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विरासत में मिली सियासत, 20 साल के संघर्ष ने बनाया बरेली का सबसे बड़ा समाजवादी ब्राह्मण चेहरा, विधानसभा के लिए ठोकी ताल, पढ़ें सपा महासचिव पं. दीपक शर्मा का सफरनामा और क्यों मजबूत है दावेदारी?

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नीरज सिसौदिया, बरेली
राजनीति में सफलता पाने के लिए संघर्ष, धैर्य और जनता का विश्वास सबसे बड़ी पूंजी होती है। समाजवादी पार्टी के महानगर महासचिव दीपक शर्मा ने अपने 20 वर्षों के राजनीतिक सफर में यह साबित कर दिखाया है।

बरेली की सियासत में साफ-सुथरी छवि वाले पंडित दीपक शर्मा का चेहरा निर्विवाद है और किसी परिचय का मोहताज नहीं है। समाजवादी पार्टी के मौजूदा महानगर महासचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे दीपक शर्मा बरेली में समाजवादी पार्टी का संभवत: सबसे बड़ा और सबसे अधिक सक्रिय ब्राह्मण चेहरा हैं। साथ ही मुस्लिम और दलित समाज में भी उनकी गहरी पैठ है। हालांकि उन्हें सियासत अपने दादा स्वर्गीय नारायण दास शर्मा से विरासत में मिली थी लेकिन लगभग दो दशक के संघर्ष ने आज उन्हें एक अहम मुकाम पर लाकर खड़ाकर दिया है। दीपक शर्मा इन दिनों विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी का चेहरा बनने का प्रयास कर रहे हैं।

वह महानगर की दोनों ही विधानसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं। उन्होंने इस संबंध में संगठन के समक्ष अपनी इच्छा भी जाहिर कर दी है। इन दोनों ही सीटों पर ब्राह्मण वोट निर्णायक भूमिका में हैं। खास तौर पर कैंट विधानसभा सीट पर अगर समाजवादी पार्टी आधे ब्राह्मण वोटों को भी अपने पाले में कर लेती है तो यह सीट आसानी से जीती जा सकती है। शायद यही वजह है कि दीपक शर्मा ने कैंट सीट से भी ताल ठोक दी है।


अब नजर डालते हैं पंडित दीपक शर्मा के सफरनामे पर। 15 अगस्त 1980 को बरेली में जन्मे दीपक शर्मा का जीवन बचपन से ही कृषक परिवार और सामाजिक मूल्यों से जुड़ा रहा। उनके दादा स्व. नारायण दास शर्मा 35 वर्षों तक उनके पैतृक गांव घुरा राघवपुर के निर्विरोध प्रधान रहे। दादा ने ही दीपक शर्मा को समाजसेवा और नेतृत्व की प्रेरणा दी। आज भी दीपक शर्मा उसी राह पर चलते हुए जनता के बीच लोकप्रिय चेहरा बने हुए हैं। बहेड़ी विधानसभा चुनाव और बरेली नगर निगम चुनावों में भी उनकी अहम भूमिका रही है। वह पूर्व मंत्री अता उर रहमान के भी करीबी माने जाते हैं और महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी के भी। उन्हें हर वर्ग के लोग पसंद भी करते हैं। अगर समाजवादी पार्टी ब्राह्मण चेहरे पर दांव खेलेगी तो दीपक शर्मा वह चेहरा हो सकते हैं।

शुरुआत साधारण, इरादे मजबूत

बी.कॉम की पढ़ाई पूरी करने के बाद दीपक शर्मा ने कृषि को अपना व्यवसाय चुना लेकिन उनका मन हमेशा समाज और राजनीति की ओर खिंचता रहा। दीपक शर्मा ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत वर्ष 2003 में अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण सभा के जिला महासचिव के तौर पर की थी। वर्ष
2005 में वह समाजवादी पार्टी से जुड़े। इसके बाद उन्हें वार्ड अध्यक्ष और फिर समाजवादी सहकारिता सभा का महानगर अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद दीपक शर्मा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। मीडिया प्रभारी, जिला सचिव, लोहिया वाहिनी जिलाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए उन्होंने लगातार संगठन को मजबूत करने का काम किया। वर्तमान में वे समाजवादी पार्टी, बरेली के महानगर महासचिव हैं।

पहले भी कर चुके हैं विधानसभा के टिकट की दावेदारी

पंडित दीपक शर्मा के पास संगठन का लंबा अनुभव है। संगठन में सफल पारी खेलने के बाद वह चुनावी राजनीति में किस्मत आजमाना चाहते हैं। यह पहला मौका नहीं है जब पंडित दीपक शर्मा विधानसभा के टिकट के लिए ताल ठोक रहे हैं। इससे पहले वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में भी वह 125 बरेली कैंट विधानसभा सीट से सपा के टिकट के लिए दावेदारी जता चुके हैं।


170 साल पुरानी अगस्त्य मुनि आश्रम सभा के हैं अध्यक्ष

पंडित दीपक शर्मा 170 साल पुरानी “श्री अगस्त्य मुनि आश्रम सभा- बमनपुरी” के अध्यक्ष के रूप में धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों का सफल संचालन कर रहे हैं। दीपक शर्मा की पहचान एक स्वच्छ, निष्ठावान और संघर्षशील नेता की है। वे जनता की समस्याओं को सही मंच तक पहुंचाने और समाधान कराने में हमेशा आगे रहते हैं। 20 वर्षों के संघर्ष और समर्पण ने उन्हें बरेली की राजनीति में एक विश्वसनीय और लोकप्रिय नेता बना दिया है।

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