पंजाब

बीमार होकर भी ऑनलाइन बिल्डिंग ब्रांच के साथ बैठकें कर रही हैं निगम कमिश्नर, फिर भी बढ़ता जा रहा है बिल्डिंग ब्रांच में भ्रष्टाचार, पढ़ें पूरा मामला

नीरज सिसौदिया, जालंधर
नगर निगम कमिश्नर दीपशिखा शर्मा इन दिनों अस्वस्थ चल रही हैं जिस कारण वह नगर निगम नहीं आ पा रही हैं लेकिन अपनी जिम्मेदारियों को वह घर बैठे भी बाखूबी निभा रही हैं। वह लगातार नगर निगम के बिल्डिंग ब्रांच और बीएंडआर के अधिकारियों के साथ ऑनलाइन बैठकें कर उन्हें निर्देशित करती रहती हैं। इसके बावजूद बिल्डिंग ब्रांच के कुछ भ्रष्ट अधिकारी सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। खुलेआम अवैध कॉलोनियां कटवाई जा रही हैं और अवैध बिल्डिंगें बनवाई जा रही हैं। अर्बन एस्टेट, मिट्ठापुर, वडाला चौक, खांबड़ा, फगवाड़ा गेट, पठानकोट बाईपास, लंबा पिंड, कालिया कॉलोनी, तल्हण रोड, रेलवे रोड, रामामंडी, बस्तियात क्षेत्र सहित कई इलाकों में बिल्डिंग ब्रांच के भ्रष्ट अधिकारियों के काले कारनामों के सबूत देखे जा सकते हैं। जिन बिल्डिगों को चुनाव से पूर्व सील किया गया था अब उनकी सीलें भी खुल चुकी हैं लेकिन इस अंधेरगर्दी को रोकने वाला कोई नहीं है। बिल्डिंग इंस्पेक्टर से एटीपी बनी एक महिला तो रिटायर्ड बिल्डिंग इंस्पेक्टर के इशारों पर नाच रही है। इसके इलाके में सारे सौदे वही रिटायर्ड बिल्डिंग इंस्पेक्टर करवा रहा है। इसी तरह अवैध कॉलोनियों को बैक डेट में पास करने का नया खेल शुरू हो चुका है। एटीपी स्तर के कुछ अधिकारी तो इस फन में अब माहिर हो चुके हैं। मेहरबान की मेहरबानियों के तो किस्से ही निराले हैं। एमटीपी की कुर्सी पर वह धृतराष्ट्र बनकर बैठे हैं। अवैध निर्माणों के खिलाफ उन्होंने आंखें मूंद ली हैं। वहीं, एसटीपी परमपाल सिंह कमेटियों की कहानी लेकर बैठे हुए हैं, हालांकि कमेटियों के दायरे में काटी गई अवैध कॉलोनियों के खिलाफ वह भी चुप्पी साधे बैठे हुए हैं। उनका इंट्रेस्ट कमेटियों में कम शहर में ज्यादा देखने को मिल रहा है। एक प्राइवेट आदमी जिसका नाम “व” अक्षर से शुरू होता है वह बिल्डिंग ब्रांच का सारा रिकॉर्ड संभाल रहा है। हेड ड्राफ्ट्समैन तीन हैं लेकिन वे सिर्फ नाम के ही हेड हैं। उनके अंडर में कोई ड्राफ्ट्समैन ही नहीं है। तीन माह पहले जिन लोगों ड्राफ्ट्समैन बनाया गया है उन्हें भी वही काम सौंपा गया है जो काम हेडड्राफ्ट्समैन को सौंपा गया है। धन्य हैं जिम्मेदारी सौंपने वाले जिन्हें काम की गंभीरता का भी पता नहीं है। पूरा महकमा ही भ्रष्टाचार का गढ़ बन चुका है। बिल्डिंग ब्रांच के हर काम की रेट लिस्ट बनी हुई है। जिसमें नीचे से लेकर ऊपर तक चढ़ावा जाता है इसलिए कार्रवाई कौन करेगा? बता दें कि एसटीपी, एमटीपी, एटीपी, बिल्डिंग इंस्पेक्टर तक में ज्यादातर ऐसे हैं जो भ्रष्टाचार के आरोप में सस्पेंड हो चुके थे और फिर से इसी जालंधर नगर निगम में उन्हीं पदों पर तैनात कर दिए गए हैं जिन पदों पर पहले तैनात थे और कुछ को तो प्रमोट भी कर दिया गया है।
बहरहाल, निगम कमिश्नर दीपशिखा शर्मा को बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारी गुमराह कर अपनी जेबें भरने में लगे हुए हैं और बीमारी में भी दीपशिखा शर्मा की मेहनत निगम के भ्रष्टाचार को रोक पाने में नाकाम साबित हो रही है। अब देखना यह है कि दीपशिखा शर्मा बीमार होने के बावजूद घर से ही नगर निगम चलाती हैं या अपना चार्ज किसी अन्य अधिकारी को देती हैं। बहरहाल, बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारियों के काले कारनामे यूं ही चलते रहेंगे और मुख्यमंत्री भगवंत मान के भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के दावों की पोल खोलते रहेंगे।

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