झारखण्ड

ऊपरघाट के गोनियाटो में झूमर नृत्य का आयोजन, 100 टीमों ने लिए भाग

रामचंद्र कुमार अंजाना, बेरमो
झारखंड की कला-संस्कृति को जीवित रखने के उदेश्य से टिकैत कुमार महतो तीन दिवसीय फुटबॉल के फाइनल समारोह पर ऊपरघाट स्थित गोनियाटो के गौसाई टांेगरी में वृहद झूमर नृत्य का आयोजन किया गया। जिसका उदघाटन गोमिया विधायक डॉ.लंबोदर महतो, आजसू के डुमरी विस प्रभारी यशोदा देवी, जिप सदस्या खुशबू महतो व मुखिया अमृता मंराडी ने संयूक्त रूप से किया। झुमर नृत्य में बोकारो, गिरीडीह, हजारीबाग, धनबाद व रामगढ़ के विभिन्न गांवों के 100 टोली शामिल हुए। झूमर गीत की बोल व ढोल-मांदर की ताल पर गौसाई टोंगरी रातभर सरोवर रहीं। ग्रामीणों के विधायक, आजसू नेत्री, जिप सदस्या व मुखिया भी घंटों तक मादर की थाप पर थिरकती रहीं। सर्वधम, जात-पात व स्वच्छता पर एक से बढ़कर एक झुमर गीत प्रस्तुत किया गया। इसके अलावे बेटी बचाओ-बेटी पढाव, तिलक-दहेज व अत्याचार की प्रस्तुति पर उपस्थित ग्रामीणों खुब सराहा। लुप्त हो रही झूमर नृत्य में छात्राओं ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी। जिससे देखकर आज के युवा पीढ़ी झुम उठे। विधायक डॉ. लंबोदर ने कहा कि झूमर नृत्य झारखंड की संस्कृति एवं परंपरा का परिचायक है। हम सभी का दायित्व है कि झूमर के रूप में झारखंड और हमारे पुरखों के इस अनमोल धरोहर एवं विरासत को सहेजने के प्रति सजग रहें। इसे बचाए रखना हमारी कर्तव्य है। झुमर हमारे जीवन का अभिन्न अंग है। इसके लिए क्षेत्र में झुमर व का आयोजन एक अंतराल में होना चाहिए। गोनियाटो के ग्रामीण व टिकैत इसके लिए धन्यवाद के पात्र है, जो कि पिछड़ा क्षेत्र होने के बावजूद यहां पर भव्य झुमर नृत्य का आयोजन किया गया। यशोदा देवी व खुशबू महतो ने कहा कि झारखंडियों की ताकत उनकी संस्कृति है। आदिवासियों की खासियत है अभाव में खुश रहना। झूमर नृत्य में हजारों की संख्या में जुटे ग्रामीण आदिवासी इसके गवाह हैं। कहा कि हमें अपनी परंपरा, संस्कृति और सभ्यता को बचाकर रखना है और हमें अपने बच्चों को भी आने वाले समय के तैयार करना है। अमृता मंराडी ने कहा कि गीत और नृत्य में वही संबंध है जो पवन और मेघ में है।

आंतरिक आवेग जब अंग अंग से प्रतिस्फुटित होता है, तब ही गीत और नृत्य का जन्म होता है। झूमर गीत और नृत्य की अति प्राचीन लोक शैली है। मादर इसका एक वाद्य यंत्र है। इस दौरान झुमर टीमों के द्वारा शिव-पार्वती, राम-लक्ष्मण व दुर्गा मां तथा भारत माता की आर्कषक झांकी निकाली गयी। इसके बाद आरती वंदना की गयी। बच्चियों के द्वारा भी झुमर नृत्य प्रस्तुत किया गया। बच्चियों की प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया। भाग लिए 100 टोलियों को पुरस्कार स्वरूप एक-एक बकरा देकर सम्मानित किया गया। समारोह मुख्य रूप से रामचंद्र कुमार अंजाना, उमेश उजागर, कमल प्रसाद, महतो, संजय गिरी, किशोर महतो, भुवनेश्वर कुमार भुवनेश, तुलसी प्रसाद, भैरव महतो,सीताराम मांझी, रामकुमार मंराडी, जितेंद्र महतो, महेंद्र महतो, मनोज कुमार महतो, केदार महतो, दिनेश कुमार महतो, शैलेश कुमार, तुलसी महतो, गणपत महतो, राजेश तुरी, दामोदर महतो, राजेश मुर्मू, बिनोद महतो, मुकेश नायक, रूपेश रविदास, दिलीप मंराडी, जितेंद्र मुर्मू, राजेश मुर्मू, काजल महतो, मनीष कुमार सहित हजारों ग्रामीण महिला-पुरूष उपस्थित थे।

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