इंटरव्यू

बरेली को दिया रोटी बैंक, नई सोच के साथ कर रहे समाजसेवा, कैंट सीट से हो सकते हैं भाजपा का चेहरा, पढ़ें डा. प्रमेंद्र माहेश्वरी का स्पेशल इंटरव्यू

डा. प्रमेंद्र माहेश्वरी बरेली के चिकित्सा जगत का जाना-पहचाना नाम है. समाजसेवा से राजनीति का सफर तय करने वाले प्रमेंद्र माहेश्वरी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन बरेली के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. इन दिनों वह विधानसभा चुनाव को लेकर चर्चा में हैं. 125 कैंट विधानसभा सीट से भाजपा के दावेदारों में डा. प्रमेंद्र माहेश्वरी के नाम की भी चर्चा जोरों पर है. इसी कड़ी में हमने डा. प्रमेंद्र माहेश्वरी के अब तक के सफर पर उनसे ढेर सारी बातें कीं जिन्हें हम तीन किस्तों के माध्यम से आपके पास पहुंचाएंगे. प्रस्तुत है डा. प्रमेंद्र माहेश्वरी के साथ इंडिया टाइम 24 के संपादक नीरज सिसौदिया से बातचीत के मुख्य अंश…
सवाल : मेडिकल की पढ़ाई आपने कहां से की? समाजसेवा का सफर कैसे शुरू हुआ?
जवाब : जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से मैंने मेडिकल की पढ़ाई की. वहां से पढ़ाई खत्म करने के बाद मैंने अपोलो अस्पताल दिल्ली से स्पेशलाइजेशन किया. वर्ष 2001 में बरेली में आकर मैंने अपनी प्रैक्टिस शुरू की थी. जब हम बरेली में आए तो बहुत सारी नई टेक्निक को लेकर आए. यहां बहुत कन्वेंशनल तरीके से इलाज होते थे तो हम उनके नए तरीके लेकर आए. पुराने जमाने के लिए प्रचलित तकनीक के आधार पर पहले इलाज हुआ करते थे. हमने जो ज्वाइंट रिप्लेसमेंट की, दूरबीन से ऑपरेशन की ट्रेनिंग ली थी उसे यहां अप्लाई किया. 21 साल पहले मैंने अपनी प्रैक्टिस शुरू की थी और इस दौरान बरेली और आसपास के इलाकों के जो पेशेंट थे उनकी डेमोग्राफिक सिचुएशन देखकर यह मालूम चला कि यहां की सोसाइटी में ज्यादा गरीबी, अशिक्षा, धार्मिकता के कारण प्रॉब्लम बहुत सारे लोगों के दिमाग में रहती थी. तब से एक इंटरेस्ट जागा समाज सेवा का. हम समाजसेवा करते हैं, हम लोग बहुत सारे ग्रुप्स को हमने जोड़ा है. मेरी पत्नी डॉ. मोनिका लेडी डॉक्टर हैं, गाइनेकोलॉजिस्ट हैं शील हॉस्पिटल में. हमने कई गांवों में जाकर सोसाइटी के बहुत लोगों के साथ काम किए. तब समझ में आया कि दलित समाज में बहुत परेशानियां आती हैं. वाल्मीकि समाज के साथ जुड़ाव हुआ, वाल्मीकि समाज के साथ ही दलित समाज के साथ जुड़ाव हुआ. उनके साथ उनके इलाकों में जाकर बहुत सारे कैंप किए. उनके स्वास्थ्य संबंधी, उनके नशा छुड़वाने के लिए, उनके बच्चों की पढ़ाई के लिए काम किए हैं. संघ में काम करते-करते सामाजिक समरसता का एक विचार बना. बहुत सारे काम हम लोगों ने दलित बस्तियों में जाकर सामाजिक समरसता को लेकर भी किए.


सवाल : समाजसेवा के क्षेत्र में आपने कौन सा उल्लेखनीय कार्य किया?
जवाब : संघ के साथ काम करते-करते एक विचार आया रोटी बैंक का. रोटी बैंक करीब पिछले सात-आठ वर्षों से काम कर रहा है. इसे गंगाचरण अस्पताल में स्थापित किया गया है. रोटी बैंक का कांसेप्ट यह है कि हम सभी अपने परिवारों में दोपहर के भोजन में से प्रतिदिन हर परिवार से दो रोटियां सब्जी के साथ निकालते हैं जिसे लोग स्वयं रोटी बैंक में देकर जाते हैं. उस भोजन को हमारे वॉलंटियर्स रात के भोजन के रूप में ऐसे लोगों को बांटते हैं जो गरीब तो हैं पर भिखारी नहीं हैं. वे लोग दिनभर मेहनत करते हैं लेकिन इतनी आमदनी नहीं हो पाती कि वे अच्छा खाना खा सकें तो ऐसे लोगों को विभिन्न बस्तियों, स्टेशन आदि जगहों पर जाकर हमारे वॉलंटियर्स भोजन उपलब्ध कराते हैं. इनमें रिक्शा चालक, पल्लेदार हैं, मजदूर आदि लोग शामिल हैं जिन्हें भोजन उपलब्ध कराया जाता है. हमारा मकसद यही है कि कोई भी भूखा न सोए. एक दिन में लगभग 20-25 लोगों को हम लोग भोजन उपलब्ध कराते हैं.
सवाल : कितने लोग जुड़े हैं रोटी बैंक से?
जवाब : रोटी बैंक से लगभग चार सौ परिवार जुड़े हैं. लेकिन ऐसा नहीं है कि सबके घर से रोज भोजन आना है. क्योंकि चार सौ परिवारों से भोजन एकत्र करने और बांटने के लिए संसाधन नहीं हैं हमारे पास और इतने लोग भी नहीं होते जिन्हें भूखा सोना पड़े. यह भोजन उन लोगों तक पहुंचता है जो लोग मेहनती हैं पर उतना कमा नहीं पा रहे कि अपना और अपने परिवार का पेट भर सकें.
सवाल : राजनीति में कब आना हुआ?
जवाब : मैंने जैसा कि बताया आपको समाजसेवा करते हुए करीब 20-21 साल हो गए और समाज के साथ जुड़ने से या समाजसेवा करने से बहुत सारे लोग जुड़ते हैं और राजनीति समाजसेवा करने का एक बेहतर माध्यम है. राजनीति में आने के बाद आप बहुत सारे लोगों के संपर्क में आते हैं और बहुत सारे लोगों से जुड़ते हैं जिनकी समाज को जरूरत है और समाज के प्रति उनका दायित्व बनता है. तब हमें समझ में आया कि अगर हम किसी अभियान को लेकर चलते हैं तो सबकी जरूरत पड़ती है. हमने नशा मुक्ति अभियान चलाया, रक्त दान शिविर लगाए, रक्तदान जागरूकता रैलियां निकालीं. पहले लोग ब्लड डोनेशन नहीं करना चाहते थे तो हर साल एक दिसंबर को रैली निकालते थे.


सवाल : सक्रिय राजनीति में कब आना हुआ?किसी संगठन से कब जुड़ना हुआ?
जवाब : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से तो मैं शुरू से ही जुड़ा रहा हूं. हमारा पूरा परिवार संघ का परिवार रहा है. इसलिए एक मानसिकता जो रही वह राष्ट्रवादी मानसिकता रही. भाजपा में काम करते हुए करीब बीस साल हो गए.
सवाल : आपका राजनीतिक सफर कैसा रहा? कौन-कौन सी जिम्मेदारियां मिलीं अब तक संगठन की ओर से?
जवाब : सबसे पहली जिम्मेदारी मुझे बरेली के आईटी सेल के क्षेत्रीय संयोजक की जिम्मेदारी मिली. उसके बाद मुझे चिकित्सा प्रकोष्ठ का क्षेत्रीय संयोजक बनाया गया. फिर मुझे चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक का दायित्व मिला. उसके बाद काम करते रहे और तीन साल पहले मुझे उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल का सदस्य बनाया गया. यह एक सरकारी आयोग होता है जो प्रदेश में चलने वाली चिकित्सा संबंधी गतिविधियों को मॉनिटर करता है. इसमें हर साल तीन सदस्य जोड़े जाते हैं. पिछले विधानसभा चुनावों में मैं 124 शहर विधानसभा सीट का प्रभारी भी रहा. वर्तमान में मैं चिकित्सा प्रकोष्ठ में प्रदेश सह संयोजक का दायित्व निभा रहा हूं. (क्रमश:)

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