दिल्ली

16 साल की उम्र में दिव्यांग हो गए थे पिता, अपने दम पर हासिल किया राजनीति में अहम मुकाम, अब संभालेंगे पीएम स्वनिधि योजना का काम, पढ़ें पूर्व डिप्टी मेयर राजकुमार ढिल्लों का स्पेशल इंटरव्यू

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महात्मा फतेहशाह जी महाराज के पौत्र और कविराज रघुनाथ के पुत्र राजकुमार ढिल्लों ने राजनीति में अपने दम पर एक मुकाम हासिल किया है। वह पहली बार निगम का चुनाव जीते और पहली बार में ही डिप्टी मेयर के पद को सुशोभित किया। वर्तमान में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र के चेयरमैन अब प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना की दिल्ली प्रदेश की जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। सियासत के इस मुकाम  का सफर राजकुमार ढिल्लों के लिए कितना उतार-चढ़ाव भरा रहा? बतौर डिप्टी मेयर उन्होंने अपने वार्ड के विकास के लिए उन्होंने कौन से कदम उठाए? लगभग तीन दशक से सक्रिय राजनीति का हिस्सा रहे राजकुमार ढिल्लों अपनी अब तक सबसे बड़ी उपलब्धि किसे मानते हैं? स्थानीय (वार्ड नंबर 195) पार्षद बंटी गौतम और विधायक कुलदीप मोनू के कार्यकाल को वह किस नजरिये से देखते हैं? आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर उनके क्षेत्र का सियासी समीकरण क्या होगा? ऐसे कई मुद्दों पर पूर्व डिप्टी मेयर और उज्ज्वला योजना के पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र के चेयरमैन राजकुमार ढिल्लों ने इंडिया टाइम 24 के संपादक नीरज सिसौदिया के साथ खुलकर बात की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश…
सवाल : आप मूल रूप से कहां के रहने वाले हैं? पारिवारिक पृष्ठभूमि क्या रही?
जवाब : मैं मूल रूप से बड़ौत जिले के गौराना इलाके का रहने वाला हूं। मेरे पिता स्व. रघुनाथ कविराज जी एक कवि थे और पेशे से व्यवसायी थे।

सवाल : आपकी शुरुआती शिक्षा कहां से हुई?
जवाब : मेरे चाचा जी मिलिट्री में थे। उस वक्त उनकी पोस्टिंग असम में थी। मुझे भी वो अपने साथ असम ले गए और मेरी शुरुआती शिक्षा असम से ही हुई। उस वक्त मेरा स्कूल एक सिनेमा घर में संचालित होता था। सिनेमाघर में रात में तो आर्मी के जवानों के लिए फिल्में चलती थीं और सुबह वहां स्कूल चला करता था। कक्षा दो तक की पढ़ाई मैंने वहीं से की। इसके बाद मैं गांव आ गया और पांचवीं की पढ़ाई मैंने अपने गांव के ही सरकारी स्कूल से की। इसके बाद आठवीं की पढ़ाई मैंने बड़ौत के जैन कॉलेज से की। इसके बाद मैंने जनता वैदिक इंटर कॉलेज में एडमिशन लिया। इसी दौरान मेरे पिता का एक्सीडेंट हो गया और वो विकलांग हो गए। उस दौरान मेरी माताजी का भी एक्सीडेंट हो गया। जिसके चलते परिवार की जिम्मेदारी मुझ पर आ गई। जिस कारण मैं 12 वीं की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाया। परिवार में सबसे बड़ा मैं ही था। 1984 में महज 16 साल की उम्र में मजबूरन मेरी शादी कर दी गई। फिर मैंने दिल्ली से ओपन से 12वीं की पढ़ाई पूरी की।

सवाल : समाज सेवा के क्षेत्र में कब आना हुआ?
जवाब : मेरा पूरा परिवार ही समाजसेवा से जुड़ा रहा। मेरे दादा जी फतेहशाह महाराज जी बहुत बड़े महात्मा थे। दिल्ली में उनके कई शिष्य हुए। गीता कॉलोनी में कंचन अपार्टमेंट के पीछे उनका वाल्मीकि आश्रम है जो बहुत बड़ा आश्रम है। वह भी पहले मिलिट्री में ही थे।

अपने कार्यालय में उज्ज्वला योजना के फॉर्म भरवाते राजकुमार ढिल्लों।

सवाल : सक्रिय राजनीति में कब आना हुआ?
जवाब : समाजसेवा के क्षेत्र से मैं पहले से ही जुड़ा था। वर्ष 1986 में मैं पूर्ण रूप से सक्रिय राजनीति में आ गया। मैंने उस वक्त कोई राजनीतिक पार्टी ज्वाइन नहीं की थी। उस वक्त मैं 1721 ब्लॉक झुग्गी कैंप में रह रहा था। मैंने देखा कि इस झुग्गी कैंप की बहुत सारी समस्याएं थीं। जिन्हें कोई देखने वाला नहीं था। मैं इन समस्याओं के लिए लड़ा और इसी के लिए सक्रिय राजनीति का हिस्सा बना।इन लोगों ने मुझे जनरल सेक्रेटरी बनाया। उस वक्त एक साल में इस झुग्गी कैंप के तीन प्रधान बदल गए थे। वे सब नशे के आदी थे और जनता की समस्याओं के समाधान में सक्षम नहीं थे। इसके बाद यहां के लोगों ने मुझ पर भरोसा जताया और मुझे अपना प्रधान चुना। मैं बहुत कम उम्र में यहां का प्रधान बन गया। वर्ष 1986 में रामप्रकाश खुराना जी मुझे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में लेकर आए जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। सेवा भारती का हिस्सा बना। मैंने प्राथमिक और द्वितीय वर्ष किया। विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल सहित संघ के विभिन्न अनुषांगिक संगठनों में सेवा करने का अवसर मुझे प्राप्त हुआ। समाजसेवा करते-करते मैं कब राजनीति में आ गया मुझे पता ही नहीं चला। उसी दौरान पार्टी से जुड़ा।

सवाल : पहला चुनाव कब लड़ना हुआ?
जवाब : जैसा कि मैंने बताया कि सक्रिय राजनीति में मैं वर्ष 1986 में ही आ गया था। मैंने अपने क्षेत्र के लोगों के लिए जी तोड़ मेहनत की । लगभग दो दशक से भी अधिक समय तक कड़ी मेहनत करने के बाद वर्ष 2012 में मैंने तत्कालीन वार्ड नंबर 213 कल्याणपुरी से पहली बार निगम पार्षद का चुनाव लड़ा। जनता का मुझे पूरा साथ मिला और मैं चुनाव जीत गया। मैं पहली बार चुनाव जीता था लेकिन पहली बार में ही मुझे डिप्टी मेयर के पद के लिए भी चुन लिया गया। वर्ष 2012-17 तक मैं पार्षद रहा। इसी दौरान मुझे जोन चेयरमैन, स्थायी समिति सदस्य, डैम्स कमेटी चेयरमैन, शिक्षा समिति के वाइस चेयरमैन और डिप्टी मेयर जैसे सम्मानित पदों पर सेवाएं देने का अवसर भी प्राप्त हुआ।

सवाल : वर्तमान में आप क्या जिम्मेदारी निभा रहे हैं?
जवाब : वर्ष 2017 में मेरा पार्षद पद का कार्यकाल खत्म हो गया था। इसके बाद लगभग डेढ़ साल पहले पार्टी ने मुझे प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का मयूर विहार जिले का चेयरमैन बना दिया। मैंने अपने जिले में खूब मेहनत की और अधिक से अधिक पात्र लोगों को योजना से जोड़ने का प्रयास किया। मेरे सेवा भाव और समर्पण को देखते हुए पार्टी ने मुझे पूरे पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र के चेयरमैन पद की जिम्मेदारी सौंप दी है। मैं इस जिम्मेदारी को पूरी मेहनत और ईमानदारी के साथ निभाने का प्रयास कर रहा हूं। अब प्रधानमंत्री आवास योजना के चेयरमैन आदरणीय राकेश प्रजापति जी ने संविधान दिवस के अवसर पर मुझे प्रधानमंत्री आवास योजना की दिल्ली प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपने की घोषणा की है। मैं उस जिम्मेदारी को भी पूरी मेहनत और ईमानदारी से निभाने का प्रयास करूंगा।

सवाल : पांच साल तक आप पार्षद रहे। डिप्टी मेयर सहित विभिन्न पदों पर काम किया। अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि आप किसे मानते हैं?
जवाब : पार्षद पद के कार्यकाल को दौरान मैंने जनता की जो सेवा की है और जो विकास के कार्य किए हैं वो मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। अपने वार्ड में मैंने कई काम किए हैं। यहां अपराध चरम पर था। तत्कालीन एसएचओ अरविंद कुमार के साथ मिलकर हमने दोनों ने बहुत अच्छा काम किया और यहां से अपराध को खत्म किया। हर चौक चौराहे पर फैंसी लाइटें लगवाईं। कोई भी पार्क, कोई भी चौराहा या कोई भी गली ऐसी नहीं थी जहां लाइटें न लगी हों। पूरे वार्ड की मैंने तस्वीर बदल दी थी।

संविधान दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते राजकुमार ढिल्लों।

सवाल : आपने कहा कि आपने पूरे वार्ड को चमकाया था लेकिन अब तो नालियां गंदगी से पटी पड़ी हैं। आपके घर के पास की ही सड़कें और गलियां टूटी पड़ी हैं, क्या वजह है?
जवाब : मेरा कार्यकाल वर्ष 2017 में ही खत्म हो चुका था। उस वक्त यहां लगभग 40 हजार वोटर थे जो अब बढ़कर लगभग 60 हजार हो चुके हैं। इस वार्ड में पूरी कल्याणपुरी, खिचड़ीपुर, कौंडली, गाजीपुर बॉर्डर आदि इलाके आते हैं। उसके बाद से यहां निगम पार्षद (मौजूदा वार्ड नंबर-195 जो पहले वार्ड नंबर 213 था) बंटी गौतम और विधायक कुलदीप मोनू दोनों आम आदमी पार्टी के हैं। उन्होंने वार्ड का बेड़ा गर्क कर दिया है। मैंने तो लोगों से सुना है कि दोनों की आपसी लड़ाई में इस वार्ड के हालात बदतर हो चुके हैं। स्थानीय जनता का कहना है कि दोनों जनता से वसूली के चक्कर में आपस में ही लड़ रहे हैं। इन्हें जनता की परेशानियों से कोई लेना-देना नहीं है।

सवाल : मौजूदा समय में आपके वार्ड में सबसे खराब स्थिति किस क्षेत्र की है?
जवाब : पूरी कल्याणपुरी की स्थिति खराब हो गई है। यहां सफाई के कार्य शून्य हो गए हैं, विकास के कार्य शून्य हो गए हैं। स्कूलों की बुरी हालत है। स्वच्छ पानी नहीं मिल पाता है।

सवाल : अब लोकसभा चुनाव आने वाले हैं। आपके वार्ड की मौजूदा स्थिति का क्या असर पड़ेगा लोकसभा चुनाव में?
जवाब : लोकसभा चुनाव में एकतरफा जीत मिलने वाली है भारतीय जनता पार्टी को। क्योंकि जनता ने आम आदमी पार्टी का काम देख लिया है। पार्षद भी आम आदमी पार्टी का है और विधायक भी आम आदमी पार्टी का है। इसके बावजूद जनता समस्याओं से त्राहिमाम कर रही है। पानी की इतनी बड़ी समस्या रही है, बूंद-बूंद के लिए तरसे हैं लोग लेकिन ये दोनों क्षेत्र में आते ही नहीं हैं। वहीं, दोनों की आपसी लड़ाई जनता पर भारी पड़ रही है।

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