ सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना भी इस अस्पताल में हिस्सेदार हैं लेकिन सूत्र इसका सबूत देने में नाकाम रहे. बहरहाल, इस संबंध में जब भाजपा नेता और विनायक अस्पताल के मालिक अनुपम कपूर से बात की गई तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. वहीं, सीएमओ डा. एसके गर्ग भी यह बताने को तैयार नहीं हुए कि उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं की? बता दें कि विनायक अस्पताल के खिलाफ समाजवादी पार्टी के पूर्व जिला महासचिव एवं जिला सहकारी संघ के पूर्व चेयरमैन महेश पांडेय ने लिखित में शिकायत भी की थी.

Mahesh Pandey

अब वह हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने की तैयारी भी कर रहे हैं. साथ ही सड़क से लेकर माननीय न्यायालय तक लड़ाई लड़ने की चेतावनी भी दी है. इसके बावजूद लूट खसोट का खेल खुलेआम चल रहा है. एक के बाद एक अस्पताल के काले कारनामों का चिट्ठा सामने आ रहा है. पूरे बरेली शहर में भाजपा की थू-थू हो रही है पर इस बदनामी के बावजूद सरकार सो रही है. खुद विधायक इस अस्पताल पर मेहरबान हैं और अस्पताल को लाखों रुपये की विधायक निधि भी बांट रहे हैं.
अराजकता का ऐसा नंगा नाच बरेली शहर में निश्चित तौर पर भाजपा को ले डूबेगा. जब तक भाजपा आलाकमान यह समझ पाएगा तब तक बहुत देर हो चुकी होगी. बहरहाल, अनुपम कपूर के विनायक अस्पताल के काले कारनामों के खुलासे का सिलसिला आपके प्रिय पोर्टल इंडिया टाइम 24 डॉट कॉम पर यूं ही जारी रहेगा. अगर आप भी पीड़ित हैं तो हमें बताएं, हम आपकी आवाज भी प्रमुखता से उठाएंगे.

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