उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ प्रदेश की सियासत में गठबंधन, वोट बैंक और टिकट बंटवारे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बरेली की राजनीति भी इससे अछूती नहीं है। खासकर बरेली कैंट विधानसभा सीट पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के संभावित गठबंधन, दोनों दलों के दावेदारों और हिंदू-मुस्लिम वोटों के समीकरण को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ रही है। ऐसे समय में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और करीब 45 वर्षों से सक्रिय राजनीति में अपनी पहचान बनाने वाले नवाब मुजाहिद हसन खां का नजरिया महत्वपूर्ण हो जाता है। वर्ष 2017 में सपा-कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशी रह चुके नवाब मुजाहिद हसन खां इस बार भी बरेली कैंट से कांग्रेस के संभावित दावेदारों में शामिल हैं। वह मानते हैं कि कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में कम से कम एक बार अकेले चुनाव लड़कर अपनी वास्तविक राजनीतिक ताकत परखनी चाहिए, क्योंकि उनके मुताबिक गठबंधन का सबसे अधिक लाभ समाजवादी पार्टी को मिलता है। वह मुस्लिम वोट को किसी एक दल की जागीर मानने से भी इनकार करते हैं और कांग्रेस को मुस्लिम मतदाताओं की पहली पसंद बताते हैं। साथ ही उनका दावा है कि कांग्रेस समाजवादी पार्टी की तुलना में अधिक हिंदू वोट हासिल करने की स्थिति में है। इसकी क्या वजह है? बरेली की नौ विधानसभा सीटों में कांग्रेस को कम से कम चार सीटों पर दावा करने की जरूरत बताने वाले नवाब मुजाहिद हसन खां कैंट सीट पर अपनी जीत की संभावनाओं को लेकर भी आश्वस्त हैं। वह कांग्रेस संगठन की मौजूदा निष्क्रियता को भी स्वीकार करते हैं। फिर ऐसे में जीत कैसे मिलेगी? विधानसभा चुनाव की तैयारियों से लेकर सपा-कांग्रेस गठबंधन, मुस्लिम और हिंदू वोटों के समीकरण, छोटे दलों की भूमिका, बरेली की सीटों पर दावेदारी, कैंट विधानसभा में अपनी संभावनाओं और कांग्रेस संगठन की स्थिति समेत तमाम राजनीतिक मुद्दों पर indiatime24.com (इंडिया टाइम 24 डॉट कॉम) के संपादक नीरज सिसौदिया ने उनसे विस्तार से बातचीत की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश…
प्रश्न: विधानसभा चुनाव को लेकर क्या तैयारियां चल रही हैं?
उत्तर: विधानसभा चुनाव को लेकर मुझे कोई अलग से तैयारी नहीं करनी पड़ती है क्योंकि मैं हमेशा अपने क्षेत्र में रहता हूं। मेरा चेहरा अब किसी परिचय का मोहताज नहीं है। लोगों के बीच लगातार रहता हूं, उनके सुख-दुख में शामिल होता हूं। इसलिए जब चुनाव आएगा, तब उसी हिसाब से रणनीति बनाई जाएगी। फिलहाल मैं जनता के बीच पहले की तरह सक्रिय हूं।

प्रश्न: आपको राजनीति में आए हुए कितने साल हो गए?
उत्तर: मुझे राजनीति में आए हुए करीब 45 साल हो गए। जब बेगम आबिदा अहमद वर्ष 1981 में बरेली संसदीय सीट से चुनाव जीती थीं, तब मैं उनका काम देखता था। उसके बाद जब उन्होंने अगला चुनाव लड़ा, तब तक भी मैं उनके साथ रहा। राजनीति का लंबा अनुभव मुझे लोगों के बीच रहकर ही मिला है।
प्रश्न: इन 45 वर्षों के राजनीतिक सफर में भारतीय राजनीति में आपको सबसे बड़ा बदलाव क्या नजर आया?
उत्तर: भारतीय राजनीति में जमीन-आसमान का फर्क आया है। उस समय राजनीति में कुछ उसूल हुआ करते थे। नेताओं के बीच वैचारिक मतभेद जरूर होते थे, लेकिन राजनीतिक मर्यादा और अनुशासन भी होता था। आज राजनीति में वह अनुशासन कहीं दिखाई नहीं देता। राजनीतिक संवाद की भाषा और कार्यशैली दोनों में काफी बदलाव आया है।
प्रश्न: कुछ समय पहले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन की सहयोगी तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस अलग-अलग चुनाव लड़ीं। उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के संभावित गठबंधन की चर्चा है। आपको क्या लगता है, कांग्रेस को सपा के साथ गठबंधन करना चाहिए या अकेले चुनाव लड़ना चाहिए?
उत्तर : देखिये, गठबंधन में हमेशा समाजवादी पार्टी को फायदा होता है। इस वक्त बहुत सारे लोग कांग्रेस की ओर देख रहे हैं। लोगों को कांग्रेस से उम्मीदें हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि देश को संविधान की जरूरत है और अगर संविधान को महफूज रखना है तो कांग्रेस का मजबूत होना जरूरी है।
जहां तक गठबंधन का सवाल है, कुछ सीटों पर उसका फायदा हो सकता है, लेकिन मेरा व्यक्तिगत मानना है कि कांग्रेस को कम से कम एक बार उत्तर प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ना चाहिए ताकि पार्टी यह समझ सके कि प्रदेश में उसकी वास्तविक स्थिति क्या है और उसकी अपनी ताकत कितनी है।
प्रश्न : समाजवादी पार्टी पीडीए अभियान चला रही है और मुस्लिम वोट को उसका कोर वोट बैंक माना जाता है। ऐसे में अगर कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ती है तो क्या उसे मुस्लिम वोट का लाभ मिलेगा?
उत्तर: देखिये, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के पास लगभग एक ही वोट है। फर्क सिर्फ यादव वोट का है। और मैं यह भी नहीं मानता कि यादव समाज का सौ प्रतिशत वोट समाजवादी पार्टी के साथ है। अगर समाजवादी पार्टी यादव वोट का पचास प्रतिशत भी हासिल कर ले तो बहुत बड़ी बात होगी। रही बात मुस्लिम वोटों की, तो उनका पहला विकल्प कांग्रेस है। अखिलेश यादव जी को यह गलतफहमी है कि मुस्लिम वोट पूरी तरह उनके साथ है। जब मुस्लिम मतदाता को लगता है कि कांग्रेस जीतने की स्थिति में है या मुकाबले में है, तो वह कांग्रेस को ही प्राथमिकता देता है। कांग्रेस के साथ मुस्लिम वोट हमेशा से जुड़ा रहा है। पहले भी मुस्लिम कांग्रेस को वोट करता था। बाद में क्षेत्रीय दलों के उभरने से कांग्रेस का वोट बंट गया। कुछ वोट समाजवादी पार्टी के पास चला गया, कुछ बहुजन समाज पार्टी के पास गया और कुछ अन्य छोटे दलों में बंट गया।

प्रश्न: इस बार भी बसपा, आजाद समाज पार्टी, एआईएमआईएम और कई छोटे दल मैदान में होंगे। आपकी नजर में इनका चुनाव परिणामों पर कितना असर पड़ेगा?
उत्तर: देखिए, अब लड़ाई सीधी है। एक तरफ कांग्रेस के पक्ष का वोट है और दूसरी तरफ कांग्रेस के विरोध का वोट। मुझे नहीं लगता कि इन छोटे-छोटे दलों का कोई बड़ा असर पड़ेगा। अंततः वोट या तो कांग्रेस के पक्ष में जाएगा या कांग्रेस के विरोध में जाएगा।
प्रश्न : अगर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का गठबंधन होता है तो कांग्रेस को कितनी सीटों पर दावा करना चाहिए? कौन-सा क्षेत्र कांग्रेस के लिए बेहतर रहेगा?
उत्तर: कम से कम आधी सीटों पर तो कांग्रेस को दावा करना ही चाहिए। मुझे लगता है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश कांग्रेस के लिए बेहतर क्षेत्र रहेगा। यहां समाजवादी पार्टी का उतना प्रभाव नहीं है, क्योंकि इस क्षेत्र में बहुजन समाज पार्टी का भी प्रभाव रहा है। इसलिए यहां का मतदाता पूरी तरह समाजवादी पार्टी की ओर नहीं जाएगा, लेकिन कांग्रेस की ओर जरूर आ सकता है।
प्रश्न: बरेली जिले की नौ विधानसभा सीटों पर इस बार क्या स्थिति देखते हैं?
उत्तर: अब यह काफी हद तक उम्मीदवार पर निर्भर करेगा। कौन उम्मीदवार है, उसकी अपनी पकड़ कितनी है, यह बहुत महत्वपूर्ण होगा। मैंने पहले भी कहा कि वोटर अब दो हिस्सों में बंटा हुआ है—एक सत्ता पक्ष के साथ और दूसरा विपक्ष के साथ। बीच का रास्ता अब बहुत कम बचा है। इसलिए उम्मीदवार का व्यक्तिगत जनाधार चुनाव में बड़ी भूमिका निभाएगा।

प्रश्न: बरेली कैंट विधानसभा सीट से कांग्रेस टिकट के दावेदारों में आपका भी नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। क्या आपको लगता है कि आपके नेतृत्व में कांग्रेस यह सीट जीत सकती है?
उत्तर: बिल्कुल जीत सकती है। जहां तक मेरी दावेदारी का सवाल है, अगर पार्टी मुझे टिकट देती है तो मैं चुनाव लड़ूंगा। लेकिन मेरी ऐसी कोई व्यक्तिगत जिद नहीं है कि मुझे हर हाल में चुनाव लड़ना ही है। पिछली बार भी पार्टी ने मुझे चुनाव लड़ाया था और कहा था कि आपको चुनाव लड़ना है, इसलिए मैंने चुनाव लड़ा। मैं पार्टी का एक सिपाही हूं। इस बार भी पार्टी जो फैसला करेगी, वही मेरे लिए सर्वोपरि होगा। लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि टिकट के बाकी सपा और कांग्रेस के दावेदारों से मैं इक्कीस रहूंगा, उन्नीस नहीं रहूंगा।
प्रश्न : समाजवादी पार्टी में इन दिनों टिकट को लेकर ऐसा लगता है जैसे एक आंतरिक युद्ध ही छिड़ गया है, कुछ मुस्लिम दावेदार हैं तो कुछ हिंदू दावेदार हैं जो टिकट के लिए पूरी ताकत झोंके हुए हैं। उनके लिए आप क्या कहना चाहेंगे?
उत्तर: देखिए, युद्ध तो नहीं छिड़ना चाहिए। हर दावेदार को अपनी पार्टी पर भरोसा रखना चाहिए कि पार्टी जिसे योग्य समझेगी, उसे टिकट देगी। कोई अपने आप तो लड़ नहीं लेगा या कोई भी व्यक्ति पार्टी से टिकट छीनकर नहीं ले सकता। इसलिए युद्ध जैसी स्थिति नहीं होनी चाहिए, इस बात को समझना चाहिए। जिसे भी टिकट मिलता है, उसके पास पार्टी का वोट तो होता ही है, लेकिन उसके साथ उसका अपना व्यक्तिगत वोट भी होना चाहिए। वही उम्मीदवार चुनाव जीत सकता है जो पार्टी के वोट के साथ अपना व्यक्तिगत जनाधार भी जोड़ सके। जो अपना वोट नहीं ला सकता वह चुनाव नहीं जीत सकता। केवल पार्टी के भरोसे कैंट का चुनाव नहीं जीता जा सकता।
प्रश्न: अक्सर कहा जाता है कि अगर बरेली कैंट से समाजवादी पार्टी किसी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट देती है तो हिंदू वोट छिटक जाएगा। इस पर आपका क्या कहना है?
उत्तर: यह तो समाजवादी पार्टी का भ्रम है। हिंदू वोट उन्हें मिल ही नहीं रहा है तो छिटक कैसे जाएगा? देखिये छिटकती तो वही चीज है जो आपके पास होती है। जब आपके पास हिंदू वोट है ही नहीं, तो उसके छिटकने का सवाल ही नहीं उठता। इसलिए सपा मुस्लिम को टिकट दे या हिंदू को, उसे हिंदू वोट मिलने वाला नहीं है।
प्रश्न: अगर कांग्रेस मुस्लिम उम्मीदवार उतारती है तो क्या कांग्रेस को हिंदू वोट मिलेगा?
उत्तर: कांग्रेस, समाजवादी पार्टी से तो ज्यादा ही हिंदू वोट लेकर आएगी।
प्रश्न: आपको ऐसा क्यों लगता है?
उत्तर: देखिये मैं यह तो नहीं कहूंगा कि सपा को हिन्दू वोट क्यों नहीं मिलता है क्योंकि यह तो अंडरस्टुड है कि समाजवादी पार्टी को हिंदू साहिबान कितना पसंद करते हैं और कांग्रेस को कितना पसंद करते हैं। क्योंकि यह बात सब जानते हैं कि हिंदू मतदाता समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को किस नजर से देखता है। जितने लोगों से मेरी बातचीत हुई है और जितना मेरा अनुभव है, उसके आधार पर मैं कह सकता हूं कि कांग्रेस हिंदू मतदाताओं की पहली पसंद होगी और उसके बाद कोई और विपक्षी पार्टी। समाजवादी पार्टी की छवि सिर्फ मुस्लिमों की पार्टी वाली है, इसलिए उसे हिन्दू वोट नहीं मिल पाएंगे लेकिन कांग्रेस के साथ हिंदू समाज पहले भी जुड़ा रहा है और आज भी जुड़ा हुआ है। इसलिए कांग्रेस की स्थिति समाजवादी पार्टी से अलग है।

प्रश्न: पिछले कुछ दिनों से आप दिल्ली में हैं। संसद का सत्र भी चल रहा है। क्या पार्टी के शीर्ष नेताओं से मुलाकात हुई?
उत्तर : देखिए, मैंने दिल्ली में कोई डेरा नहीं डाला है। मेरा दिल्ली आना-जाना लगा रहता है क्योंकि मैं एक शूटर हूं और शूटिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेता रहता हूं। जब दिल्ली आता हूं तो समय मिलने पर पार्टी नेताओं से भी मुलाकात हो जाती है। इस दौरान भी मेरी कुछ वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात हुई है।
प्रश्न: अगर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का गठबंधन होता है तो बरेली जिले की किन सीटों पर कांग्रेस को दावा करना चाहिए?
उत्तर: देखिये, बरेली में मैं समझता हूं कि नौ में से कम से कम चार सीटों पर कांग्रेस को दावा करना चाहिए। नवाबगंज पर दावा करना चाहिए, भोजीपुरा पर दावा करना चाहिए और बरेली शहर एवं कैंट पर तो दावा करना ही चाहिए।

प्रश्न: आखिर में एक सवाल। समाजवादी पार्टी चुनावी तैयारियों में काफी सक्रिय दिखाई देती है, लेकिन कांग्रेस संगठन उतना सक्रिय नजर नहीं आता। इसकी क्या वजह है?
उत्तर: यह बात सही है। कांग्रेस का संगठन फिलहाल निष्क्रिय ही कहा जा सकता है। कोई विशेष गतिविधि दिखाई नहीं देती। जब पार्टी हाईकमान से कोई निर्देश आता है, तब औपचारिक रूप से कार्यक्रम कर लिए जाते हैं। लेकिन जिस जोश, जज्बे और निरंतरता के साथ चुनाव की तैयारी होनी चाहिए, वह अभी दिखाई नहीं दे रही। अगर कांग्रेस को मजबूत होकर चुनाव लड़ना है तो संगठन को जमीनी स्तर पर लगातार सक्रिय होना होगा।




