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नगर निगम का काला खेल : करोड़ों के घोटाले में फंसे नगर आयुक्त अभिषेक आनंद, ललितेश सक्सेना के कार्यकाल में जोन-1 में हुआ था घोटाला, पढ़ें क्या है पूरा मामला?

नीरज सिसौदिया, बरेली
नगर निगम का एक और काला कारनामा सामने आया है। करोड़ों रुपये के इस घोटाले में नगर आयुक्त के साथ ही राजस्व प्रभारी ललितेश सक्सेना और उनके सहकर्मियों की गर्दन भी फंसती नजर आ रही है। मामला जोन-1 के अंतर्गत पड़ने वाली संपत्ति संख्या 013789 (कॉमर्शियल मोटर ) का है। मामले की शिकायत मंडलायुक्त से की गई है। इससे पूर्व भी मंडलायुक्त से कर विभाग के काले कारनामों की शिकायत की गई थी लेकिन अब तक उनमें से किसी में भी कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है। इससे मंडलायुक्त की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान लगने लगे हैं।
मंडलायुक्त को भेजे गए शिकायत पत्र में समाजसेवी राजकुमार मेहरोत्रा और एडवोकेट चंद्रप्रकाश गुप्ता ने कहा है कि नगर आयुक्त अभिषेक आनंद, राजस्व प्रभारी ललितेश सक्सेना, टैक्स अधीक्षक विजय कुमार, राजस्व निरीक्षक व संजय संविदा कर्मी ने मिलीभगत कर कमर्शियल मोटर्स के बिल में 2006-07 से 2021-22 तक बकाया पर ब्याज न लगाकर, व्यावसायिक संपत्ति का टैक्स 5 गुना के स्थान पर 3 गुना लगाकर एवं 2018-19 से 2021-22 में राष्ट्रीय राजमार्ग होने व 24 मीटर से अधिक की सड़क होने के बावजूद 12 मीटर से कम की सड़क का रेट लगाकर टैक्स कम कर दिया। इसके अलावा नगर आयुक्त द्वारा 30 जुलाई 2021 को एक करोड़ 18 लाख 52 हजार 585 रुपये टैक्स के कम करके नगर निगम को करोड़ों रुपए के राजस्व की क्षति पहुंचाई है जो कि दंडनीय अपराध है।

राजकुमार मेहरोत्रा

उन्होंने लिखा कि भ्रष्टाचार की शुरुआत कमर्शियल मोटर्स के उस पत्र से हुई जो उन्होंने 12 मार्च 2021 को लिखा है। इस पत्र के अनुपालन में राजस्व अधीक्षक के स्टैनो के रूप में तैनात संविदा कर्मी संजय जो राजस्व अधीक्षक स्टैनो के रूप में कार्यरत है, पत्र पर यह उल्लेख किया गया है कि तत्काल पत्रावली निर्णय हेतु प्रस्तुत करें, लेकिन इस पत्र पर आदेश देने वाले अधिकारी के हस्ताक्षर ही नहीं हैं। कॉमर्शियल मोटर्स के पत्र पर नगर आयुक्त द्वारा यह मत व्यक्त किया गया है कि वित्तीय वर्ष 2006-07 में किया गया टैक्स का निर्धारण त्रुटिपूर्ण है तथा पुन: गणना कर वार्षिक मूल्य 55 लाख 15 हजार 271 के स्थान पर 33 लाख 48 हजार 925 रुपये निर्धारित कर वर्ष 2006-07 से वर्ष 2013-14 तक वार्षिक टैक्स ₹653040 लगा दिया गया।

एडवोकेट चंद्र प्रकाश गुप्ता

वहीं, वर्ष 2014-15 में इस संपत्ति का वार्षिक मूल्यांकन 55 लाख 15 हजार 271 तथा कुल बकाया एक करोड़ नौ लाख 69 हजार 199 रुपये है। नगर निगम के बैलेंस चार्ट में सिर्फ वर्तमान टैक्स पर ब्याज लगाकर लाखों रुपए का भ्रष्टाचार किया गया है। नियमानुसार गत वर्ष का टैक्स व चालू वर्ष की मांग को जोड़कर कुल बकाया पर ब्याज लगाया जाना चाहिए था लेकिन निजी हितों की खातिर नगर आयुक्त और अधिकारियों ने मिलीभगत कर ब्याज की गणना कम करके भ्रष्टाचार किया है। बैलेंस चार्ट में वर्ष 2013-14 में टोटल टैक्स 731404 रुपए दर्शाया गया है। यदि बकाया पर ब्याज की गणना की जाए तो वर्ष 2013-14 में कुल बकाया 76 लाख 37 हजार 424 रुपए होना चाहिए। इस प्रकार सिर्फ ब्याज की गलत गणना कर नगर निगम 69 लाख 6020 रुपए के राजस्व की चपत लगाई गई है। यह आंकड़ा वर्ष 2013-14 वित्तीय वर्ष तक का है।
इतना ही नहीं 20 जून 2021 को नगर आयुक्त के हस्ताक्षर से जारी हुए आदेश में नगर निगम अधिनियम की धारा 213 (6) का सहारा लेकर संशोधन किया गया है जो पूरी तरह से नियम के विपरीत है। धारा 213 (छह) किसी लिपि संबंधी गणना की या अन्य प्रत्यक्ष भूल को ठीक करने के संबंध में लागू होती है परंतु इस केस में कोई लिपिकीय, टोटल संबंधी या अन्य कोई भूल नहीं हुई है। नगर आयुक्त व अधिकारियों ने निजी हितों की खातिर धारा 213 का दुरुपयोग नगर निगम को करोड़ों रुपए के राजस्व की चपत लगाई है। 20 जून 2021 को नगर आयुक्त द्वारा यह जानते हुए कि उक्त संपत्ति व्यावसायिक है तथा कमर्शियल मोटर्स के रूप में चार पहिया वाहन का शोरूम है, उक्त संपत्ति पर 5 गुना के स्थान पर 3 गुना टैक्स लगाकर भ्रष्टाचार किया गया और नगर निगम को वित्तीय हानि पहुंचाई गई। नगर आयुक्त द्वारा उक्त शोरूम राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित होने के बावजूद वहां की सड़क को 12 मीटर से कम दर्शाया गया और उसी दर से 44 पैसे वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2022 तक की गणना कर लगाया गया जबकि यह दर 24 मीटर से अधिक की सड़क के हिसाब से होनी चाहिए थी। बहरहाल, नगर आयुक्त और ललित सक्सेना की गर्दन पूरी तरह फंसती नजर आ रही है अब देखना यह है कि मंडल आयुक्त इन दोनों भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं अथवा इस शिकायत को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

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