इंटरव्यू

हर मोर्चे पर नाकाम रहे हैं बहोरन लाल मौर्या, विकास के मुद्दे पर लड़ूंगा चुनाव, विधायक पर जमकर बरसे युवा सपा नेता अर्जुन सिंह टीटू, पढ़ें स्पेशल इंटरव्यू…

समाजवादी पार्टी के युवा नेता अर्जुन सिंह टीटू निर्दलीय चुनाव जीतकर राजनीति में आए थे. वह अपने जीवन में अब तक कोई भी चुनाव नहीं हारे. इन दिनों वह 120 भोजीपुरा विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. अर्जुन के पिता एक अध्यापक थे फिर उन्होंने राजनीति को क्यों चुना? वह दो बार जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़े और दोनों बार जीत हासिल की. लेकिन हाल ही में बसपा छोड़कर सपा में शामिल हो गए, इसकी क्या वजह रही? वर्तमान विधायक बहोरन लाल मौर्य को वह कितना सफल मानते हैं? विधानसभा चुनाव में अगर पार्टी उन्हें मौका देती है तो उनके चुनावी मुद्दे क्या होंगे? ऐसे कई मुद्दों पर युवा सपा नेता और पूर्व जिला पंचायत सदस्य अर्जुन सिंह टीटू ने इंडिया टाइम 24 के संपादक नीरज सिसौदिया के साथ खुलकर बात की. पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश…
सवाल : आप मूलरूप से कहां के रहने वाले हैं, पारिवारिक पृष्ठभूमि क्या रही?
जवाब : मैं मूलरूप से बरेली जिले के भोजीपुरा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पड़ते गांव कुंवरपुर बंजरिया का रहने वाला हूं. मैं मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक़ रखता हूं. मेरे दादा जी किसान थे और खेती करके परिवार का भरण पोषण करते थे. मेरा पिता भोजीपुरा विधानसभा क्षेत्र के गांव कराली के जूनियर हाई स्कूल में शिक्षक थे. मेरी कोई पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं रही. हम चार भाई बहन हैं जिनमें मेरी दो बहनें मुझसे बड़ी हैं और एक छोटा भाई है जो मेरे साथ ही रहता है.
सवाल : आपकी पढ़ाई लिखाई कहां से हुई?
जवाब : मेरी शुरुआती शिक्षा गांव के ही स्कूल से हुई. फिर दरबारी लाल शर्मा इंटर कॉलेज रिठौरा से नौवीं तक पढ़ाई की. उसके बाद मेरे पिता जी अच्छी शिक्षा के लिए हमारे परिवार को लेकर बरेली आ गए. यहां केडीएम इंटर कॉलेज से मैंने इंटरमीडिएट किया. फिर खंडेलवाल कॉलेज (केसीएमटी) से मैंने बीकॉम किया.
सवाल : करियर का सफर कैसा रहा? राजनीति में कैसे आना हुआ?
जवाब : वर्ष 2006 में मेरा ग्रेजुएशन कंप्लीट हुआ था. उसके बाद मैं व्यापार की तरफ आ गया. मेरा व्यापार में इंटरेस्ट था. उस समय के हिसाब से मेरा परिवार जितना सक्षम था, मेरे पिता ने मेरी आर्थिक मदद भी की लेकिन चूंकि मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार से था इसलिए मुझे काफी मेहनत करनी पड़ी. वर्ष 2007 से 2012 तक मुझे काफी संघर्ष करना पड़ा. वर्ष 2007 में एक टेलीकॉम कंपनी के साथ मैंने अपना बिजनेस स्टार्ट किया और मुझे व्यापार में काफी सफलता भी मिली. उसके बाद मैंने सबसे पहले अपने क्षेत्र के लोगों के सुख-दुख में शामिल होना शुरू किया. जहां उन्हें मेरी जरूरत पड़ती थी मैं उनकी मदद के लिए खड़ा हो जाता था लेकिन मैं जिस स्तर पर लोगों की मदद करना चाहता था उस स्तर तक नहीं कर पा रहा था. उसमें कई तरह की समस्याएं आती थीं. अगर किसी के साथ कुछ अन्याय होता था तो मैं अधिकारियों के सामने अपनी बात रखता था लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती थी. अधिकारी उस पर ध्यान नहीं देते थे तो उसके लिए मुझे राजनीति ही एक बेहतर विकल्प लगा और मैंने राजनीति को चुना.

सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल का स्वागत करते अर्जुन सिंह टीटू

सवाल : सक्रिय राजनीति में आना कब हुआ?
जवाब : वर्ष 2008 में मेरे पुश्तैनी गांव में एक-दो केस ऐसे हो गए थे कि लोगों के साथ काफी अन्याय हुआ था. वह सब देख कर मुझे अच्छा नहीं लगा इसलिए मैंने जनता की आवाज उठाने के लिए राजनीति में आने का फैसला किया. वर्ष 2010 में पंचायत चुनाव भी होने थे तो जब मैंने लोगों से इस संबंध में बात की तो उन्होंने मुझे प्रेरित किया कि मुझे जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ना चाहिए. मेरे पक्ष में सभी लोग एकजुट हुए. उस समय बड़ी तादाद में युवा मेरे साथ थे. उस समय बहुजन समाज पार्टी की सरकार थी और मैं सत्ता के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ा था. पुलिस और प्रशासन के द्वारा भी हमें उस वक्त काफी परेशान किया गया लेकिन जनता के सहयोग और आशीर्वाद की बदौलत मुझे 6500 वोट मिले और लगभग सात सौ से भी अधिक वोटों से मैं पहली बार में ही निर्दलीय जिला पंचायत सदस्य चुन लिया गया. दूसरे नंबर पर हमारे क्षेत्र के ही शाकिर अली आए थे. उन्हें 58 सौ वोट प्राप्त हुए थे. जब मैं गरीबों की आवाज लेकर, दलितों की आवाज लेकर, किसानों की आवाज लेकर जिला पंचायत में पहुंचा तो लोगों के साथ मिलकर जनहित में काम किया. उसी दौरान राजनीति को करीब से देखा और समझने की कोशिश की. वर्ष 2010 से 15 के बीच अपने क्षेत्र में कोई गांव ऐसा नहीं छोड़ा जहां विकास कार्य न कराया हो.

शिलान्यास के ये पत्थर आज भी अर्जुन सिंह टीटू द्वारा कराए जा रहे विकास कार्यों की गवाही दे रहे हैं

सवाल : वे कौन-कौन से गांव थे जहां आपने विकास कार्य करवाए थे और जहां आप कह सकते हैं कि आपकी अच्छी पकड़ है?
जवाब : मैंने सबसे पहले शुरुआत अपने गांव कुंवरपुर बंजरिया से ही की. उसके बाद भंडसर में भी सीसी रोड व अन्य काम करवाए. इसके अलावा चेना मुरादपुर में जहां दलदल हुआ करता था वहां मैंने सीसी सड़कों का निर्माण कराया. मुड़िया अहमद नगर गांव, बरखा पुर गांव आदि में मैंने लगभग ढाई से तीन करोड़  रुपये से विकास कार्य कराने के काम किए.
सवाल : आप पहली बार किस पार्टी से जुड़े और कब जुड़ना हुआ? आगे का राजनीतिक सफर कैसा रहा?
जवाब : वर्ष 2010 में जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव होना था. बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी के साथ मैं अध्यक्ष के चुनाव में गया क्योंकि समाज सेवा करने के लिए हमें राजनीतिक पार्टी की आवश्यकता भी थी तो सबसे पहले मैं बहुजन समाज पार्टी से जुड़ा. वर्ष 2015 में दोबारा से जिला पंचायत सदस्य के चुनाव हुए और अपनी 5 वर्षों की मेहनत के बल पर मैं बहुजन समाज पार्टी से चुनाव लड़ा और जीत गया. मुझे दोबारा जनता ने चुनकर जिला पंचायत भेजा. उसके बाद हमने अपने राजनीतिक सहयोगियों और पारिवारिक लोगों से चर्चा की कि आगे की क्या रणनीति होनी चाहिए तो सभी का एक ही मत था कि अब मुझे विधानसभा चुनाव लड़ना चाहिए.

जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतने के बाद प्रमाण पत्र लेते अर्जुन सिंह टीटू

सवाल : अब आप समाजवादी पार्टी से भोजीपुरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं. समाजवादी पार्टी में कब आना हुआ और आपको ऐसा क्यों लगता है कि पार्टी को आपको टिकट देना चाहिए?
सवाल : 10 अप्रैल 2021 को मैंने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली है. मैं एक बार भी जिला पंचायत सदस्य का चुनाव नहीं हारा या यूं कहिए कि अपने जीवन में मैं आज तक जो भी चुनाव लड़ा हमेशा जीत ही हासिल की है. वर्ष 2014 के बाद मैंने देखा कि जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार आई है उसके बाद से लगातार हर वर्ग चाहे किसान हो, चाहे महिलाएं हों, चाहे दलित हों या व्यापारी वर्ग हो, इस सरकार से खुश नहीं थे. इन्होंने जिन मुद्दों पर चुनाव लड़ा था उस किसी भी मुद्दे पर सफल नहीं रहे. जीएसटी लाकर व्यापारियों का नुकसान किया, किसान विरोधी कानून लाकर किसानों का नुकसान कर रहे हैं, कोरोना काल में भी ये लोग जनता को सही उपचार देने में नाकाम साबित रहे.
सवाल : बसपा छोड़ने की क्या वजह रही?
जवाब : देखिए मैं किसी पार्टी की बुराई नहीं करना चाहता लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मुझे बहुजन समाज पार्टी अपनी मूल विचारधारा से हटती नजर आई, इसलिए मैंने बहुजन समाज पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल होने का निर्णय लिया. उत्तर प्रदेश की जो जनता है वह समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी की ओर बहुत उम्मीद भरी निगाहों से देख रही है. हमारी समाजवादी पार्टी के संरक्षक और संस्थापक माननीय मुलायम सिंह यादव जी खुद किसान नेता थे, उन्हें धरतीपुत्र भी कहा जाता था तो उनके बाद मुझे ऐसा लगता है और जनता को भी ऐसा लगता है कि हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी ही प्रदेश का विकास करवा पाएंगे. क्योंकि अगर देखा जाए तो अखिलेश जी के कार्यकाल में जनहित की जितनी भी योजनाएं आई थीं उन्हें योगी सरकार में फेल करने का काम किया गया है और खुद वर्ष 2017 से अब तक 5 सालों में कोई भी ऐसी योजना नहीं लाए जो जनहित की हो.

सरकारी स्कूल में आयोजित एक समारोह में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को पुरस्कृत करते अर्जुन सिंह टीटू.

सवाल : अगर पार्टी आपको चुनाव लड़ने का मौका देती है तो आपके चुनावी मुद्दे क्या होंगे?
जवाब : मैंने जिला पंचायत का चुनाव विकास के ही मुद्दे पर लड़ा था और आगे भी विकास ही मेरा मुख्य मुद्दा होगा. मेरा दूसरा प्रमुख मुद्दा सबके लिए अच्छी शिक्षा है. मैं सबसे ज्यादा जोर शिक्षा पर दूंगा. हमें बेटियों को भी पढ़ाना है क्योंकि बेटा जब पढ़ता है तो एक परिवार शिक्षित होता है लेकिन जब बेटी पढ़ती है तो दो परिवार शिक्षित होते हैं तो बेटियों को शिक्षा के प्रति जागरूक करना, उनके लिए अलग डिग्री कॉलेज खोलना, अच्छे स्कूल बनाना मेरी प्राथमिकता में शामिल हैं. इसके अलावा स्वास्थ्य के मुद्दे होंगे. अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं जनता को मुहैया कराना, अच्छे अस्पतालों का निर्माण कराना मेरे प्रमुख मुद्दे होंगे. मैं डिग्री कॉलेज तो बनाने का काम करूंगा ही साथ ही कन्याओं के लिए अलग से डिग्री कॉलेज बनवाऊंगा. सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था यहां पूरी तरह से लचर है जिसमें काफी सुधार की जरूरत है, इसमें सुधार किया जाएगा. हमारे देश की 80 फ़ीसदी आबादी गांवों में निवास करती है जो महंगी प्राइवेट चिकित्सा का खर्च वहन नहीं कर सकते. इसलिए उन्हें सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. हमारे क्षेत्र में बेरोजगारी भी चरम पर है. अगर मुझे मौका मिलता है तो मैं युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए नए उद्योगों की स्थापना करने का प्रयास करूंगा. इंडस्ट्रियल एरिया को और विकसित कराया जाएगा. बेरोजगारी दूर करने का हर संभव प्रयास किया जाएगा. मोदी सरकार रोजगार के वादे पर विफल साबित हुई है. सरकार ने हर साल दो करोड़ रोजगार देने का वादा किया था लेकिन कहीं किसी को भी रोजगार नहीं मिला.
सवाल : वर्तमान विधायक बहोरन लाल मौर्या के 5 साल के कार्यकाल को आप किस नजरिये से देखते हैं? उन्हें आप कितना सफल मानते हैं?
जवाब : देखिए, मेरी माननीय विधायक जी से व्यक्तिगत कोई रंजिश नहीं है लेकिन जनता की जो अपेक्षा थी वह उस पर खरे नहीं उतर पाए. पिछले 5 वर्षों में वह न तो जनता के बीच जा पाए और न ही जनता की समस्याओं का समाधान करवा पाए. इतना ही नहीं हमारे क्षेत्र के कुछ लोग एक ट्रांसफार्मर के मामले को लेकर उनके पास गए थे लेकिन उनका रवैया बेहद उपेक्षा पूर्ण था और उन्होंने किसी के साथ सही ढंग से बात तक नहीं की. विधायक जी ने उनसे कहा कि ट्रांसफार्मर कोई मेरी जेब में थोड़ी न रखा है कि मैं तुरंत लगवा दूं. विधायक जी का जनता के प्रति इस तरह का रवैया होने से जनता में उनके खिलाफ काफी नाराजगी है. कोरोना काल में वह जनता की मदद नहीं करवा पाए. ऑक्सीजन और मेडिकल सेवाओं के लिए जब जनता बहुत परेशान थी तब भी विधायक जी अच्छा किरदार नहीं निभा पाए.

जरूरतमंद लोगों को कंबल वितरित करते युवा सपा नेता अर्जुन सिंह टीटू.

सवाल : वे कौन से स्थानीय मुद्दे थे जिन पर बहोरन लाल मौर्या ने पिछली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था और आपके हिसाब से उन मुद्दों पर वह कितने खरे उतर पाए?
जवाब : बहोरन लाल मौर्या जी स्थानीय मुद्दों पर चुनाव लड़े ही नहीं थे. वह तो मोदी जी के नाम पर चुनाव लड़े थे और कहीं न कहीं जो भारतीय जनता पार्टी की विभाजन की नीति रहती है, जनता को लड़ाने की तो धर्म के नाम पर लोगों को आपस में लड़ाने की नीति, जातियों में बांटने की नीति, गरीब को, दलित को लड़ाने की नीति, किसान को व्यापारी से लड़ाने की नीति, ऐसी नीति के तहत वे लोग चुनाव लड़ते हैं और क्षेत्र की जनता को ठगने का काम करके चुनाव जीत जाते हैं. मुझे नहीं लगता कि पिछले 5 साल में वह जनता के किसी भी काम आए हैं या जनता के हित में कोई भी काम कर पाए हैं.

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